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चाणक्य नीति: दूसरा अध्याय [हिंदी में ] Chanakya Niti Second Chapter In Hindi

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    "चाणक्य नीति " गुरु चाणक्य कि नीतियों का ही अलौकिक संग्रह है ,जो की आज भी इतने समय बाद उतना ही सार्वभौमिक और सत्य है जितना तब था।

चाणक्य नीति हमें अच्छे और बुरे मित्रों में भेद करता है ,साथ ही अपने दुश्मनों की भी जानकारी देता है ,कौन   आप का हित और अहित चाहता है इसका भी बौद्ध कराता है। दुष्टा स्त्री (चरित्रहीन )स्त्रियों एवं पति-परायण आदि विषयों  का सम्पूर्ण ज्ञान संग्रह है।

वर्ण व्यवस्था ,राजा व् जनता के अधिकारों का सम्पूर्ण विवरण दिया गया है। आपको बता दे की चाणक्य नीति के पुरे सत्रह अध्याय है जिनकी चाणक्य नीति दूसरा अध्याय [हिंदी में ] Chanakya Niti In Hindi | Second Chapter  जानकारी आपको नीचे दी गयी है।-

  चाणक्य नीति: दूसरा अध्याय [हिंदी में ] Chanakya Niti Second Chapter In Hindi  

अनृतं साहसं माया मूर्खत्वमतिलोभिता । 

अ शौचत्वं निर्दयत्वं स्त्रीणांदोषा : स्वभावजाः ।।1

    1-झूठ  बोलना, उतावलापन दिखाना ,छल -कपट ,मूर्खता ,अत्यधिक लालच ,अशुद्धता और दयाहीनता, ये सभी प्रकार के दोष स्त्रियों  मे  स्वाभाविक रूप से मिलते है। 

     Untruthfulness, rashness, guile, stupidity, avarice, uncleanliness, and cruelty are a woman's seven natural flaws. - Chanakya

                                                           भोज्यं भोजनशक्तिश्च रतिशक्तिर्वराङ्गना । 

    विभवो दानशक्तिश्च नाऽल्पस्य तपसः फलम् ।।2

     2-भोजन कराने  तथा उसे अच्छी  तरह से पचाने  की शक्ति  हो तथा अच्छा भोजन, समय पर प्राप्त हो, प्रेम करने के लिए अर्थात रति-सुख प्रदान करने वाली उत्तम स्त्री के साथ संसर्ग हो, खूब सारा धन और उस धन को दान करने का उत्साह हो, ये सभी सुख किसी तपस्या के फल के समान है, अर्थात कठिन साधना के बाद ही प्राप्त होता है। 

    To have ability for eating when dishes are ready at hand, to be robust and virile in the company of one's religiously wedded wife, and to have a mind for making charity when one is prosperous are the fruits of no ordinary austerities. - Chanakya

     यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी । 

      विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ।।3

     3-जिसका पुत्रः आज्ञा  कारी  हो, स्त्री  उसके अनुसार चलने वाली हो, जो अपने पास धन से संतुष्ट रहता हो, उसका स्वर्ग यही पर है । 

    He whose son is obedient to him, whose wife's conduct is in accordance with his wishes, and who is content with his riches, has his heaven here on earth. - Chanakya

     ते पुत्रा ये पितुर्भक्ताः स पिता यस्तु पोषकः । 

     तन्मित्रंयत्रविश्वासःसा भार्या यत्र निर्वृतिः ।।4

     4-पुत्रः वह हैं जो पिता भक्त है ।  पिता वही है जो बच्चों का पालन-पोषण  करता  हो  स्त्री  वही है जिससे परिवार मैं सुख-शांति व्याप्त हो । 

      They alone are sons who are devoted to their father. He is a father who supports his sons. He is a friend in whom we can confide, and she only is a wife in whose company the husband feels contented and peaceful. - Chanakya

      परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम् ।। 

      वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भम्पयोमुखम् ।।5

     5-जो मित्रः प्रत्यक्ष रूप से मधुर वचन बोलता हो और पीठ पीछे अर्थात अप्रत्यक्ष रूप से आपके सारे  कार्यों मैं रोड़ा अटकाता हो ,ऐसे मित्रः को उस घड़े के समान त्याग देना चाहिए जिसके भीतर विष भरा हो और ऊपर मुँह के पास दुध  भरा हो । 

A   void him who talks sweetly before you but tries to ruin you behind your back, for he is like a pitcher of poison with milk on top. - Chanakya

      न विश्वसेत्कुमित्रे च मित्रे चापि न विश्वसेत् । 

      कदाचित्कुपितं मित्रं सर्वगुह्यं प्रकाशयेत् ।।6

    6-बुरे मित्रः या अपने मित्रः पर कभी भी विश्वास  नहीं करना चाहिए क्योकि कभी नाराज होने पर संभवतः आपका विशिष्ट मित्रः भी आपके सारे रहस्यों को प्रकट कर सकता है 

 

     Do not put your trust in a bad companion nor even trust an ordinary friend, for if he should get angry with you, he may bring all your secrets to light. - Chanakya

      मनसा चिन्तितं कार्यं वचसा न प्रकाशयेत् । 

      मंत्रेण रक्षयेद् गूढं कायं चापि नियोजयेत् ।।7

     7-मन से विचारे गए कार्य कभी किसी से नहीं कहना चाहिए , अपितु उसे मंत्रः की तरह रक्षित करके अपने कार्यों को करना चाहिए । 

      Do not reveal what you have thought upon doing, but by wise council keep it secret, being determined to carry it into execution. - Chanakya 

    कष्टञ्च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम् । 

       कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम् ।।8

     8-निश्चित रूप से मूर्खता दुःख दायी है और यौवन भी दुःख देने वाला है परन्तु  कष्टों से भी बडा कष्ट दूसरों के घर पर रहना है । 

       Foolishness is indeed painful, and verily so is youth, but more painful by far than either is being obliged in another person's house. - Chanakya

       शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे । 

       साधवो नहि सर्वत्र चन्दनं न वने वने ।।9

हर 9-एक पर्वत मै  मणि नहीं होता और साधु लोग सभी जगह नहीं मिलते और हर एक वन मै चन्दन के वृक्ष  नहीं होते । 

    There does not exist a pearl in every mountain, nor a pearl in the head of every elephant; neither are the sadhus to be found everywhere, nor sandal trees in every forest. - Chanakya

       पुत्राश्च विविधैः शीलैर्नियोज्याः सततं बुधैः । 

        नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः ।।10

    10-बुद्धिमान लोगों का कर्तव्य होता है की वे अपनी संतान को अच्छे कार्य-व्यापार मै  लगाए क्योकि नीति के जानकार व् सदव्यवहार वाले व्यक्ति ही कुल मे सम्मानित होते हैं । 

     Wise men should always bring up their sons in various moral ways, for children who have knowledge of Niti-sastra and are well behaved become a glory to their family. - Chanakya

        माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः । 

        न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये वको यथा ।।11

    11-जो माता-पिता अपने बच्चौं को नहीं पढ़ाते ,वे उनके शत्रु  हैं ।   ऐसे अनपढ़ बालक सभाके  मध्य मे उसी प्रकार शोभा  नहीं पाते ,जैसे हंसों के मध्य मे  बगुला शोभा  नहीं पाता। 

    Those parents who do not educate their sons are their enemies; for as is a crane among swans, so are ignorant sons in a public assembly. - Chanakya

         लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः । 

          तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्नतुलालयेत् ।।12

     12-अत्यधिक लाड़प्यार से शिष्य और पुत्र गुणहीन हो जाते है और ताड़ना से गुनी हो जाते है ।  भाव यह है कि यदि शिष्य और पुत्र को ताड़ना का भय रहेगा तो वे गलत मार्ग पर नहीं जायेंगे ।        

     Many a bad habit is developed through overindulgence, and many a good one by chastisement, therefore beat your son as well as your pupil; never indulge them. ("Spare the rod and spoil the child. - Chanakya

       श्लोकेन वा तदर्धन पादेनकाक्षरेण वा । 

       अवन्ध्यं दिवसं कुर्याद्दानाध्ययनकर्मभिः ।। 13

    13-एक श्लोक ,आधा श्लोक ,श्लोक का एक चरण, उसका आधा अथवा एक अक्षर ही सही या आधा अक्षर प्रतिदिन पढ़ना चाहिए। 

       Let not a single day pass without your learning a verse, half a verse, or a fourth of it, or even one letter of it; nor without attending to charity, study, and other pious activity. - Chanakya 

      कान्ता वियोगः स्वजनापमानि । ऋणस्य शेषं कुनृपस्य सेवा।। 

       दरिद्रभावो विषमा सभा च । विनाग्निना ते प्रदहन्ति कायम् ।। 14

    14-स्त्री का वियोग ,अपने लोगों  से अनाचार,कर्ज का बंधन  ,दुष्ट राजा की सेवा,दरिद्रता और अपने प्रतिकूल सभा, ये सभी अग्नि न होते हुए भी शरीर  को जला देते है ।

(     

    Separation from the wife, disgrace from one's own people, an enemy saved in battle, service to a wicked king, poverty, and a mismanaged assembly: these six kinds of evils, if afflicting a person, burn him even without fire. - Chanakya 

        नदीतीरे च ये वृक्षाः परगेहेषु कामिनी । 

        मंत्रिहीनाश्च राजानः शीघ्रं नश्यन्त्यसंशयम् ।। 15

     15-नदी के किनारे खड़े वृक्ष ,दूसरे के घर गए स्त्री,मंत्री के बिना राजा,शीग्र ही नष्ट हो जाते है।  इसमें संसय नहीं करना चाहिए । 

       Trees on a riverbank, a woman in another man's house, and kings without counselors go without doubt to swift destruction. - Chanakya

           बलं विद्या च विप्राणां राज्ञां सैन्यबलं तथा । 

            बलंवित्तञ्चवैश्यानां शूद्राणां परिचर्यिका ।। 16

     16-ब्राह्मणों का बल विद्या है,राजाओं का बल उसकी सेना है,वेश्या का बल उसका धन है और शूद्रों का बल छोटा बन कर रहना है, अर्थात सेवा-कर्म करना है। 

A  brahmin's strength is in his learning, a king's strength is in his army, a vaishya's strength is in his wealth and a shudra's strength is in his attitude of service. - Chanakya

        निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत् । 

         खगा वीतफलं वृक्षं भुक्त्वाचाभ्यागतोगृहम् ।। 17

    17-वेश्या निर्धन मनुष्यों को,प्रजा पराजित राजा को,पक्षी फल रहित वृक्ष को व् अथथि उस घर को,जिसमें वे आमंत्रित किये जाते हैं,को भोजन करने के पश्चात छोड़ देते है । 

    The prostitute has to forsake a man who has no money, the subject a king that cannot defend him, the birds a tree that bears no fruit, and the guests a house after they have finished their meals. - Chanakya

         गृहीत्वा दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम् । 

          प्राप्तविद्या गुरुं शिष्या दग्धारण्यं मृगास्तथा ।। 18

      18-ब्राह्मण दक्षिणा ग्रहण करके यजमान को,शिष्य विद्याध्ययन करने के उपरांत अपने गुरु को और हिरण जले हुए वन को त्याग देते हैं । 

    Brahmins quit their patrons after receiving alms from them, scholars leave their teachers after receiving education from them, and animals desert a forest that has been burnt down. - Chanakya

     

        दुराचारी दुरादृष्टिर्दुरावासी च दुर्जनः । 

        यन्मैत्रीक्रियते पुम्भिर्नरःशीघ्रं विनश्यति ।। 19

    19-बुरा आचरण अर्थात दुराचारी के साथ रहने से,पाप दृष्टि रखने वाले का साथ करने से मित्रता करने वाला शीग्र नष्ट हो जाता है। 

     He who befriends a man whose conduct is vicious, whose vision impure, and who is notoriously crooked, is rapidly ruined. - Chanakya

        समाने शोभते प्रीतिः राज्ञि सेवा च शोभते । 

        वाणिज्यंव्यवहारेषु स्त्री दिव्या शोभते गृहे ।। 20

   20-मित्रता बराबर वालों मे  शोभा पाती है,नौकरी राजा की इच्छा होती है,व्यवहार मे कुसहल व्यापारी और घर माईन  सूंदर स्त्री  शोभा  पाती  है ।        

     The friendship between equals flourishes, service under a king is respectable, it is good to be business-minded in public dealings, and a handsome lady is safe in her own home. - Chanakya

        आपके लिए उपयोगी:- 

चाणक्य नीति द्वितीय अध्याय  की pdf फाइल यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं - चाणक्य नीति दूसरा अध्याय [हिंदी में ] Chanakya Niti In Hindi | Second Chapter

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