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पॉजिटिव खबर:अच्छे स्वास्थ्य को मुहिम बना रहीं एनजीओ से जुड़ी सुमित्रा

पॉजिटिव खबर अच्छे स्वास्थ्य को मुहिम बना रहीं एनजीओ (ngo) से जुड़ी सुमित्रा, गांवों में मेंटल हेल्थ (mental health) पर फोकस , 36 हजार से ज्यादा महिलाओ

पॉजिटिव खबर अच्छे स्वास्थ्य को मुहिम बना रहीं एनजीओ (ngo) से जुड़ी सुमित्रा, गांवों में मेंटल हेल्थ (mental health) पर फोकस , 36 हजार से ज्यादा महिलाओं का जीवन बदला

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फोटो स्रोत फेसबुक Sumitra Gagarai

पॉजिटिव खबर:अच्छे स्वास्थ्य को मुहिम बना रहीं एनजीओ से जुड़ी सुमित्रा

झारखंड न्यूज़:- नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में डायन समझकर महिलाओं के साथ अत्याचार और उन्हें जान से मारने के मामले बढ़े हैं । स्थानीय भाषा में इसे डायन बिसाही कहते हैं । 

नीति आयोग की मानें तो स्वास्थ्य के मामले में स्थिति में सुधार हुआ है , लेकिन हालात फिर ही खराब हैं । हालांकि शिशु मृत्यु दर ( आईएमआर ) में सुधार हुआ है । प्रति एक हजार बच्चों पर 44 बच्चों की मौत से घटकर यह 29 पर आ गई है ।

झारखंड के सुदूर जनजातीय अंचलों में काम कर रहीं  Sumitra gagarai बताती हैं कि हालात सुधरे हैं , पर अभी बहुत काम करने की जरूरत है । झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में रहने वाली सुमित्रा महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे समय से काम कर रही हैं । 

पिछले 12 सालों से वह स्वास्थ्य के साथ - साथ महिलाओं - बच्चों के पोषण , हिंसा और शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में काम कर रही हैं । सुमित्रा सुदूर गांवों में अच्छे स्वास्थ्य को संस्कृति बनाने के मिशन पर हैं । वह अब तक 36 हजार से ज्यादा महिलाओं का जीवन बदल चुकी हैं । 

स्थानीय एनजीओ ' एकजुट(ekjut india)' में कॉर्डिनेटर सुमित्रा स्व - सहायता समूहों और महिलाओं के बीच सेतु का काम करती हैं । मेंटल हेल्थ पर काम करने के लिए 2020 में उन्हें कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री सीआईआई ) फाउंडेशन ने हेल्थ श्रेणी के वुमन एक्जेम्प्लर अवॉर्ड से सम्मानित किया था ।

31 साल की सुमित्रा झारखंड की ' हो ' जनजाति से आती हैं । खुद भी गरीबी में जीवन बीता । सुमित्रा बताती हैं कि 16 साल की उनकी बहन मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी । इलाज हुआ , लेकिन जागरूकता के अभाव में घर से सहयोग नहीं मिला । 

उनकी बहन ने डिप्रेशन में आकर ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली थी । उस घटना के बाद उनका जीवन बदल गया । सुमित्रा कहती हैं कि झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी अंधविश्वास बहुत ज्यादा है । महिलाएं तीन - तीन दिन तक प्रसव पीड़ा झेलती रहती हैं । 

हर चीज का इलाज झाड़ - फूंक में पहले ढूंढा जाता है । इस सबको बदलने के लिए सुमित्रा झारखंड के दर्जनों गावों में घूम - घूमकर नुक्ककड़ नाटक , कहानी के माध्यम से महिलाओं को जागरूक कर रही हैं । वह महिलाओं को खेल - खेल में अपनी समस्याएं बताने के लिए प्रेरित करती हैं ।

इनके एकजुट ' काम की लांसेट में भी तारीफ 

सुमित्रा बताती हैं कि झारखंड में अंधविश्वास के चलते बच्चों के जन्म के बाद गर्भनाल काटने को लेकर कई कुरीतियां थीं । साफ - सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता था । 

इसलिए नवजात बच्चों की मृत्यु दर ( नियोनैटेल ) बहुत ज्यादा थी । इसके बाद सुमित्रा और अन्य साथियों ने महिलाओं को खेल - खेल के माध्यम से जागरूक करना शुरू किया । एकजुट संस्था के जागरूकता मॉडल का जिक्र विख्यात मेडिकल जर्नल लांसेट(lancet journal) में भी किया गया था । 

एकजुट के प्रयासों से यहां नवजात मृत्यु दर में 45 फीसदी तक की कमी आई है । इसके अलावा महिलाओं के प्रति हिंसा में कमी के साथ पोषण को लेकर भी जागरूकता आई है । 

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