अजीम प्रेमजी:अपनी मुस्कान पर किसी की बेरुखी हावी ना होने दें | azim premji motivational speech in Hindi

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 Azim Premji: अपनी मुस्कान पर किसी की बेरुखी हावी ना होने दें

हालातों पर प्रतिकार करने के बजाय प्रतिक्रिया देनी चाहिए । जब हम प्रतिक्रिया देते हैं , तो शांत दिमाग के साथ चीजों का सही आकलन कर पाते हैं । अजीम प्रेमजी , फाउंडर चेयरमैन , विप्रो

Azim Premji: अपनी मुस्कान पर किसी की बेरुखी हावी ना होने दें हालातों पर प्रतिकार करने के बजाय प्रतिक्रिया देनी चाहिए । जब हम प्रतिक्रिया देते हैं , तो शांत दिमाग के साथ चीजों का सही आकलन कर पाते हैं । अजीम प्रेमजी , फाउंडर चेयरमैन , विप्रो

azim premji motivational speech in Hindi-

Don't let anyone's indifference rule your smile: ज़िंदगी क बारे में सबसे मजेदार बात ये है कि जब कोई चीज आपसे छूटने लगती है तभी उसकी कद्र समझ आती है । जब मेरे बाल सफेद होने लगे , तब जाकर जवानी का महत्व पता चल रहा है । मैं उम्मीद करता हूं कि मेरी जिंदगी के ये सबक आपके जीवन में काम आएंगे । 

विनम्र होना बेहद जरूरी है । कई बार जिंदगी में बहुत कुछ हासिल करने के बाद हम सोचने लगते हैं कि क्या वाकई हम इसके हकदार थे । हमें हमेशा बहुत सारी चीजों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए । उत्कृष्टता यानी एक्सीलेंस की ओर बढ़ना एक और महत्वपूर्ण सबक़ है । श्रेष्ठता की ओर बढ़ने का एक तरीका है कि हम अपने से बेहतर लोगों की ओर देखें । सीखते रहें कि कैसे वे चीजें अलग तरीके से करते हैं । 

उत्कृष्टता बाहर से नहीं थोपी जा सकती । उत्कृष्टता कोई काम नहीं बल्कि आदत होनी चाहिए । मुझे किसी कविता की प्रेरक पंक्तियां याद आ रही हैं कि आपकी पहुंच हमेशा आपकी समझ से अधिक होनी चाहिए । सबकुछ , स्वर्ग भी इसी धरती पर है । आखिरकार आपकी स्पर्धा खुद से है , इसलिए प्रयास करते रहना चाहिए । 

विपरीत हालातों में कभी भी हथियार नहीं डालना चाहिए । मेरे एक मित्र ने एक वाक्या शेयर किया । उसकी आठ साल की बेटी जिगसॉ पहेली सुलझाने में लगी हुई थी । वह घंटों लगी रही , लेकिन सफल नहीं हो पाई । आखिरकार रात हो गई और उसके सोने का समय हो गया । दोस्त ने कहा कि मुझे नहीं लगता तुम कर पाओगी । रात हो गई है , इसे कल करना । बेटी का जवाब था कि मैं इसे कल क्यों करूं ? इसके सारे हिस्से यहीं हैं , बस मुझे जमाना ही तो है । यदि हम दृढ़ संकल्पित रहते हैं , तो किसी भी समस्या को इस परिप्रेक्ष्य में देख सकते हैं । 

मुझे जिंदगी में एक और सबक मिला कि बदलावों का स्वागत हमेशा करना चाहिए , लेकिन उस प्रक्रिया में अपने उसूलों से समझौता नहीं करना चाहिए । आपको परिभाषित करना चाहिए कि आपके मूल्य क्या हैं और आप किसकी ओर हैं । दुनिया आपको गलत कहे , लेकिन खुद पर यकीन होना चाहिए । यहां एक और वाक्या है । एक अखबार वितरक ( हॉकर ) का ग्राहक बेहद बदतमीज था । 

हर सुबह हॉकर की मुस्कराहट का बेरूखी से जवाब देता । पैसे भी फेंककर देता । लेकिन हॉकर शांत रहता । जब उसके मित्र ने पूछा कि तुम इतनी बेरूखी पर भी शांत कैसे रह लेते हो ? तो हॉकर ने मुस्कराकर कहा- वो अपनी चिड़चिड़ाहट पर काबू नहीं रख सकता और मैं अपने मुस्कान पर । उसकी खीझ को मैं अपनी मुस्कान पर क्यों हावी होने दूं ? प्रतिकार करने के बजाय प्रतिक्रिया देनी चाहिए । जब हम प्रतिक्रिया देते हैं , तो शांत दिमाग के साथ चीजों का आकलन करते हैं । - 2014 में नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स , मुंबई में प्रस्तुत भाषण के अंश

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