रसोई घर जहां बच्चे सीखेंगे भी और बढ़ेंगे भी ।

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The kitchen is the place where children will learn and grow

रसोई घर स्त्रियों के लिए एक प्रयोगशाला है , जहां वे नित स्वाद के नए प्रयोग करती रहती हैं । इस प्रयोगशाला को बच्चों की क्लास भी बना लीजिए , जहां बच्चे सीखेंगे भी और बढ़ेंगे भी । जहां खेलें भी , खाएं भी एक क्लास बड़े मज़े की। 

रसोई घर स्त्रियों के लिए एक प्रयोगशाला है , जहां वे नित स्वाद के नए प्रयोग करती रहती हैं । इस प्रयोगशाला को बच्चों की क्लास भी बना लीजिए , जहां बच्चे सीखेंगे भी और बढ़ेंगे भी । जहां खेलें भी , खाएं भी एक क्लास बड़े मज़े की।

जिस उम्र में बच्चों का दिमाग़ तेजी से विकास कर रहा होता है , अगर उस समय उन्हें कुछ सिखाया जाए , या उनकी रुचि को तराशा जाए , तो वे ना सिर्फ तेज दिमाग इंसान बनेंगे बल्कि नए प्रयोगों को करने में उनकी रुचि भी बनेगी । यह वे गुण हैं , जो जीवन में उनके बहुत काम आएंगे । रसोई घर में काम करके उन्हें यह सहजता से मिल जाएंगे । सामान्य ज्ञान , विज्ञान की समझ , गणित को बुनियादी मजबूती तो मिलेगी ही । 

अगर आप हैरान हैं , तो जानें कि 3 से शुरु करके बच्चों के साथ अभिभावक हफ्ते में एक या दो बार अगर रसोई के कामों में मदद लें , तो इन लक्ष्य को पाया जा सकता है । आकार- स्वाद की समझ रोटी गोल होती है और समोसा त्रिकोण होता है , ये आकार बच्चा रसोई घर में आसानी से सीख सकता है । तीखा क्या है , मीठा क्या है , ये भी जानेगा । 

खाना बनाते हुए आकार के नाम लें , जैसे गोल रोटी , चौकोर पराठा आदि । इसके अलावा भिंडी गोल या लंबी , आलू मोटा या छोटा काटते हुए आकार समझाए जा सकते हैं । शब्द और भाषा का विकास 6-8 साल की उम्र से बच्चा जब व्यंजन विधि पढ़ता है और बारी - बारी क्या करना है , यह बताता जाता है , तो उसे वस्तुओं के बारे में जानकारी मिलती है । 

सामग्रियों के बीच अंतर पहचानकर उनके नाम और अंतर याद रखता है , जैसे कि सफ़ेद नमक और काले नमक के बीच का अंतर । इससे बच्चा नए शब्द भी सीखता है । वहीं जब रेसिपी की हर स्टेप पढ़कर खाना बनाने में मदद करता है , तो उसकी भाषा का विकास होता है । जब बच्चे के साथ खाना बनाएं , तो उससे पूछें कि अगला क़दम क्या होगा । 

इस तरह वह योजना बनाना , समय का सही इस्तेमाल और व्यंजन विधि का सही अनुपालन करना सीखेगा । जब तक खाना बन नहीं जाता , तब तक धैर्य भी रखना होगा । इससे ध्यान और सब दोनों गुणों का विकास होगा ।

फाइन स्किल्स बेहतर होंगे दस साल से बड़ी उम्र के बच्चों के लिए सामग्रियां मिलाना , आटे की लोइयों को बेलना बच्चों के हाथों को मजबूत और नियंत्रित करता है , जैसे वो जानेगा कि हाथों का कितना जोर लगाकर बेलना है और सही आकार कैसे लाना है । आंखों और हाथों का समन्वय कौशल किसी चीज को बेलने , मिलाने और फैलाने से विकसित होते हैं । अंकों का ज्ञान नाप - तौल सीखना तो स्वाभाविक ही है । 

आप जब बच्चे से आटा बोल में डालने के लिए कहें , तो साथ में कप की गिनती भी करें । हर बार जब आप कप या चम्मच से सामग्री निकालें तो जोर से गिनें । 5 साल से ऊपर के बच्चे को शुरुआती जोड़ - घटाना समझा सकते हैं । थोड़े बड़े बच्चे नापकर व्यंजन बनाने के स्वाद पर असर को समझ जाएंगे ।

जो पसंद है वही कराए आमतौर पर बच्चों को चीजों को काटना और गैस जलाने जैसे काम ही पसंद आते हैं । अगर बच्चा किसी जिद का बहाना बनाकर रसोई से जाने का रास्ता ढूंढे , तो उसे उसकी दिलचस्पी का काम दे दें , जैसे कि बिस्किट केक बनाना । बच्चे के साथ उनका पसंदीदा भोजन बनाएं । उनसे कहें कि अगर तुम्हें ये खाना है , तो अंत तक ध्यान देना होगा । 

भावनात्मक विकास हाथों से खाना पकाने की गतिविधियां बच्चों में भरोसा और कौशल पैदा करने में मददगार होती हैं । रेसिपी सीखने से बच्चों को स्वतंत्र बनने की भी प्रेरणा मिलती है । इससे उन्हें निर्देशों पर अमल करने और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करने की भी सीख मिलती है । दूसरों के लिए खाना बनाने से उनके प्रति प्रेम भाव भी विकसित होगा ।

बच्चों को वो दें जो पैसो से नहीं खरीदा जा सके 

बच्चों की परवरिश में सिर्फ  भौतिक सुख - सुविधाएं ही नहीं बल्कि वो शामिल करना चाहिए जिसे पैसो से खरीदा नहीं जा सके.

प्यार बिना शर्त 

परवरिश आपकी बातों के अलावा आपकी आत्मीयता, प्यार और विस्वास भी निर्भर करता है. बच्चों को एहसास करवाये की आप उनसे कितना प्यार करते है, बिना किसी नियम वह शर्तों के.

मुस्किल वक़्त में मजबूत सहारा

जब वह मुश्किलों को पहाड़ समझ कर टूटने लगे तो उनमे हिम्मत जगाना, वो दौडते हुए गिरे तो उन्हें संभलने और आगे बढ़ने का विश्वास देना आपकी जिम्मेदारी है.

ज़ज्बात पहुंचने का रास्ता साफ रखे

बच्चों की बातों और ज़ज्बात को अभिव्यक्ति का जरिया देना जरूरी है. अपने और बच्चों के बीच संवाद के इस पुल को कायम रखे 

उपलब्धियां और कोशिशों की सहारना करें 

बच्चों की उपलब्धियों और कोशिशों की तारीफ़ करें. उन्हें गलतियों से सीखने की आजादी दें 
आजमाइशो के लिए तैयार 
अगर परवरिश की यह मजबूत सीढ़ी खड़ी कर दें तो बच्चों का जिंदगी को देखने का नज़रिया बदल जाएगा और उनकी आजमाइशो का सामना करने की हिम्मत बढ़ जाएगी. वे समझ जाएंगे कि जिन खुशियो को वो चीज़ मे ढूँढ़ते थे, उन खुशियां की गुल्लक तो इन छोटे - छोटे लम्हों से भरी है जो जिंदगी की धूप - छां से भरती रहती है. 

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