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Health Tips: स्वास्थ्य पच्चीसी | स्वस्थ जीवन के 25 सूत्र

स्वस्थ एवं सुखी समाज हमारी कामना |स्वास्थ्य पच्चीसी|स्वस्थ जीवन के 25 सूत्र, healthy and life tips. स्वास्थ्य पच्चीसी|स्वस्थ जीवन के 25 सूत्र
Santosh Kukreti

स्वास्थ्य पच्चीसी|स्वस्थ जीवन के 25 सूत्र

न त्वहं कामये राज्यं न च स्वगसुखानी च । 

कामये दुःखतपतानां प्राणीनामर्तीनाशनम् ॥

healthy living formula: अपने पवित्र वेदों में प्रार्थना की गई है कि न तो मुझे स्वर्ग के सुखों की इच्छा है , न ही वैश्विक भोगों की और न ही राज्य प्राप्ति की , परंतु हे प्रभो सारे प्राणी जगत के दुःख संताप मिट जाएं , सभी सुखी और स्वस्थ हो कर आनंदमयी जीवन व्यतीत करें , यही हमारी इच्छा है ।

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हमारे यहां चिकित्सा कभी भी भौतिक साधनों की प्राप्ति या कमाई का साधन नहीं रही । हमारे ऋषि - मुनियों ने प्राणी मात्र की सेवा के लिए ईश्वर प्रदत्त आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली का विकास किया । आज बीमारियों के लिए विभिन्न कारणों को जिम्मेवार ठहराया जा रहा है , परंतु सबसे बड़ा कारण हमारी अरामपरस्त जिंदगी है , जिसे दुर्भाग्य से कुछ लोग आधुनिक जीवन भी कहते हैं । इसके चलते बीमारियां इतनी बढ़ गई हैं और इलाज इतना महंगा हो चुका है कि आम आदमी की पहुंच से पूरी तरह बाहर हो गया है । 

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एलोपैथी इलाज पद्धत्ति व चिकित्सकों की भौतिकतावादी हो रही सोच के चलते अब इलाज भी बीमारी से अधिक खतरनाक बनते जा रहे हैं । इन परिस्थितियों से निकलने का एक साधन है कि हम अपनी जीवन पद्धत्ति में सुधार करें और परंपरागत जीवन जीएं । 

आयुर्वेद मानता है कि अगर शरीर में प्राण अर्थात ऊर्जा हो तो उस शरीर को कोई बीमारी नहीं घेर सकती । शरीर में प्राण का विकास परिश्रम , सादगीपूर्ण व संयमित जीवन , प्रकृति की निकटता , अध्यात्मिक आचरण , मर्यादित व्यवहार से ही संभव है । 

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इसके अतिरिक्त भी बहुत सी बीमारीयां हैं जिनका इलाज हम ऐसे साधारण नुस्खों से कर सकते हैं जो सस्ते हो के साथ - साथ सुरक्षित व सर्वसुलभ है । आपके स्वस्थ व संपन्न जीवन की मंगलकामनाओं के साथ । तो आइये जानते है. स्वस्थ जीवन जीने के पच्चीस सूत्र |स्वास्थ्य पच्चीसी|स्वस्थ जीवन के सूत्र healthy and life tips. 

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  • प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम करें । तैरने व दौड़ने से अच्छा व्यायाम हो जाता है । सप्ताह में कम - से - कम एक बार पूरे शरीर की मालिश करें ।
  • प्रतिदिन चार - पाँच तुलसी की पत्तियाँ खाने से ज्वर आदि रोग नहीं होते । 
  • हमेशा शान्त और प्रसन्न रहें । कम बोलने की आदत डालें । जितना ज़रूरी हो उतना ही बोलें । 
  • चिन्ता से हानि होती है , लेकिन तत्त्व के चिन्तन - मनन से बुद्धि का विकास होता है ।
  • रात में एक तोला त्रिफला को एक पाव ठंडे पानी में भिगो दें , सुबह छान कर उससे आँखें धोयें और बचे हुए जल को पी जायें ।
  • बिस्तर के गद्दे - तकिये , चादर आदि को समय - समय पर धूप में डालने चाहिये ।
  • सोने के स्थान को साफ - सुथरा रखें । नींद आने पर ही सोना चाहिये । बिस्तर पर पड़े - पड़े नींद की राह देखना रोग को आमंत्रित करना है । दिन में सोने की आदत न डालें ।
  • अगरबत्ती , कपूर अथवा चंदन का धुआँ घर में हर रोज कुछ क्षणों के लिए करें । इससे घर का वातावरण पवित्र होता है ।
  • अच्छा साहित्य पढ़ें । अश्लील एवं उत्तेजक साहित्य पढ़ने से बुद्धि भ्रष्ट होती है । दूसरों के गुणों को अपनायें ।
  • हर समय माथा और पेट ठंडा तथा पैर गरम रखने चाहियें ।
  • सप्ताह में केवल नींबू पानी पी कर एक दिन का उपवास करें । इससे पाचन शक्ति सशक्त होगी और स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा । यदि पूरा उपवास न कर सकें तो फल खाकर या फल का रस पीकर उपवास करें ।
  • पचास से अधिक उम्र होने पर दिन में एक ही बार अन्न खायें । बाकी समय दूध और फल पर रहें ।
  • न तो इतना व्यायाम करना चाहिये और न ही इतनी देर टहलना चाहिये कि काफी थकावट आ जाये । टहलने और व्यायाम के लिये सूर्योदय का समय ही सबसे उत्तम है ।
  •  शयन करते समय सिर उत्तर या पश्चिम में रखकर नहीं सोना चाहिये । धूप में सोना हो तो सिर सूर्य की ओर करके सोयें और धूप में बैठना हो तो ऐसे बैठे कि पीठ पर धूप पड़े ।
  • कपड़ा , बिस्तर , कंघी , ब्रश , तौलिया , जूता - चप्पल आदि वस्तुएँ परिवार के हर व्यक्ति की अलग - अलग होने चाहिये ।
  • प्रौढ़ावस्था शुरू होते ही चावल , नमक , घी , तेल , आलू और तली - भुनी चीजें खाना कम कर देना चाहिये ।
  • नियमित समय पर प्रात : जाग कर शौच जाने वाला , समय पर भोजन करने और सोने वाला व्यक्ति स्वस्थ , सम्पन्न और बुद्धिमान् होता है ।
  • भोजन करने के तुरंत बाद लघुशंका अवश्य करनी चाहिये । इससे गुर्दे स्वस्थ रहते हैं ।
  • सही मुद्रा में चलने - बैठने का अभ्यास करना चाहिये । चलते समय पैर को घिसटते हुए , ठोड़ी को आगे निकाल कर या झटका देकर कदम नहीं रखने चाहिये । बैठते समय पीठ सीधी रखकर बैठें ।
  • प्रगाढ़ निद्रा में सोये व्यक्ति को नहीं जगाना चाहिये ।
  • जीवन में कभी अनावश्यक खर्चों के लिए ऋण नहीं लेना चाहिए ।
  • सादा जीवन उच्च विचार के सिद्धांत को जीवन में अपनाएं ।
  • एकांकी जीवन नहीं बल्कि सामाजिक जीवन व्यतीत करें । समाज में एक दूसरे के काम आएं ।
  • अपने काम से प्यार करें , इसे बोझ न समझ कर इसे ईश्वर को समर्पित करें । आप पाएंगे कि आपका काम ही राम तक पहुंचने का मार्ग बनेगा ।
  • आपका शरीर हर बीमारी से लड़ सकता है , उसकी शक्ति का विकास करें , अनावश्यक दवाओं के जाल में न फंसें ।
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