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power of positivity : जीवन में नकारात्मकता के सामने सकारात्मक सच भी होता है

गुरुवार, अगस्त 5 | अगस्त 05, 2021 WIB Last Updated 2021-09-21T08:42:39Z

जीवन में नकारात्मकता के सामने सकारात्मक सच भी होता है

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Power of Positivity: हम खुद से नकारात्मक बातचीत ( सेल्फ टॉक ) का एक पैटर्न विकसित कर लेते हैं । बचपन में माता - पिता , शिक्षकों की नकारात्मक बातें याद रखते हैं । दोस्तों की नकारात्मक टिप्पणियों को याद रखते हैं , जिससे हम अपने बारे में क्या महसूस करते हैं , उसका महत्व कम हो जाता है । 

सालों तक ये संदेश हमारे दिमाग में चलते रहते हैं और गुस्सा , डर , ग्लानि और नाउम्मीदी की खुराक बनते जाते हैं । यहां power of positivity सकारात्मकता एक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । उस नकारात्मक संदेश को पहचानकर उसे अच्छी बातों और अपने बारे में अच्छा महसस करके रिप्लेस किया जा सकता है । 

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अगर बचपन की कोई बात रह रहकर परेशान करती है , तो उन यादों और संदेशों को कागज पर लिख लें । मुमकिन हो , तो बुरी यादों के लिए जिम्मेदार रहे किसी करीबी को इस प्रक्रिया में शामिल करें । अब अपने जीवन की सकारात्मक सच्चाईयों से उन बुरी यादों का मुकाबला करें । 

जीवन से जुड़ा हुआ कोई सच तुरंत दिखाई न भी दे तो धैर्य रखें । हर नकारात्मक संदेश के सामने जीवन का सकारात्मक सच जरूर होता है । चुनौती बस इसे खोजने की है । ये सत्य हमेशा मौजूद रहते हैं , उन्हें तब तक खोजते रहें , जब तक पा न लें । 

हर बार जब भी आप कोई गल्ती करते हैं , वह नकारात्मक संदेश दिमाग में रिप्ले की तरह चलता रहता है । अगली बार जब आप कोई गलती करें , तो असफलता के बारे में याद दिलाते किसी पुराने मैसेज को सकारात्मक मैसेज से बदल दें । खुद से कहें , ' मैं इसे स्वीकार करता हूं और गलतियों से सीखकर आगे बढ़ेगा । 

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जैसे - जैसे मैं अपनी गलतियों से सीखता चलूंगा , बेहतर इंसान बनता जाऊंगा । ' इस प्रक्रिया के दौरान गलतियां , अवसरों में बदल जाती हैं । अपने आप से सकारात्मक बातचीत करना खुद को धोखा देना नहीं है । ये सच से आंख मूंदना नहीं है । बल्कि सेल्फ टॉक तो उन हालातों में , और खुद में छुपे हुए सच को पहचानने के बारे में है । 

एक सच ये भी है कि आप गलतियां करेंगे । जिंदगी में संपूर्णता की उम्मीद करना छोड़ दें । स्रोत - ग्रेगरी एल जान्न , सायकोलॉजी टुडे

उम्मीद प्रेरणा ( hope inspiration)

1-बुद्धिमान व्यक्ति आराम से  फैसले लेता है , लेकिन वह अपने निर्णयों का पालन जरूर करता है ।

2-जहां हैं , वहीं से शुरू करें । जो भी है , उसका इस्तेमाल  करें । आप क्या कर सकते  हैं , करें । -आर्थर ऐश , अमेरिकी टेनिस खिलाड़ी

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