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motivational speech | लक्ष्य तय करके आप अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं

motivational speech | लक्ष्य तय करके आप अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं :-आत्मविश्वास चार कदमों से बढ़ा सकते हैं- पहला लक्ष्य तय करना , दूसरा उसकी ओर सफर की शुरुआत , तीसरा सफलता की ओर बढ़ना , चौथा- काम , काम और काम -एपीजे अब्दुल कलाम (A P J Abdul Kalam) , पूर्व राष्ट्रपति 

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motivational speech | लक्ष्य तय करके आप अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं

हम सभी आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्तियों को पसंद करते हैं , चाहे वह प्रेरणात्मक भाषण देने वाला वक्ता हो या पूरे आत्मविश्वास से मरीजों को देखने वाला डॉक्टर । दरअसल , आत्मविश्वास जीवन के हरेक पहलू के लिए जरूरी है , फिर भी कितने ही लोग इसके लिए जद्दोजहद करते रहते हैं । 

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आप गौर करिए कि लोग किसी ऐसे काम या उस व्यक्ति के साथ जुड़ने से भी पीछे हट जाते हैं , जिसकी बात करने वाले के अंदर घबराहट और हिचकिचाहट हो और जो जरा जरा सी बात में माफी मांगने लगता हो । दूसरी ओर , वह शख्स जो साफ - साफ बोलता हो और सिर उठाकर आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब देता हो और किसी बात की जानकारी न होने पर बेहिचक स्वीकार कर लेता हो , वह आपका भरोसा जीत लेता है ।

आत्मविश्वास से भरे लोगों को देखकर दूसरों के मन में भरोसा पैदा होता है । अच्छी बात यह है कि अपने अंदर आत्मविश्वास पैदा करना सीखा जा सकता है और इसे बढ़ाया जा सकता है । और चाहे आप अपने खुद के आत्मविश्वास पर काम कर रहे हों या अपने आसपास के लोगों के आत्मविश्वास बढ़ाने का काम कर रहे हों , यह एक ऐसा काम है , जिसकी अहमियत किसी भी सूरत में कम नहीं होती । 

इसलिए आत्मविश्वास बढ़ाने पर काम करते रहें । दो प्रमुख चीजें आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती हैं , कार्यकुशलता और स्वाभिमान । हमें अपने कार्यकुशल होने का तब अहसास होता है , जब हम पाते हैं कि जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं , उस क्षेत्र के लिए अहमियत रखने वाले हुनर हासिल कर रहे हैं । 1957 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पढ़ाई के आखिरी साल में था । 

उस दौरान एक ग्रुप प्रोजेक्ट में मैंने अनमोल सबक सीखा । प्रोफेसर श्रीनिवासन ने मुझे प्रोजेक्ट लीडर के रूप में नीची उड़ान = भरने वाले लड़ाकू विमान की प्रारंभिक डिजाइन तैयार करने को कहा था । छह सदस्यों की टीम - बनाई गई और डिजाइन जमा करने के लिए छह महीने का समय दिया गया । प्रोजेक्ट के एयरोडायनामिक्स और स्ट्रक्चरल डिजाइन की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई थी । 

पांच महीने बाद प्रोफेसर ने हमारे प्रोजेक्ट की समीक्षा की और पाया कि प्रोजेक्ट संतोषजनक ढंग से नहीं चल रहा था । हमने उनसे एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा । प्रोफेसर ने कॉनफिगरेशन डिजाइन के लिए तीन दिन का समय दिया । और कहा कि अगर वह इससे संतुष्ट हो गए तो एक महीना मिलेगा नहीं तो छात्रवृत्ति भी रद्द हो जाएगी । 

मुझे इससे बड़ा झटका जिंदगी में पहले कभी नहीं लगा था । छात्रवृत्ति से ही मेरी जिंदगी चलती थी । उसके बिना तो मैं अपने खाने का भी खर्च नहीं उठा सकता था । तीन दिन में काम पूरा करने के अलावा और कोई चारा नहीं था । ड्राइंग बोर्ड पर नजरें गड़ाए तीन दिन तक चौबीसों घंटे टीम काम करती रही । 

तीन दिन बाद प्रोफेसर आए और हमारी पीठ थपथपाई । इस प्रोजेक्ट पर काम करते हुए मेरे अंदर अपने काम की बुनियादी काबिलियत पैदा हुई और अपने साथ काम करने वालों के साथ मिलजुलकर चलने की समझ भी । इस अनुभव से सबक मिलता है कि आप अपना आत्मविश्वास बढ़ाने का काम इन चार कदमों से पूरा कर सकते हैं-

 पहले अपना लक्ष्य तय करना , दूसरा उस लक्ष्य की ओर अपने सफर की शुरुआत , तीसरा सफलता की ओर तेजी से बढ़ना और चौथा- काम , काम और सिर्फ काम । लक्ष्य निर्धारण वह सबसे जरूरी काम है , जिसे सीखकर आप अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं । -'आपका भविष्य आपके हाथ में किताब से साभार

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