Amrish Puri: खुद से ईमानदार हैं तो शोहरत आपको धोखा नहीं देगी

खुद से ईमानदार हैं तो शोहरत आपको धोखा नहीं देगी | motivational speech | अमरीश पुरी:-आत्मविश्वास होना अच्छी बात है , लेकिन बिना डरे सर्वश्रेष्ठ नहीं दे
Santosh Kukreti

Amrish Puri Motivational Speech in Hindi: खुद से ईमानदार हैं तो शोहरत आपको धोखा नहीं देगी,आत्मविश्वास होना अच्छी बात है, लेकिन बिना डरे सर्वश्रेष्ठ नहीं दे सकते। गीदड़ का शिकार करने जाओ, तो भी शेर के शिकार की तैयारी करके जाओ ।- अमरीश पुरी, ( 1932-2005 ), विख्यात अभिनेता

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Amrish Puri: खुद से ईमानदार हैं तो शोहरत आपको धोखा नहीं देगी | Amrish Puri Motivational Speech in Hindi

मैंने सिनेमा की दुनिया में जब कदम रखा, तब 40 साल का था। ख्याल आता कि अगर 20-21 साल की उम्र से काम शुरू कर दिया होता, तो शायद अनुभव के कारण काम में और निखार आ जाता। पर भाग्य अपनी जगह है । मेरे नसीब में थिएटर में कड़ा परिश्रम लिखा था। मैंने खुद को एक-एक कदम आगे बढ़ाया। मेरी सोच थी कि अगर आप खुद से ईमानदार बने रहोगे, तो समय और शोहरत भी आपसे धोखा नहीं कर सकती। चीजें उसी तरह होती हैं, जैसे उन्हें होना होता है।

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मैंने हमेशा सिर्फ काम पर ध्यान दिया। कब फिल्में सफल होने लगीं, कब दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गया, पता ही नहीं चला। बॉलीवुड की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में मैंने धीरे-धीरे सर्वाइव करना शुरू किया। मेरे लिए सफलता बहुत धीमे-धीमे आई, बिल्कुल मेरी शख्सियत की तरह। धीमी पर स्थिर और उद्देश्य से भरी हुई।

असफलता सिखाती है, पर सफलता डराती है। ये सुनने में अजीब लगता है कि कोई सफल भी होना चाहता है और सफलता से डरता भी है। मेरी कोई फिल्म जब भी अच्छा प्रदर्शन करती, तो मेरे अंदर एक तरह की चेतावनी पैदा होती। 

मुझे अहसास होता कि इस गति से सफलता जारी रखने के लिए आगे से मुझे और ज्यादा एकाग्रता की जरूरत होगी। बिना डरे आप अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे सकते। आत्मविश्वास होना अच्छी बात है, लेकिन डर एक अच्छी निशानी है । गीदड़ का शिकार करने जाओ, तो भी शेर के शिकार की तैयारी करके जाओ।

अमरीश पुरी,अमरीश पुरी , ( 1932-2005 ) , ख्यात अभिनेता

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क्या पता, कब क्या जरूरत पड़ जाए । जब भी मुझसे पूछा जाता कि मेरे लिए सफलता के मायने क्या हैं? मैं दोहराता, दिमाग ठिकाने पर है। हमेशा उदार बने रहना जरूरी है। बेहद चर्चित हीरो बनने के अपने सपने को मैंने हमेशा पाला-पोसा लेकिन कभी भी सफलता को दिमाग पर हावी नहीं होने दिया ।

मैंने अपने बंगले को वरदान नाम दिया था। मतलब ईश्वर का आशीर्वाद । आप कभी ये नहीं कह सकते कि मैं अपने काम से संतुष्ट नहीं हूं। क्योंकि फिर आपने अपना पूरा योगदान नहीं दिय । जहां मेरी कमियां रहीं, उन फिल्मों को मैं नहीं देख सकता ।

मैं हमेशा प्रतिभा को तराशने में यकीन करता हूं। मैं इस दर्शन को मानता हूं कि दृढ़ निश्चय हमेशा फल देता है, इसलिए कभी भी खुद के प्रति वफादारी मत छोड़िए। आप अपने पीछे अगर कुछ छोड़ते हैं, तो वो है आपका नाम, आपकी वसीयत और दूसरों के लिए अपने अनुभव। 

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मैंने सीखा है कि धैर्य रखने का अभ्यास हर किसी को करना चाहिए । कई बार भले ही अभिनेता या कोई भी बेहद प्रतिभाशाली हो, तब भी दूसरों की नजर में आने के लिए उसे इंतजार करना पड़ता है । कई बार ये इंतजार बहुत लंबा हो जाता है । इसलिए धैर्य रखें। -अमरीश पुरी की आत्मकथा ' द एक्ट ऑफ लाइफ ' से साभार

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