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जिंदगी को हिस्सों में बांटकर उसका आकलन कर सकते हैं | Muhammad Ali

अनंत ऊर्जाInfinite Energy): जिंदगी को हिस्सों में बांटकर उसका आकलन कर सकते हैं,हर भौतिक चीज़ की एक उम्र होती है । हम यहां हमेशा नहीं रहने वाले । आपके पास प्रोडक्टिव बने रहने के लिए चंद साल ही शेष हैं । - - मुहम्मद अली , ( 1942-2016 ) विश्वविख्यात बॉक्सर 

अनंत ऊर्जा : जिंदगी को हिस्सों में बांटकर उसका आकलन कर सकते हैं | Muhammad Ali
 अनंत ऊर्जा : जिंदगी को हिस्सों में बांटकर उसका आकलन कर सकते हैं | Muhammad Ali

 अनंत ऊर्जा : जिंदगी को हिस्सों में बांटकर उसका आकलन कर सकते हैं

जिंदगी वाकई बहुत छोटी होती है । हम सोने में , यात्राओं में , मनोरंजन में आधा वक्त बिता देते हैं । शायद अपनी आधी जिंदगी बिना कुछ किए ही गुजार देते हैं । 65 की उम्र में पहुंचकर हम न ज्यादा कुछ कर सकेंगे , ना लोग हमें सुनेंगे । 

अगर आप अभी 35 साल के हैं , तो 65 के होने में 30 साल बाकी हैं । इन 30 सालों में 9 साल तो सोने में चले जाएंगे , उन 30 सालों में दिन का उजाला बहुत सीमित नसीब होगा । उन 30 सालों में शायद 16 साल ही काम के हो सकते हैं । इसी तरह हम सब अपनी जिंदगी को टुकड़ों में बांटकर उसका आकलन कर सकते हैं । 

जीवन के आने वाले सालों के दौरान आप क्या करने वाले हैं , कैसे अपना और दूसरों का जीवन बदलने वाले हैं ? यहां हर व्यक्ति अलग है । कुछ का जीवन बड़ा , तो किसी का + जीवन छोटा होता है , लेकिन जाना सबको है । यही टेस्ट है कि हम अपनी जिंदगी कैसे बिताने वाले हैं । 

आइने में देखें , कुछ लोगों के चेहरे पर झुर्रियां होगी , बाल झड़ रहे होंगे , शरीर थक रहा होगा । आपका शरीर बूढ़ा होता जाता है , असली जीवन तो आपके अंदर है । कोई भी भौतिक चीज हो , उसकी एक उम्र होती है । मेरी कार , घर ये शरीर ... सब नष्ट हो जाएगा । हम यहां हमेशा नहीं रहने वाले । 

आपका किसी भी चीज पर आधिपत्य नहीं है । आपके पास प्रोडक्टिव बने रहने के लिए चंद साल ही शेष हैं ।कुछ लोग ईश्वर पर भरोसा नहीं करते । पर मैं करता हूं । मानता हूं कि दुनिया में कोई भी चीज अपने आप नहीं पैदा होती है । उसका कोई सृजनकर्ता होता है । मैं जिंदगी के आने वाले साल ऐसे अच्छे कामों में बिताना चाहता हूं कि ईश्वर से एकाकार हो सके । 

मैं बॉक्सिंग करता हूं , लोगों को पीटता हूं । पर वो सिर्फ मेरा काम था । ईश्वर ये देखता है कि आप लोगों से किस तरह पेश आ रहे हैं । अपने रोजमर्रा के कामकाज में उदार रहें , अपने आसपास के लोगों से नरमी बरतें । मैं बचपन से खुद पर यकीन करने वाला रहा हूं । 

खुद को बहुत ही साधारण आदमी मानता हूं । जिसने अपनी प्रतिभा को तराशने के लिए कड़ी मेहनत की । माता - पिता ने आत्मविश्वास करना सिखा दिया । अपने पूरे बॉक्सिंग कॅरिअर में मैंने ये चीज देखी कि सामने वाले के स्किल के आगे मेरी इच्छाशक्ति हमेशा जीती । इस जिंदगी में कोई भी चीज मुझे नहीं हरा सकी । 

मैं सिर्फ खेल की बात नहीं कर रहा हूं । मैं खुद को हमेशा से ही सर्वश्रेष्ठ ' ग्रेटेस्ट ' मानता आया हूं । मैं मानता हूं जो व्यक्ति अच्छे कल की कल्पना नहीं कर सकता , वो कभी आगे नहीं बढ़ सकता है । असंभव जैसी कोई चीज नहीं है , ये विचार है । ये घोषणा है । - मुहम्मद अली के 1977 के टीवी इंटरव्यू का संपादित अंश

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