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अनमोल धरोहर एक लघुकथा | Anmol Dharohar Moral Short Story

Short Story- अनमोल धरोहर|लघुकथा-अनमोल धरोहर Short hindi stories - ' पापा , आप , धीरज ने खीझते हुए कहा । आप यहां लाइब्रेरी में बैठे हैं , हमने आपको पू
Santosh Kukreti

Short Story Anmol Dharohar in Hindi:-पिता का घर बेटों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने में मददगार धन मुहैया करा सकने का ज़रिया दिख रहा था । पर पिता घर से, अपनी किताबों के ख़ज़ाने से अलग नहीं होना चाहते थे ।

 लघुकथा -अनमोल धरोहर 

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अनमोल धरोहर एक लघुकथा 

पापा, आप, धीरज ने खीझते हुए कहा । आप यहां लाइब्रेरी में बैठे हैं, हमने आपको पूरे घर में ढूंढ ' वो एजेंट ख़रीदार को लेकर कभी भी पहुंच सकता है । आप बाहर आकर बैठिए , ' मंझला बेटा नीरज बोला । 

' अरे बच्चो, तुम्हें केवल मेरा मकान ही दिख रहा है, पर मेरा असली ख़जाना तो यह किताबें हैं'- श्रीकांत जी ने पुस्तकों को स्नेहिल दृष्टि से देखते हुए कहा । 

' पापा, अब तो डील हो चुकी है , इस घर की हर चीज् हमें यहीं छोड़नी होगी , यही ख़रीदार की शर्त है , ' छोटा बेटा जलज बोल पड़ा । तभी बाहर कार की आवाज आई , तीनों भागे । देखा तो उनकी बड़ी बहन मुक्ता कार से बाहर निकली । मुक्ता जैसे ही घर में आई, तीनों भाई बरस पड़े । ' क्या चाहिए तुम्हें, अब यहां क्यों आई हो । 

' मुक्ता को मौन खड़े देखकर छोटे ने उबलते हुए कहा- ' ज़रूर दीदी को सौदे की ख़बर मिल गई होगी । ' 

' पर दीदी ने तो साइन कर दिए हैं कि उन्हें संपत्ति में से कुछ नहीं चाहिए , उन्हें जरूरत भी नहीं है, सम्पन्न परिवार में हैं , ' नीरज ने मक्खन लगाते हुए कहा । 

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' दीदी , हमारे बच्चे अभी छोटे हैं , बेटियों की शादियां होना बाकी हैं , आपके तो बच्चों की शादियां भी हो चुकी हैं । फिर भी आप अपना हिस्सा चाहती हैं ? कमाल है '-धीरज ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई । 

श्रीकांत जी ने गरजते हुए कहा- ' चुप भी करो, मत भूलो अभी भी यह घर मेरा है और मेरे घर में मेरी बेटी का अपमान करने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी ? " 

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मुक्ता कुछ बोलती इसके पहले एजेंट आ गया, तीनों भाइयों ने कह, ' अरे आप अकेले आए ? ' -

 ' अरे भाई मैडम तो पहले ही आ गई हैं, इनकी तरफ से तो मैं सौदा कर रहा था, ' एजेंट ने हंसते हुए कहा । तीनों भाइयों के मुंह खुले के खुले रह गए । 

मुक्ता ने कहा- ' मैं ही पिता की इस विरासत को ले रही हूं । पापा यहीं रहेंगे, अपने घर में । पापा , घर के एक हिस्से में हम मां के नाम से वाचनालय बनाएंगे जिसमें आपकी पुस्तकें रखी जाएंगी । आपकी अनमोल धरोहर , आपका ख़जाना , अब सभी के उपयोग में आएगा । ' श्रीकांत जी मुग्ध होकर मुक्ता को देख रहे थे और तीनों भाई लज्जित - से खड़े थे ।

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