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यज्ञ क्या है? यज्ञ का अर्थ और यज्ञ कितने प्रकार के होते है

What is Yagya: यज्ञ वैदिक युग के दौरान पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान था, जो संतों द्वारा अग्नि के चारों ओर मंत्रों का जाप करते हुए किया जाता था।  इसके द्वारा प्रज्वलित अग्नि को यज्ञाग्नि कहा जाता है। यज्ञ सामान्यतः कर्मकांड की एक विधि है। यज्ञ मूल रूप से संस्कृत के ' यज ' धातु से बना है और इसका अर्थ होता है आहुति देना या चढ़ावा, दूसरे शब्दों में यज्ञ का संबंध त्याग कर्म और बलिदान जिसमें हम वस्तुओं को अग्नि को समर्पित करते हैं।

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यज्ञ भगवान् की पूजा और लोक कल्याण के लिए कहा जाता है।  आग यानी अग्नि को पावक कहते हैं और यह अशुद्धियों को दूर करता है उसी प्रकार यज्ञ के द्वारा वातावरण की शुद्धि होती है Yagya एक पौराणिक विज्ञान है

यज्ञ भगवान् की आराधना और जन कल्याण के हितों के लिए किया जाता है।यज्ञ का उपयोग उर्वरता, वर्षा और युद्धों में विजय देखने के लिए किया जाता था ।

भगवत गीता में  वर्णन किया गया है , भगवान् श्री कृष्ण अर्जुन को कहते है की जब प्राणी कर्म करने पर विवश है तो उसे चाहिए की कर्म इस प्रकार करे की जैसा कोई यज्ञ कर रहा हो ,तब अर्जुन भी श्री कृष्ण भगवान से कहते  प्रभु यज्ञ क्या है ? तब प्रभु श्री कृष्ण कहते है है पार्थ यज्ञ लोक कल्याण के लिए और भगवान् की आराधना के लिए भी किया जाता है।हमारा जीवन भी एक यज्ञ  जिसमे सांसों की आहुति पड़ती है। 

यज्ञ के प्रकार Type of Yagya 

श्रीमदभागवत में कहा गया है वैदिकस्तान्त्रिकों मिश्र इति में त्रिविद्योमख :: 

1 -वैदिक यज्ञ /स्रोत यज्ञ 

2 -स्मार्त या तांत्रिक यज्ञ 

3 -पौराणिक या मिश्रित यज्ञ 

1 -वैदिक यज्ञ /स्रोत यज्ञ 

इसमें केवल हवन सामग्री से यज्ञ किया जाता है। 

वैदिक काल के महत्वपूर्ण यज्ञ -

राजसूय

अश्वमेध 

वाजपेय  

राजसूय यज्ञ 

यह यज्ञ राजाओं के राज्याभिषेक के लिए किया जाता था 

अश्वमेध यज्ञ 

यह यज्ञ साम्राज्य के विस्तार के लिए किया जाता था ,यह केवल किसी प्रतापी राजा के द्वारा ही संपन्न होता था। राजा के अभिषेक के बाद अन्य राजाओं को चुनौती देने के लिए एक घोड़े को छोड़ा जाता था। यह घोडा जिस भी राज्य से होकर जाता उसे राजा के अधीन माना जाता था। परन्तु यदि कोई राजा इस घोड़े के रोक देता तो यह माना जाता की उक्त राजा पहले राजा के प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करता। तो तब उसे घोड़े के मालिक से युद्ध करना पड़ता था। 

वाजपेय यज्ञ 

इस आयोजन के समय पर शौर्य एवं शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक ही गोत्र के राजाओं के बीच रथदौड़ का आयोजन किया जाता था। 

2 - स्मार्त या तांत्रिक यज्ञ 

इसमें बलिप्रथा,हत्या के द्वारा यज्ञ पूरा होता है। 

अग्निष्टोम  

इस यज्ञ में अग्नि को पशु बलि दी जाती थी और सूरा की आहुति दी जाती थी, अग्नि को कुछ भेंट देने के कारण इसे अग्निष्टोम  कहते है। 

3 -पौराणिक या मिश्रित यज्ञ 

पुराणों  वर्णित यज्ञ के विभिन्न प्रकार है। जैसे पंच महायज्ञ ,धर्मशास्त्रों में हर एक गृहस्थ को रोजाना पंचमहायज्ञ करना जरुरी माना गया है जो इस प्रकार है -

१ -ब्रह्मा यज्ञ 

२-देव यज्ञ 

३-पितृ यज्ञ-

४-नृ यज्ञ

५-भूत बलि (वैश्वदेव यज्ञ )

१ -ब्रह्मा यज्ञ 

ऋषिओं की भांति अपना कुछ जैसे धन संम्पत्ति ,ऐश्वर्य ,शरीर ,मन प्राण ,बुद्धि ,ह्रदय आदि सभी परमात्मा को अर्पित कर दे और फिर उनके आदेश के अनुसार ही अपने जीवन में इन सभी का उपयोग करे,नियमित वेद ,धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना यही ब्रह्मा यज्ञ है। 

२-देव यज्ञ 

देवताओं की पूजा और हवन ही देव यज्ञ है जो हर घर में नियमित रूप से होना चाहिए। विश्व के कल्याण के लिए प्रत्यक्ष अग्नि में ऐसे आरोग्यमय पुष्ट और मंगल द्रव्यों और भक्ति से आहुति देना  ,जिसे विश्व में फैले अनंत देव ग्रहण कर सभी के कल्याण और शुभ के लिए आशीर्वाद दे। 

३-पितृ यज्ञ-

जीवन में पोषण ,रक्षण ,एवं विविध कल्याणों की अभिवृद्धि करने-कराने वाले गुरु-पितृ -एवं बड़ों की भक्ति और सेवा ही पितृ यज्ञ। सामान्य रूप से इसका अर्थ है तर्पण ,पिंड दान और श्राद्ध है ,तर्पण से हमारे पितृ खुश होकर धन,विद्या सुख,का आशीर्वाद प्रदान करते है। 

४-नृ या अतिथि यज्ञ 

इसका अर्थ घर पर आये अतिथि का आदर सत्कार करना , उनको पहले भोजन करने के पश्चात् ही भोजन करना चाहिए यही अतिथि यज्ञ है। हमारे देश में अतिथि को भगवान का रूप मानते है और कहते है अतिथि देवों भव :

५-भूत बलि (वैश्वदेव यज्ञ )

इसका अर्थ की आप अपने अन्न में से कुछ अंश दान देना जैसे किसी गरीब ,कुत्ता कौआ ,आदि के लिए निकालकर दान देना ही भुत यज्ञ कहलाता है। 

यज्ञ करने के फायदे Benefits of Yagna/Havan 

भारत में यज्ञ-कर्म वैदिक काल से किया जाता है। भारतीय संस्कृति में यज्ञ का आधात्मिक लाभ तो है ही साथ में वैज्ञानिक स्तर पर भी लाभ होता है तो आइये जानते है -

 यह वायु में दुर्गन्ध को दूर करने में सहायक होता है। 

इससे नई ऊर्जा का निर्माण होता है। 

yagya से बिमारियाँ रोग दूर होते है,

 यज्ञ में जिन सविधा-सामाग्री का प्रयोग किया जाता है उनसे जीरों परसेंट वायु प्रदूषण होता है और वातावरण स्वछ होता है। 

अन्य लकड़ियों को जलाने में कार्बन मोनो -ऑक्साइड उत्पन्न होता है जबकि आम की लकड़ी को जलाने पर नाम मात्र भी प्रदूषण नहीं होता है। 

यज्ञ करने पर आस-पास वातावरण में उपस्तिथ रोगाणु,(बैक्ट्रिया ,फंगस ) 60 से 70% कम हो जाते है।

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