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लघुकथा: उपहार | short story uphaar hindi kahani | kahainyan

 लघुकथा: उपहार(Short Story Uphaar Hindi Kahani):  कभी कोई एक बिंदूरखने की जगह दे देता है , तो जीवनरेखा खींचने का सिलसिला बनाने में सफलता मिल जाती है । वही बिंदू सबसे बड़ा उपहार है ।

लघुकथा: उपहार | short story uphaar hindi kahani | kahainyan
लघुकथा: उपहार | short story uphaar hindi kahani | kahainyan 

 लघुकथा: उपहार | short story uphaar hindi kahani | kahainyan 

उपहार -  आज उसका जन्म दिन था । बच्चे व पत्नी स्वागत में व्यस्त थे । कुछ रिश्तेदार आए हुए थे । टेबल सजाई जा रही थी । रंग - बिरंगे गुब्बारे देख बच्चे चहक रहे थे । उपहारों के रंग - बिरंगे पैकेट्स थे । सभी तैयारियों में लगे थे । बड़ा - सा केक टेबल पर सजाया हुआ था ।

 ..और वह न जाने कहां खो गया । उसकी स्मृति उसे कई साल पीछे ले आई .. जब वह मात्र 12-13 साल का था । शहर में एक पेड़ के नीचे बैठा रहता । आने - जाने वालों के सामने हाथ फैलाकर भीख मांगता । शाम तक इतना हो जाता कि उसका व उसकी मां का पेट पल जाता । एक दिन वहां से एक साहब गुजरे । वे शहर में नए आए थे । अपने ऑफिस पैदल ही जाते थे । वह दौड़ कर उनके पास गया । 

हाथ जोड़कर नमस्ते करके हाथ फैला दिया । उसे कुछ ज्यादा ही उम्मीद थी कि साहब हैं , तो बीस का नोट तो हाथ में आएगा ही । लेकिन ऐसा नहीं हुआ । उल्टे उनके भाव से साफ़ जाहिर हुआ की उसका इस तरह से हाथ फैलाना उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा । फिर भी पांच का सिक्का हथेली पर रख दिया । 

एक दो दिन तो इस तरह रोज़ मांगते रहने पर उन्होंने कुछ नहीं कहा । दो - पांच रुपए हाथ में रख दिया करते , पर उनके मिजाज से लगता था कि उन्हें भिखमंगों से नफरत है । एक दिन उन्हें गुस्सा आ ही गया । बुरी तरह से डांट दिया । कहने लगे - ' शर्म नहीं आती भीख मांगते हुए । अच्छे - भले सेहतमंद हो , मेहनत करके खाओ । 

तुम्हारी तरह सभी भीख मांगने लग जाएं तो देश में कमाएगा कौन ? हमारे देश के जितने भी भीख मांगने वाले हैं अगर मेहनत करने लग जाएं तो हमारी अर्थव्यवस्था को काफी गति मिल सकती है । ' साहब के चेहरे पर गुस्से को भांपकर वह चुपचाप गर्दन नीची कर पेड़ की तरफ लौट गया । 

अब साहब उसे रुपया नहीं देते । वह दौड़ कर उनके पास भी नहीं जाता । बस पेड़ की छाया में बैठा रहता । साहब भी तिरछी नजरों से घूरते हुए तेजी से निकल जाते । एक दिन साहब ख़ुद उसके पास आए । पास बैठे और हालचाल पूछा । उसे लगा आज साहब मूड में हैं , उसे बीस - पचास का नोट दे देंगे , पर ऐसा नहीं हुआ । वे पैसों की जगह एक पैकेट देकर कहने लगे- ' आज मैं तेरे लिए एक उपहार लाया हूं । ' फिर पैकेट खोला , उसमें से निकली वजन तौलने वाली मशीन देते हुए बोले- ' आज से तुम्हें भीख मांगने की जरूरत नहीं । 

ये मशीन सामने रख देना । लोग अपने आप तुलेंगे और तुझे पांच रुपए देकर जाएंगे । इससे तुझे किसी के सामने हाथ भी फैलाना नहीं पड़ेगा । तुम अपने मेहनत की खाओगे । ' कहकर उन्होंने गाल पर हल्की सी थपकी दी और चले गए । उसकी आंखें भर आईं । 

अब वे हमेशा उसके पास खुद रुकते । उसका हालचाल पूछते । उसकी दिन - भर की कमाई का पूछते । कभी - कभी हंस कर मजाक में कहते- ' पैसों की बचत करके रखना , तेरी शादी जो करनी है । 

धीरे - धीरे पैसों की भी बचत होने लगी । इस बीच चाय की दुकान भी खोल ली । दुकान चल निकली तो धंधे का विस्तार कर लिया । आज भरा पूरा परिवार , पैसा . गाड़ी अच्छे दोस्त सब कुछ है । किसी चीज की कमी नहीं है । पर साहब जाने कहां होंगे । उनका तो कुछ ही महीनों बाद तबादला हो गया था ।

 ' हैप्पी बर्थडे टू यू ' गाने के साथ उसका ध्यान टूटा । उसने मोमबत्तियां बुझाई । सब ने उपहार भेंट किए , पर उसे वह उपहार याद आ रहा था , जिसने उसकी जिंदगी को बदल दिया था । उसी उपहार ने उसे इस मकाम तक पहुंचाया । न जाने कहां होंगे वे साहब । पर जहां भी होंगे सैंकड़ों को नई राह दिखा रहे होंगे । अपने साहब को याद करते हुए उसकी आंखें नम हो आईं ।

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