-->

Notification

Iklan

Iklan

बच्चो के लिए खतरनाक है ब्लू लाइट यानी गेजेट्स की रोशनी

शनिवार, जून 19 | जून 19, 2021 WIB Last Updated 2021-10-06T07:15:47Z

ब्लू लाइट, गैजेट्स की रोशनी ब्लू लाइट,mobile screen affect,blue light
बच्चो के लिए खतरनाक है ब्लू लाइट यानी गेजेट्स की रोशनी 

बच्चो के लिए खतरनाक है ब्लू लाइट यानी गेजेट्स की रोशनी 

Screen Exposure बच्चों में स्क्रीन एक्सपोजर बढ़ रहा है , इस खतरे को घटाइए यानी गैजेट्स की रोशनी Blue Light कितनी खतरनाक है ?रिसर्च गेट के एक शोध के अनुसार 8 साल की उम्र तक के बच्चे 5 घंटे तक मोबाइल पर बिता रहे हैं । बढ़ा हुआ यह स्क्रीन टाइम कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है ।

ये 6 बड़े खतरे है स्क्रीन एक्सपोजर,मोबाइल( गैजेट्स ) की रोशनी से जुड़े हुए हैं -

 रेटिना को क्षति 

मोबाइल से आँखों को नुकसान,Mobile phone screen become problem for eyes
बच्चो के लिए खतरनाक है ब्लू लाइट यानी गेजेट्स की रोशनी 

विभिन्न शोध में पाया गया है कि लंबे समय तक स्मार्टफोन के इस्तेमाल से ब्लू लाइट रेटिना को क्षति पहुंचाकर हमारी नजर को नुकसान पहुंचा सकती है

कैंसर  

रात में ब्लू लाइट के एक्सपोजर और नींद के प्रभावित होने के बीच संबंध पाया गया है । इससे ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ता है ।

ये भी देखें :- हृदय रोग: लक्षण, कारण, टाइप और परहेज | symptoms of heart attack

 मोटापा 

मेलाटोनिन और नींद के साथ ही ब्लू लाइट भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन को भी प्रभावित करती है । इससे मोटापे का खतरा बढ़ता है । 

 अवसाद Depression-

ब्लू लाइट के कारण जिनका मेलाटोनिन प्रभावित हो चुका है और बॉडी क्लॉक बिगड़ गई है उनमें अवसाद की आशंका सर्वाधिक होती है ।

न्यूरोटॉक्सिन

 नींद के लंबे समय से प्रभावित होने के कारण शरीर में न्यूरोटॉक्सिन का निर्माण होने लगता है , जिससे अच्छी नींद की संभावना और कम हो जाती है ।

 ये भी देखें :- मधुमेह रोग के प्रमुख कारण एवं उनके संभावित उपाए और निवारण बताये गए है।

 कमजोर मेमोरी

बच्चो के लिए खतरनाक है ब्लू लाइट यानी गेजेट्स की रोशनी
बच्चो के लिए खतरनाक है ब्लू लाइट यानी गेजेट्स की रोशनी 

 नींद के प्रभावित होने के कारण ध्यान आसानी से भंग हो जाता है , जिससे याददाश्त प्रभावित होती है ।

आंखों से जुड़ी 3 खराब आदतें 

स्क्रीन का बहुत नजदीक होना 

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर बहुत नजदीक से देखने के कारण ब्लू लाइट आंख के मैक्युलर को क्षति पहुंचा सकती है । पलकों का झपकना कम होता है । आंखों में ड्राइनेस , दर्द और थकान बढ़ती है । 

• न्यूयार्क के सनी कॉलेज ऑफ ऑप्टोमेट्री के अनुसार गैजेट 40 सेमी की दूरी पर रखें । फॉन्ट बड़ा रखें । 

तनाव भी आंखों के लिए खतरा

 स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल रेटिना की कार्य प्रणाली को प्रभावित करता है । इससे सेंटर सीरियस कोरियो - रेटिनोपैथी का खतरा बढ़ता है , जिससे धुंधला दिखाई देने लगता है । 

• ब्रिटेन में हुए एक शोध के अनुसार एक घंटे का म्यूजिक कॉर्टिसोल हार्मोन को 25 % तक घटाता है ।

 हरी सब्जियां कम खाना 

हरी सब्जियों में लुटीन जैसे न्यूट्रियन्ट्स होते हैं , जो मैक्युलर डिजनरेशन से बचाते हैं । 

एक शोध के अनुसार एक कप पालक रोज खाने से ग्लूकोमा का खतरा 30 % तक कम होता है । .

×
Berita Terbaru Update