Pullela Gopichand motivational speaker speech in Hindi

Pullela Gopichand motivational speaker: किसी की हार पर तब बात मत करो जब वह हारकर लौटा है । ठीक उसी समय उसे पुश या सवाल - जवाब करना मददगार साबित नहीं

Pullela Gopichand Motivational Speaker: किसी की हार पर तब बात मत करो जब वह हारकर लौटा है। ठीक उसी समय उसे पुश या सवाल-जवाब करना मददगार साबित नहीं होता।- पुलेला गोपीचंद, विश्वविख्यात बैडमिंटन कोच- हमें श्रेष्ठता की संस्कृति विकसित करनी पड़ती है। 

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Pullela Gopichand Motivational Speech in Hindi

श्रेष्ठता के लिए एक संस्कृति श्रेष्ठता विकसित करनी होती है। एक ढांचा खड़ा करना पड़ता है। एक वाक्या है 2010 में कॉमनवेल्थ और फिर एशियन गेम्स के बाद हम दिसंबर में हैदराबाद लौटे। साइना नेहवाल ने कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीता था। साइना की ट्रेनिंग रोज सुबह 5.30 पर शुरू होती लेकिन मैं चाहता था कि पीवी सिंधु भी वर्ल्ड चैंपियन बनने के लिए तैयार हो। 

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सिंधु के पिता रमना से कहा कि उसकी ट्रेनिंग सुबह 4.15 पर शुरू होगी। सिंधु ने एक बार भी ना नहीं कहा। दिसंबर 2010 से लेकर जनवरी 2017 तक हर दिन, सिंधु और मैं सुबह 4.15 पर सेशन के लिए मिलते। मेरे लिए या सिंधु के लिए कभी भी ये मायने नहीं रखा कि रात में कौन कितने बजे सोया है, सुबह 4.15 पर सेशन शुरू हो ही जाता। विजेता बनने के लिए ये भूख हमारे अंदर होना चाहिए। इन चीजों पर आगे-पीछे होने की गुंजाइश भी नहीं होनी चाहिए। 

लोग पूछते हैं कि अनुशासन कहां से आए? मैं कहता हूं कि जब आप डिसिप्लन, हार्ड वर्क जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो ये शब्द पालन करने के लिहाज से बहुत भारी-भरकम और मुश्किल साउंड करते हैं। पर जिस दिन आप इन शब्दों को लाइकिंग, पैशन, इन्वॉल्वमेंट यानी जो भी काम कर रहे हैं, उसे पसंद करने, प्रेम करने या डूब जाने से जोड़ देंगे। 

किसी को कुछ सिखाना नहीं पड़ेगा। मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि मैं टैलेंट को कैसे खोजता हूं। दरअसल हम गलत सवाल कर रहे हैं कि टैलेंट कहां है? हर बच्चा प्रतिभावान है। ये हम पर है कि उसका टैलेंट हम खोज पा रहे हैं या नहीं। कभी-कभी असफलता के साथ भी सहज बने रहना ठीक है। 

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हमारे लिए ये जरूरी है कि गलती के तुरंत बाद उसे नजरअंदाज कर,' उसके सकारात्मक पक्ष पर ध्यान दें। गलतियों की तुरंत विवेचना करने का मुझे कॅरिअर में कभी भी फायदा नहीं मिला। किसी गेम में हारने के बाद खिलाड़ी से हार का कारण पूछो, तो निश्चित तौर पर वह रक्षात्मक जवाब देगा और हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ेगा। 

वहीं अगली बार जब खिलाड़ी कुछ हासिल कर लेता या जीतता, तब वह पिछली हार के बारे में खुद ही बात करने लगता कि काश मैंने उस दिन शॉट वैसे नहीं मारा होता, या सही समय पर सो गया होता, खाना ढंग से खाया होता! किसी उपलब्धि के भाव के साथ वह अपनी गलतियों पर बात करता है। 

सबक ये है कि किसी की हार पर तब बात मत करो जब वह तुरंत हारकर आया है। उसे भी अपनी गलती मालूम है और कड़ी मेहतन के लिए वो तैयार है। लेकिन ठीक उसी समय उसे पुश करना मददगार साबित नहीं होता।- द क्रेस्ट अवॉर्ड समारोह में दिए भाषण के चुनिंदा अंश

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