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जेन गुडाल: everything you do makes a difference | jane goodall inspirational motivational speech in hindi

Jane Goodall: आप जो कुछ भी करते हैं उससे फर्क पैदा होता है अपने आसपास की दुनिया पर असर डाले बिना आप एक भी दिन नहीं बिता सकते । ये आपको तय करना है कि आ

Jane Goodall: आप जो कुछ भी करते हैं उससे फर्क पैदा होता है

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अपने आसपास की दुनिया पर असर डाले बिना आप एक भी दिन नहीं बिता सकते । ये आपको तय करना है कि आप किस तरह का फर्क पैदा करना चाहते हैं । - जेन गुडाल , विख्यात मानवविज्ञानी 

everything you do makes a difference

jane goodall inspirational motivational speech in Hindi

एक सवाल मुझसे अक्सर पूछा जाता है- ' जेन क्या इस दुनिया में कोई उम्मीद बाकी है । क्या अफ्रीका के जंगलों के बचने की उम्मीद है , क्या चिम्पांजी बचेंगे । क्या धरती बचेगी । ' कई बार आशावादी बने रहना मुश्किल होता है । 

अफ्रीका में 15-20 सालों पहले हरियाली वाले इलाके आज रेगिस्तान बन गए हैं । लोगों को खाने के लिए नहीं है । सूखा है ।

हां , ये सच है कि हम अपनी धरती को खुद ही तबाह कर रहे हैं । मिट्टी का क्षरण कर रहे हैं । पर्यावरणविद भी डराने वाले , लेकिन वास्तविक आंकड़े बता रहे हैं । इस सबके बावजूद मुझे भविष्य के प्रति एक उम्मीद है । पर यह तभी मुमकिन है , जब हम अपने जीने का तरीका बदलते हैं । हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है । 

मेरे आशावादी होने के पीछे चार कारण हैं- पहला इंसानी दिमाग , दूसरा प्रकृति में लचीलापन , तीसरा युवाओं की ऊर्जा व उत्साह और चौथा इंसान का अदम्य साहस । यह हमारा दिमाग ही था , जिसके चलते पूर्वज टिक पाए । 

दिमाग के पास हर समस्या का समाधान है , बस उसे खोजने की जरूरत होती है । उम्मीद इसलिए है , क्योंकि आखिरकार हमने समस्याओं को समझकर उनका सामना करना शुरू कर दिया है । 

अगर हम प्रकृति को एक मौका दें , .हाथ आगे बढ़ाएं , तब प्रकृति भी हमारी मददगार होती है । ऐसी कई सफलता की कहानियां हैं । मैं नागासाकी गई थी । वैज्ञानिकों ने कहा था कि वहां कई सालों तक कुछ भी नहीं उग पाएगा । 

लेकिन मैंने वहां कोपलें फूटते देखीं । लंदन की थेम्स नदी का अंतिम छोर एक समय इतना जहरीला हो गया था कि सभी तरह के जीव नष्ट हो गए थे , लेकिन वहां भी जीवन लौटा । 

ऐसी सफलता की कहानियां हर जगह हैं । समस्या है कि हममें से अधिकांश लोग उनसे जुड़ते नहीं है । अहसास ही नहीं होता कि हम क्या बदलाव पैदा कर सकते हैं । हम अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ाना चाहते हैं । 

अपने आसपास की दुनिया पर असर डाले बिना आप एक भी दिन नहीं बिता सकते । हर व्यक्ति मायने रखता है । आप जो कुछ भी करते हैं , उससे फर्क पैदा होता है । ये आपको तय करना है कि आप किस तरह का फ़र्क पैदा करना चाहते हैं । 

जब मैं 10 साल की थी तब घरवालों को कहती थी कि मुझे अफ्रीका जाना है । वहीं जंगली जानवरों के साथ रहना चाहती हूं , उन पर किताबें लिखना चाहती हूं । मेरी बातें सुनकर सब मुझपर हंसते थे । मैं वो सब कैसे कर सकती थी ? हमारे पास ना पैसे थे , द्वितीय विश्वयुद्ध का डर भरा माहौल था । 

और मैं ठहरी छोटी लड़की । पर मां कहतीं कि अगर तुम वाकई कुछ पाना चाहती हो , तो कड़ी मेहनत करो । हर मौके का लाभ उठाओ । हम जो कुछ भी करें , उसमें सोचें कि ये निजी हित के साथ प्रकृति को कैसे प्रभावित करेगा । -जेन की किताब रीजन फॉर होप से साभार

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