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Computer ke Main Part उनकी Full Form एवं उनके कार्य

कंप्यूटर के मुख्य भाग एवं उनके कार्य (Main Componets of a Computer and there Functions)सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट(Centeal Processing Unit) | कन्ट्रोल

Computer and their Functions in Hindi: वर्तमान में शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र है जहाँ कंप्यूटर से काम न लिया जाता है। और यदि आपको इसको चलाना आता है तो आपके लिए रोजगार के अवसर खुल जाते है। परन्तु सबसे पहले आपको इसको समझाना अति आवशयक है ,तो आइये जानते है Computer क्या है ?Computer ke main part उनकी Full Form एवं उनके कार्य. Components of a Computer and their Functions in Hindi. Parts of Computer in Hindi.कम्प्यूटर के मुख्य भाग एवं उनके कार्य-Computer and their Functions in Hindi

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Computer क्या है 

कंप्यूटर एक स्वचालित तथा निर्देशों के अनुसार कार्य करने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसमे किसी भी देता को प्राप्त करने संग्रहित करने तथा प्रोसेस करने की क्षमता होती है। अर्थात यह एक बिजली से चलने वाली एक इलेट्रॉनिक मशीन है ,जो की इनपुट के रूप में डेटा को ग्रहण करता है और सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम के अनुसार उसे प्रोसेस करके हमें आउटपुट के रूप में रिजल्ट देता है।

कम्प्यूटर के मुख्य भाग एवं उनके कार्य-Computer and their Functions in Hindi

कंप्यूटर सिस्टम एक सिंगल सेटअप या सिंगल डिवाइस नहीं है ,जो अपने आप कार्य करता है। यह कई मुख्य पार्ट्स से बना होता है,जो computer system चलाने में मदद करते  है ,उन सभी घटकों का कार्य करने के लिए अपने विशिष्ट कार्य और विशेषताएं होती हैं। computer के मुख्य तीन घटक हैं - इनपुट यूनिट,आउटपुट यूनिट और सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट। 

जब भी आप कंप्यूटर का उपयोग करते हैं तो प्रत्येक भाग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डेटा प्रोसेसिंग और कार्यों को आसान और सुविधाजनक बनाते हैं। सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को आगे मेमोरी या स्टोरेज यूनिट, कंट्रोल यूनिट और अंकगणितीय और तार्किक इकाई में विभाजित किया जाता है। सिस्टम की सहायता के लिए प्रत्येक इकाई की अपनी विशेष विशेषता होती है। तो जानते है Computer ke main part उनकी full form एवं उनके कार्य-
कम्प्यूटर के मुख्य भाग एवं उनके कार्य निम्नलिखित है :-

यह भी देखे : -  

सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट- Centeal Processing Unit

सी.पी.यू  कंप्यूटर का दिमाग होता है। इसका मुख्य कार्य प्रोग्रामों को क्रियांविंत करना हैं। इसके आलावा सी.पी.यू  कंप्यूटर के सभी भागों, जैसे-  मेमोरी ,इनपुट,और आउटपुट डिवाइसेस के कार्यों को भी नियंत्रित करता है। प्रोग्राम और डाटा , इसके नियंत्रण मैं मेमोरी मैं स्टोर होते है। इसी के नियंत्रण मैं आउटपुट स्क्रीन पर दिखाई देता है या प्रिंटर के द्वारा कागज पर छपता है ।

माइक्रो कंप्यूटर मैं सी.पी.यू (CPU) एक छोटा सा माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) होता है। अन्य बड़े कम्प्यूटरों में एक से अधिक माइक्रोप्रोसेसर हो सकते है।  इस सी.पी.यू के माइक्रोप्रोसेसर पर तीन भागों का परिपथ होता है ,वे है -सी.यू (CU) , ए.एल.यू (ALU) और रजिस्टर .

माइक्रोप्रोसेसर के अविष्कार से पहले कंप्यूटर का परिपथ ट्रांजिस्टरों को संयोजित करके तैयार किया जाता था। कंप्यूटर को अधिक कार्यकुशल और बहुपयोगी बनाने के लिए इसके परिपथ मैं Transistors की संख्या मैं अत्यधिक वृद्धि होती गई। इससे ट्रांजिस्टरों का परिपथ जटिल होता गया और परिपथ में और अधिक ताप उत्पन होने से इनके ख़राब होने की समस्या उत्पन होती गई अतः एक ऐसे चिप की आवश्यक्ता होती गई जिसमें अनेक ट्रांजिस्टरों के तुल्य परिपथ हो।

कम्प्यूटर का वर्गीकरण Classification of Computer in Hindi

सबसे पहले माइक्रोप्रोसेसर सन 1970 मैं इंटेल कॉर्पोरेशन ने Intel 4004 के रूप मैं तैयार किया। Intel 4004 चिप मैं लगभग 2300 ट्रांजिस्टर के बराबर क्षमता थी। माइक्रोप्रोसेसर का चिप आधे इंच का वर्गाकार सिलिकॉन पदार्थ का टुकड़ा होता है जो एक खोल मैं छोटे-छोटे कनैक्टर्स के साथ व्यवस्थित रहता है। इंटेल 4004 चिप के बाद माइक्रोप्रोसेसर की तकनीक विकसित होती गई और अधिक ट्रांजिस्टरों के बराबर उनका परिपथ होता गया ।

कंट्रोल यूनिट ( Control  Unit )

यह भाग कंप्यूटर की आतंरिक क्रियाओं का संचालन  करता है। यह इनपुट /आउटपुट  क्रियाओं को नियंत्रित करता है ,साथ ही मेमोरी और ALU  के मध्य डाटा के आदान-प्रदान को निर्देशित करता है ।

यह प्रोग्राम को क्रियान्वित करने के लिए प्रोग्राम के निर्देशों को मेमोरी में  से प्राप्त करता है। निर्देशों की विधुत-संकेतों (Electric Signals) में परिवर्तित करके ये उचित डिवाइसेज तक पहुँचता है, जिससे डाटा प्रक्रिया का कार्य सम्पन हो जाय । कंट्रोल  यूनिट ,ए.एल.यू को यह बताती है की प्रक्रिया हेतु डाटा,मेमोरी में कहाँ उपस्थित है , क्या क्रिया करनी है तथा प्रक्रिया के पश्चात परिणाम मेमोरी में संगृहीत होना है । इन सभी निर्देशों के विधुत संकेत,सिस्टम बस (System  Bus) की नियंत्रक बस (Control  Bus) के माध्यम से कंप्यूटर के विभिन्न भागों (Components) तक संचरित होता है । 

अर्थमैटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit -ALU )

यह यूनिट डाटा पर अंकगणतीय क्रियांए (जोड़,घटाना,गुना,भाग) और तार्किक क्रियांए (Logical Operations) करती है । इसमें ऐसा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ होता है जो बाइनरी अंकगणित (Binary Arithmetic) की गणनाये करने में सक्षम होता है। ए.ऐल.यू  सभी गणनाओं को पहले सरल अंकगणितीय क्रियाये में  बाँट लेता है, जैसे- गुणा (Multiplication ) को बार-बार जोड़ने की क्रिया में बदलना। बाद इन्हे विधुत पल्स में बदल कर परिपथ में आगे संचारित किया जाता है।   

तार्किक क्रियाएँ में  ए. एल.यू  दो संख्याओं या डाटा की तुलना करता है और प्रक्रिया में निर्णय लेने का कार्य करती है ।

अनेक तारों का समूह बस कहलाता है ,यह बस सिस्टम यूनिट के विभिन्न भागों में विघुत -संकेतों का संचरण करती है | संचरित किये जाने वाले संकेतों के अनुसार Bus नाम दिया जाता है ,जैसे- सिस्टम यूनिट की कुछ बस 'सिस्टम बस' और कंट्रोल संकेतों के लिए बस 'कंट्रोल बस' कहलाती है | 

ए.एल.यू ,कंट्रोल  यूनिट से निर्देश या मार्गदर्शक लेता है। यह मेमोरी से डाटा प्राप्त करता है और मेमोरी में ही सूचना को लौटा देता है। ए.एल.यू के कार्य करने की गति अति तीव्र होती है यह लगभग 1000000 गणनाये प्रति सेकंड की गति से करता है। इसमें कई Registers और एक्युमुलेटर होते है जो गणनाएं के दौरान क्षणिक संग्रह हेतु Momentary Collection का कार्य करती है । ए.एल.यू प्रोग्राम के आधार पर कण्ट्रोल यूनिट के बताये अनुसार सभी डाटा मेमोरी से प्राप्त करके Accumulators मैं रख लेता है। 

मैमोरी - Memory 

मेमोरी कंप्यूटर का कार्यकारी संग्रह (Working Storage ) है। यह कंप्यूटर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है जहां डाटा,सुचना,और प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान स्थित रहते है और आवश्य्कता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध होते है. मेमोरी को प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) या मेन मेमोरी भी कहते है। मेमोरी में संग्रह के लिए अनेक स्थान होते है जिनकी संख्या निश्चित होती। 

यह मेमोरी की क्षमता या मेमोरी का आकर कहलाता है ,जैसे-256 KB ,512 MB ,1GB आदि। प्र्त्येक Location का एक एड्रेस होता है ,उसी प्रकार मेमोरी मैं प्र्त्येक स्थान की एक पहचान-संख्या होती है। यह पहचान संख्या ही इसका Address कहलाती है 

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कंप्यूटर की मेन मेमोरी दो प्रकार की होती है -

  1. रैम (RAM) या RANDOM ACCES MEMORY 
  2. रोम (ROM) या READ ONLY MEMORY 

रैम (RAM)

रैम या रैण्डम एक्सेस मैमोरी कंप्यूटर की अस्थायी मेमोरी होती है। key-board या अन्य किसी इनपुट डिवाइसेस से इनपुट किया गया डाटा, प्रक्रिया से पहले रैम (RAM) मैं ही Store होता है और सी.पी.यू  द्वारा आवश्यकतानुसार वहां से प्राप्त कर लिया जाता है। रैम में  डाटा या प्रोग्राम अस्थायी रूप से संग्रहीत (Storage ) रहते है। 

कंप्यूटर को बंद करने या विधुत आपूर्ति बंद हो जाने पर रैम मैं Storage Data मिट जाता है। इसलिए RAM को वोलेटाइट या अस्थायी मेमोरी कहते है। रैम की क्षमता या आकार (Size) विभिन्न होते है, जैसे-1 MB ,2 MB 32 MB ,512 MB,1GB ,4GB आदि।

रोम (ROM )-READ ONLY MEMORY

यह स्थायी मेमोरी होती है जिसमें कंप्यूटर के निर्माण के समय प्रोग्राम स्टोरेज कर दिए जाते है। इस मेमोरी मैं स्टोरेज प्रोग्राम परिवर्तित और नष्ट नहीं किया जा सकता है। उन्हें केवल पढ़ा ही जा सकता है ,इसलिए यह मेमोरी ,रीड ओन्ली  मेमोरी (Read Only Memory) कहलाती है।

जब हम कंप्यूटर को स्विच ऑन करके इसे चालू करते है तो रोम मैं स्थायी रूप से स्टोरेज प्रोग्राम स्वतः ही क्रियांविंत हो जाते है। ये प्रोग्राम कंप्यूटर की सभी डिवाइसेस को जाँच कर उन्हें सक्रिय अवस्था मैं लाते है।रोम  मैं उपस्थित यह अस्थायी प्रोग्राम बायोस (BIOS -Basic Input System) के नाम से जाने जाते है। ROM के अन्य आवशयक प्रोग्राम और गणतीय मानकों की सारणी (sin ,cos ,tan square root ,) आदि के मान स्टोरेज रहते है। जिनका उपयोग प्रक्रिया के दौरान होता है।

कंप्यूटर का स्विच ऑफ करने के बाद भी रोम मैं स्टोरेज अवयव Components नष्ट नहीं होते है। अतः ROM  नॉन-वालेटाइल (Non -Volatile) या स्थायी संग्रह माध्यम (Permanent Storage Medium) कहलाते है। यह   एक सेमी -कन्डक्टर चिप होती है, जिसमें  प्रोग्राम व सॉफ्टवेयर स्टोरेज रहते है। इस प्रकार की 'हार्डवेयर' 'और सॉफ्टवेयर' की संयोजित तकनीक फर्मवेयर कहलाती है। रोम एक Firmware है। इसके अन्य प्रकार या  Firmware निम्नलिखित है -What is a Computer language in Hindi

प्रोम (PROM -Programmble Read Only Memory )- PROM एक ऐसा रिक्त Rom होता है जिसमें आवश्यकता होने पर विशेष उपकरणों द्वारा प्रोग्राम स्टोरेज किया जा सकता है और एक बार स्टोरेज होने पर इन्हे मिठाया नहीं जा सकता है।

इम्प्रोम (EPROM -Erasable Programmble Read Only Memory ) -यह प्रोम के सामान ही होता है, लेकिन इसमें स्टोरेज प्रोग्राम पराबैगनी प्रकाश (Ultraviolet Light ) की उपस्थिति मैं मिठाये जा सकते है और नए प्रोग्राम स्टोरेज किये जा सकते है।

नई  तकनीकी के   इम्प्रोम (EPROM) भी होते है ,जैसे -Electrical Erasable Programmable Read Only Memory 

आउटपुट यूनिट (Output  Unit )

यह ऐसा यूनिट है जो कंप्यूटर से प्रक्रिया के पश्च्यात सुचना और परिणामों को कंप्यूटर के बाहरी वातावरण मैं प्रतुत  करती है। आउटपुट यूनिट के लिए मुख्य आउटपुट डिवाइस Screen या Monitor होता है। मॉनिटर मैं एक टीवी के सामान कैथोड किरण ट्यब (Cathode Ray Tube- CTR ) होता है इसके अलावा अन्य निम्लिखित आउटपुट डिवाइसेस भी कम्प्यूटर से प्राप्त आउटपुट को हमें प्रस्तुत करता है। 

कंप्यूटर आउटपुट डिवाइसेस निम्नलिखित होते है -

  • मॉनिटर
  • प्रिंटर
  • प्लाटर 
  • प्रोजेक्टर 
  • ऑडियो डिवाइस/स्पीकर/हैडफ़ोन  
  • वीडियो कार्ड 

इनपुट डिवाइस -Input Device 

वह यंत्र जिसके द्वारा डेटा इनपुट जाता है या ऐसे उपकरण जिसके द्वारा हम कम्प्यूटर को निर्देश देते है और कम्प्यूटर उस पर पर प्रोग्राम के अनुसार कार्य करता है इनपुट डिवाइस कहते है।  इनपुट डिवाइसेस मानवीय भाषा में दिए गए डाटा और प्रोग्राम को COMPUTER के समझने योग्य रूप में परिवर्तित करती है।
इनपुट डिवाइसेस निम्नलिखित होते है - 
  • कीबोर्ड
  • माउस 
  • ट्रैकबॉल 
  • जॉयस्टिक 
  • स्कैनर
  • माइक्रोफोन 
  • वेबकैम
  • बार कोड रीडर
  • ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉगनाइजेशन  (OCR)
  • मेग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉगनाइजेशन (MICR)
  • ऑप्टिकट मार्क रीडर (OMR)
  • टच स्कीन 
  • लाइट पिन 
  • किम बॉल टैग रीडर 
  • स्पीच रिकॉगनाइजेशन सिस्टम 

डाटा प्रक्रिया ( Data Processing ) 

तथ्यों को सुव्यवस्थित (Manipulation of facts) करना डाटा प्रक्रिया ( Data Processing ) कहलाता है। यह कार्य मानवीय (Manual) या इलेक्ट्रॉनिक विधि से किया जा सकता है। डाटा प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक विधि से किया जाए तो यह प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्रक्रिया ( Electronic Data Processing - EDP) कहलाती है । 

ई .डी .पी ( EDP ) का मुख्य उद्देश्य जटिल कार्यों को तेज गति से करना है। उदाहरणार्थ- आपके कक्षा अध्यापक आपके जांच -पत्रों (Tests) के प्राप्तांकों की सूची स्वयं कागज पर तैयार करते हैं। इसके बाद सभी विद्यार्थियों की श्रेणी , प्रतिशत और कक्षा में स्थान की गणना कम्प्यूटर की सहायता से की जाती है जिससे यह कार्य तेज गति और शुद्धता से हो सके। इलेक्ट्रॉनिक मशीन में कार्य करने की गति तीव्र होती है  इसलिए इन्हें उपयोग किया जाता है ।

डाटा प्रक्रिया के चरण ( Steps of Data Processing ) 

डाटा प्रक्रिया तीन चरणों में सम्पन्न होती है। इस प्रकार डाटा प्रक्रिया (Data Processing) एक चक्र(Cycle) के रूप में होती है। डाटा प्रक्रिया चक्र ( Data Processing Cycle )के तीन चरण होते हैं : 

  • इनपुट चक्र Input Cycle
  • प्रक्रिया चक्र Processing Cycle
  • आउटपुट चक्र Output Cycle

इनपुट चक्र ( Input Cycle )

इस चरण में एक प्रक्रिया , मशीन ( कम्प्यूटर ) में डाटा को सुगम अवस्था में एक उपयुक्त माध्यम पर तैयार किया जाता है ।

प्रक्रिया चक्र ( Processing Cycle )

इस चक्र में , हम इनपुट किए गए डाटा को निर्देशों के आधार पर सुव्यवस्थित करते हैं । उदाहरणार्थ- Manual प्रक्रिया चक्र में अध्यापक प्रत्येक विद्यार्थी के विभिन्न विषयों के प्राप्तांकों का योग करता है। वह इस योग में पूर्णांक का भाग देता है और प्राप्तांकों के प्रतिशत की गणना करता है। वह प्राप्तांकों के प्रतिशत के अनुसार श्रेणी भी निर्धारित कर सकता है । 

इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्रक्रिया ( EDP ) में ये सभी क्रियाएं निर्देशों के समूह ( प्रोग्राम ) का अनुसरण करते हुए स्वचालित रूप (Automatically) से सम्पन्न होती हैं । प्रोग्राम ( निर्देशों का समूह ) कम्प्यूटर में पहले संग्रहीत होता है । कम्प्यूटर वही कार्य करता है जो प्रोग्राम द्वारा निर्देशित होता है ।

इस प्रकार इनपुट किए गए डाटा पर जो भी क्रिया हमे करनी है वह हम प्रोग्राम में निश्चित निर्देशों के द्वारा पहले ही निर्धारित कर देते हैं और प्रक्रिया - चक्र सम्पन्न हो जाता है । 

आउटपुट चक्र ( Output Cycle )

एक बार डाटा पर प्रक्रिया ( Processing ) होने के बाद यूजर के लिए उपयुक्त अवस्था में परिणाम की आवश्यकता को पूर्ण किया जाता है । इसे आउटपुट चक्र ( Output Cycle ) कहते हैं । उदाहरणार्थ , प्राप्तांकों की गणना - प्रक्रिया में प्रत्येक विद्यार्थी के प्रत्येक विषय में प्राप्तांकों और श्रेणी को छपे हुए प्रगति - पत्र ( Progress Report ) पर लिखकर दिया जाता है । 

यह कार्य Manual System में कक्षा -अध्यापक द्वारा किया जाता है और ई .डी .पी प्रणाली में यह कार्य कम्प्यूटर में लगा प्रिंटर करता है । प्रिंटर अंकतालिका को कागज पर छापकर हमें आउटपुट के रूप में देता है । आउटपुट से प्राप्त परिणाम को हम कम्प्यूटर की स्क्रीन पर भी देख सकते हैं ।

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