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लघुकथा- दीर्घायु भवः| short story dirghayu bhav

लघुकथा- दीर्घायु भवः ,पति की लंबी आयु की कामना जैसे पत्नी करती है , क्या उसके साथ के लिए पति को भी यह प्रार्थना नहीं करनी चाहिए ? यश पाने , तरक्की


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लघुकथा- दीर्घायु भवः 

लघुकथा short stories 

पति की लंबी आयु की कामना जैसे पत्नी करती है , क्या उसके साथ के लिए पति को भी यह प्रार्थना नहीं करनी चाहिए ? यश पाने , तरक्की करने का आशीर्वाद केवल लड़कों को क्यों मिलता है ? सोनल का मन सवालों से भरा हुआ था ।

सोनल आधुनकि विचारों वाली लड़की थी । उसके विचारों को आधुनिक नाम देना ग़लत होगा , उन्हें उचित और तार्किक कहना होगा । हमने ही न जाने क्यों उचित और अनुचित व्यवहार को आधुनिकता एवं रूढ़िवादिता का नाम दे दिया है ।

सोनल पेशे से सीए है और हमेशा से समानता की समर्थक रही है । उसके शादी के पवित्र रिश्ते में बंधने के बाद रिश्तेदारों और सगे संबंधियों से मिलने - मिलाने का समय आया । हर कोई उस पर अखंड सौभाग्यवती भव या पुत्रवती भव के आशीर्वाद बरसा रहा था । नई - नई शादी थी और मां ने सिखाया था अपने विचारों को कुछ दिन के लिए भूल जाना । 

नई गृहस्थी में सब कुछ तुम्हारी सोच के जैसा नहीं होगा । मन में कई सवाल तो थे लेकिन उसने चुप रहना मंजूर किया । नए जीवन की पहली सीढ़ी पर वो संभल कर ही चलना चाहती थी । बस , मन में कई सवाल थे , ' सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद सब मुझे ही क्यों दे रहे हैं ? 

क्यों आशीष को सब मेरी दीर्घायु का आशीर्वाद नहीं देते ? उसे कहते हैं.खूब कमाओ और आगे बढ़ो । वो आईआईटी से ग्रैजुएट है तो मैं भी एक कामयाब सीए हूं । ' ये सब सवाल मन में थे और एक सवाल ये भी कि आशीष के विचार कैसे हैं ? क्या वो घर में भी समानता का हिमायती होगा ? 

सोनल की ससुराल में रिवाज था कि शादी के 7 दिन बाद पूरा परिवार और समाज के प्रमुख लोग कुलदेवी की पूजा में शामिल होते कुल के पंडित जी नव - विवाहित जोड़े के सुखद भविष्य की कामना के साथ पूजा करवा रहे थे । 

पूजा संपन्न करवाने के बाद पंडित जी ने कहा , ' बहू , पति परमेश्वर है और अब उसी से तुम्हारा जीवन है । ' 

सोनल ने एक शर्मीली मुस्कराहट के साथ नजरें झुका लीं । आशीष और सोनल की अरेंज्ड मैरिज थी । आशीष सोनल का सम्मान करता था और कुछ - कुछ उसके विचारों से परिचित भी था । उसकी चुप्पी को उसकी शालीनता मानकर वो मन ही मन आदर से भर उठा था । 

पूजा के बाद पंडित जी ने कहा , ' बहू , अब अपने पति परमेश्वर के चरण स्पर्श करो और उससे अखंड सौभाग्यवती की कामना के साथ आशीर्वाद लो । बेटा , तुम भी गृहलक्ष्मी को सदा सुहागन बने रहने का आशीर्वाद दो । ' 

तभी आशीष ने कहा , ' पंडित जी इनकी दीर्घायु की कामना कीजिए । क्या पत्नी की लंबी आयु के लिए कोई व्रत या पूजा नहीं होती है ? मुझे भी तो सारी उम्र इनका साथ चाहिए , वरना बुढ़ापे में साथ कौन देगा । ' आशीष के जवाब ने सोनल के मन को आश्वस्त किया कि उसने सही साथी का हाथ थामा है । 

दोनों ने जोड़े से सभी का आशीर्वाद लेना शुरू कर दिया । अब सोनल को भी सब ' आगे बढ़ो- खूब उन्नति करो ' के आशीर्वाद दे रहे थे । जब सोनल ने अपनी सास से आशीर्वाद लिया तो उन्होंने कहा , ' बिटिया दीर्घायु भव । ' सोनल की आंखें नम हो गईं । 

नई बहू के स्वागत के साथ - साथ बेटे - बहू भी स्वागत किया गया । की नई सोच का

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