Dalai Lama: अकेलेपन से बचने के लिए करुणा रखिए

कई बार लोग अपनों की गैरमौजूदगी में अकेलापन महूसस करते हैं । पर मैं अकेलापन महसूस नहीं करता । इसका एक कारण यह है कि मैं हर व्यक्ति को अधिक सकारात्मक

Dalai Lama Inspirational Speechतिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरू जिन्हे दलाई लामा की पदवी दी जाती है वर्तमान में तेनजिन ग्यात्सो दलाई लामा है। वर्तमान में 14वाँ दलाई लामा ग्यात्सो दलाई लामा तिब्बत से बाहर भारत में निर्वासित जीवन बीता रहे है। आइये जानते है Dalai Lama Motivational Thoughts किसी के सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान देने से तत्काल एक तरह का लगाव व जुड़ाव बन जाता है।- दलाई लामा, तिब्बती धर्मगुरु 

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Dalai Lama Motivational Speech

कई बार लोग अपनों की गैरमौजूदगी में अकेलापन महूसस करते हैं। पर मैं अकेलापन महसूस नहीं करता। इसका एक कारण यह है कि मैं हर व्यक्ति को अधिक सकारात्मक नजरिए से देखता हूं, उनके सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान देता हूं। 

ऐसा करने से तत्काल एक तरह का लगाव, एक किस्म का जुड़ाव स्थापित हो जाता है। आंशिक रूप से इसका कारण यह भी हो सकता है कि मुझे इस बात का डर कम होता है कि अगर मैं किसी खास ढंग से व्यवहार करूंगा तो यह व्यक्ति मेरा सम्मान नहीं करेगा या सोचेगा कि मैं विचित्र आदमी हूं। 

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मेरे मन में इस तरह का डर नहीं होता, इसलिए खुलापन अपने आप आ जाता है। इसके लिए आपको करुणा की उपयोगिता को समझना होगा। करुणा यानी समानुभूति, उसके सुखदुख में भागीदारी। एक बार जब आप यह स्वीकार कर लें कि किसी के प्रति Mercy का भाव होना कोई बचकानी या भावुक चीज नहीं है। 

इसका मूल्य पता लग जाए तो फिर आप इसके लिए तैयार हो जाएंगे। इससे मैत्रीपूर्ण सकारात्मक माहौल बनता है। बहुत से मामलों में लोग स्वयं सकारात्मक संभावना तैयार करने के बजाय पहले सामने वाले से सकारात्मक प्रतिक्रिया की अपेक्षा रखते हैं। इससे समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जो बाधा बनकर हमें दूसरों से दूर कर सकती हैं। इसलिए यदि आप अलगाव और अकेलेपन के भाव से बचना चाहते हैं, तो करुणा का भाव रखना सबसे अच्छा तरीका है। लोगों के साथ सहज महसूस करने या फिर अन्य लोगों द्वारा नापसंद अथवा परखे जाने का संदेह या डर न होने की क्षमता विकसित की जा सकती है। 

खुलेपन से आपको सामने वाले के साथ सार्थक बातचीत की संभावना उपलब्ध हो जाती है। लेकिन यदि करुणामयी व्यवहार के अभाव में अगर परेशान होंगे, तो अपने सबसे अच्छे दोस्तों के साथ भी अहसहज महूसस होगा।-'आनंद का सरल मार्ग किताब से साभार

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