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देश में पहली बार ड्रोन से आतंकी हमला

 देश में पहली बार ड्रोन से आतंकी हमला।  

आतंकियों ने दहशत के लिए अब टेक्नोलॉजी का लिया सहारा जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन से गिराए आईईईडी ((Improvised Explosive Device)

देश में पहली बार ड्रोन से आतंकी हमला
देश में पहली बार ड्रोन से आतंकी हमला 

पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 14 किमी . दूरी पर भारतीय वायुसेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर शनिवार रविवार की दरम्यानी रात दो बम धमाके हुए । 

इन धमाकों से दो जवान मामूली घायल हुए जबकि टेक्निकल एरिया में बने भवन की छत को नुकसान पहुंचा । धमाके भले कम तीव्रता के थे , मगर गंभीर बात यह थी कि पहली बार हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया । 

के जरिये एयरबेस के भीतर दो आईईडी गिराए गए । एक आईईडी भवन की छत पर गिरा , जबकि दूसरा खुले स्थान पर गिरा । पहला धमाका रविवार तड़के 1:37 पर और दूसरा 1:43 पर हुआ । जांच एजेंसियों को आशंका है , हमले का निशाना एयरफोर्स स्टेशन पर खड़े वायुसेना के एयरक्राफ्ट थे ।

धमाके इनसे कुछ ही दूरी पर हुए हैं , मगर कोई नुकसान नहीं पहुंचा है । यह एयरबेस वायुसेना द्वारा संचालित सिविल एयरपोर्ट है । घटना के बावजूद यहां उड़ानें जारी रहीं । जेएंडके के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इसे आतंकी हमला बताया । 

हालांकि जांच एजेंसियां पाकिस्तान के एंगल से भी जांच कर रही हैं । यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की गई है । एनआईए जांच अपने हाथ में ले सकती है । घटना के कुछ देर बाद पुलिस ने जम्मू में लश्कर से जुड़े के एक आतंकी को 5-6 किलो विस्फोटक समेत गिरफ्तार किया है ।

हमला रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के लद्दाख दौरे से घंटे पहले हुआ । इसके बावजूद वे रविवार को लद्दाख पहुंचे । हमले के बाद जहां , पठानकोट एयरबेस पर गरुड़ कमांडो तैनात किए गए हैं वहीं , अमृतसर में बॉर्डर व श्री गुरु राम दास इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत लुधियाना , जालंधर के एयरफोर्स स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है ।

पाकिस्तान की सीमा सिर्फ 14 किमी . दूर , हमले के बाद ड्रोन किस तरफ गए इसकी जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियां 

मौके पर वायुसेना , राष्ट्रीय बम डेटा सेंटर , स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स व एनआईए की टीम मौजूद है । अधिकारी इस बात की जांच में सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं कि ड्रोन किधर से आए और हमले के बाद कहां गए । 

जांचकर्ताओं ने कहा - सीसीटीवी सड़कों पर नजर रखते हैं । स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन सीमा पार गए या कहीं और । अधिकारियों ने कहा कि एयरपोर्ट का रडार ड्रोन को पकड़ने में सक्षम नहीं है । इसके लिए ऐसे रडार की जरूरत है जो चिड़िया को भी देख सके ।

 स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स की टीम । धमाके में क्षतिग्रस्त भवन की छत ।

ड्रोन कितना खतरनाक

100 किमी . तक रेंज . रडार की जद में नहीं , दिखते ही मार गिराना उपाय

आतंकी हमले में ड्रोन का इस्तेमाल चिंताजनक है। ड्रोन के मामले में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि छोटा और नीची उड़ान भरने के कारण रडार की पकड़ में नहीं आता । बहुत पास आने  इसे देखा जा सकता है । 

यही कारण है कि ड्रोन के मामले में ' शूट टू किल ' का एसओपी अपनाया जाता है । इसके लिए अमेरिका और इजरायल मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं ।

 हम भी ड्रोन के हमले रोकने में पूरी तरह सक्षम हैं ।ड्रोन की रेंज 5 से लेकर 100 किमी . हो सकती यह ड्रोन के पेलोड पर निर्भर है । 

ड्रोन के टुकड़ों से 24 घंटे में पता चल जाएगा कि यह कितनी रेंज का था , कहां से उड़ान भरी होगी ।

 आखिर हमला अभी क्या 

ऐसे हमलों की तैयारी में समय  लगता है , पाक का हाथ संभव

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन सीमावर्ती क्षेत्र में है और है ।  घटना में बेशक पाकिस्तान का हाथ हो सकता है । लेकिन हम इस घटना को कश्मीर पर प्रधानमंत्री की पहल से जोड़कर नहीं देख पा रहे परहैं । आतंकी हमलों की साजिश बहुत पहले से चल रही होती है । 

एयरफोर्स स्टेशन को निशाना  बनाने के लिए वक्त चाहिए । दूसरे , कश्मीर में सक्रिय उग्रवादी गुटों की इतनी कुव्वत नहीं है  कि इस तरह के हमले के बारे में सोच सकें ।  कश्मीर पर ताजा पहल हमारा अंदरूनी मामला है ।  है ।

पाकिस्तान और वहां सक्रिय आतंकवादी गुट भारत में विघ्न डालने से बाज नहीं आएंगे ,  इसका अंदाजा सुरक्षा तंत्र को है ।

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