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सकारात्मक सोच का महत्व: आत्मशक्ति को चुनौती न दें , व्यावहारिक होकर फैसले करें

हम सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी सकारात्मक शक्ति (Positivity of power)  के साथ-साथ नकारात्मकता (negativity) दोनों के रस्साकशी का अनुभव किया है। कभी-कभी, हम नकारात्मकता और शंकाओं की ओर आकर्षित हो जाते हैं और संदेहों का झुंड बन जाता है: 

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'क्या मैं जो कर रहा हूं उसमें सफल होऊंगा?' 'क्या होगा अगर मैं एक भयानक गलती करता हूं?' 'मेरे पास यह नहीं है,' या 'यह व्यक्ति है बहुत बुरा है।' हम छोटी-छोटी असुविधाओं को देखने और छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेने में भी असमर्थ हो सकते हैं।

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वहीं दूसरी ओर कभी-कभी हम सकारात्मकता की ओर खिंच जाते हैं और बड़े आत्मविश्वास से भर जाते हैं। अक्सर, हम असंभव लगने वाले कार्यों को सिर्फ इसलिए कर पाते हैं क्योंकि हमें विश्वास था कि हम उन्हें कर सकते हैं। 

ऐसी स्थितियों में, हमारे सिर में यह आवाज लगातार हमें बता रही है: 'मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लूंगा,' 'मैं बहुत खुश हूं और जीवन से संतुष्ट हूं,' या 'मैं उन लोगों से घिरा हुआ हूं जो मुझे प्यार करते हैं और मेरा समर्थन करते हैं।'

किसी भी परिस्थिति में, केवल हम ही जानते हैं कि क्या हो रहा है; अर्थात्, केवल हम ही अपनी आंतरिक मनःस्थिति से अवगत होते हैं। अब, हम सभी ने यह भी अनुभव किया है कि सकारात्मकता सुख लाती है और नकारात्मकता दुख लाती है। ऐसा क्यों हैं? 

सकारात्मकता इतनी शक्तिशाली क्यों है? आइए जानें सकारात्मकता की ताकत।तो आइये जानते है -सकारात्मक सोच का महत्व: आत्मशक्ति को चुनौती न दें , व्यावहारिक होकर फैसले करेंगैरी केलर और जे पापासैन की किताब ' द वन थिंग ... ' से साभार-

सकारात्मक सोच का महत्व: आत्मशक्ति को चुनौती न दें , व्यावहारिक होकर फैसले करें

60-70 के दशक में शोधकर्ता वॉल्टर मिशेल ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के नर्सरी स्कूल में चार साल के बच्चों पर एक प्रयोग किया ' मार्शमैलो टेस्ट । ' ये बच्चों की आत्मनियंत्रण या आत्मशक्ति को देखने का एक तरीका था । 

बच्चों के सामने पीजा , कुकीज और मार्शमैलो में से किसी एक को लेने की पेशकश की जाती थी । रिसर्चर बच्चों को ये देकर चलते जाते थे और कह जाते थे कि उनके 15 मिनट बाद वापस आने का इंतजार करना है और यदि वे ऐसा कर पाएंगे , तो उन्हें एक और चीज खाने को दी जाएगी । 

औसतन बच्चे तीन मिनट से भी कम समय तक संयम रख पाए । दस में से केवल तीन बच्चे शोधकर्ता के आने तक इंतजार कर पाए । जिन बच्चों ने दूसरी वस्तु मिलने का सफलतापूर्वक इंतजार किया था , वे अपने क्षेत्र में तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे । सचमुच काफी बेहतर । 

आत्मशक्ति को आपने मोबाइल फोन में लगे पावर बार की तरह देखें । हर सुबह आप इस पूरी तरह से चार्ज करते हैं । लेकिन बैटरी खत्म होती जाती है । हमारी विल पावर में भी सीमित बैटरी होती है , मगर इसे लगातार रिचार्ज किया जा सकता है , अर्थात यह सीमित शक्ति वाला मगर नवीनीकृत किया जा सकने वाला स्रोत है । 

चूंकि आपकी आपूर्ति धीमी है , इसलिए हर बार आपका काम इसे हार - जीत के दृश्य में बदलता रहता है । दिनभर की उलझनों . से आप इसके बल पर पार पा लेते हैं , मगर शाम होने तक इसकी मात्रा बेहद घट जाती है । अधिकतर लोग अपने सबसे महत्वपूर्ण कामों को बिना आत्मशक्ति के किया करते हैं और वह भी बिना इस बात का अहसास किए कि उन्हें यह काम इतना कठिन क्यों लग रहा है । 

जब आपकी आत्मशक्ति अपनी उच्चतम अवस्था में हो , तब आपको सबसे जरूरी काम करना चाहिए । दूसरे शब्दों में आपको सही समय पर सही काम करना चाहिए । आपका दिमाग ऊर्जा की कमी महसूस कर रहा है , इसके चलते बेवजह के समझौते न करें । 

और इसके लिए सही भोजन करें और समय पर करें । अपनी आत्मशक्ति से लड़ाई न करें जीवन में सफलता पाने के लिए अपने दिन की योजना इसके इर्द - गिर्द ही बनाएं । -

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