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happiness: दुनिया के तमाम मुश्किलों का एक हल आपकी हंसी

Happiness: दुनिया की तमाम मुश्किलों, दुःखों, और तनाव के बादलों को आप एक विस्फोट से उड़ा सकते हैं. और ये कुछ और नहीं आपकी हंसी है.happiness: दुनिया

Happiness: दुनिया की तमाम मुश्किलों, दुःखों, और तनाव के बादलों को आप एक विस्फोट से उड़ा सकते हैं. और ये कुछ और नहीं आपकी हंसी है

Happiness: दुनिया की तमाम मुश्किलों, दुःखों, और तनाव के बादलों को आप एक विस्फोट से उड़ा सकते हैं. और ये कुछ और नहीं आपकी हंसी है

happiness: दुनिया के तमाम मुश्किलों का एक हल आपकी हंसी 

जरा सा हंस बस

सदियां गवाह हैं कि रुलाने के लिए आसान सी कवायदें करनी पड़ती हैं अलबत्ता हंसाना टेढ़ी खीर है । लेकिन कोरोना की अल्प - प्रलय वेला में हंसना और हंसाना मनोविकारों से मुक्त होने का सस्ता - सुलभ मार्ग है । 

डेल कारनेगी का कथन है कि नकली मुस्कान या हंसी तत्काल पकड़ी जाती है । हां , मसखरी , ठिलवई , लतीफेबाजी को हरदम हंसना नहीं कहा जा सकता । इस तरह के हंसी - ठहाके के लिए एक शब्द है सैडिस्टिक प्लेजर , जिसे हिंदी में परपीड़न सुख कहा जाता है । 

जबकि असली हंसी " का नवनीत तो बेचैनी , उदासी , व्यर्थता बोध और संघर्षों के अनुभवों से निकलता है । सबको एक - दूसरे से जोड़ने , दुनियाभर में प्रेम की महक बिखेरने का यह सबसे बड़ा अस्त्र आपके पास है । 

अपने अंदर की खुशबू से काम ले / किसी खिलते हुए फूल का नाम ले .... कुंवर बेचैन की एक ग़जल का यह मतला प्रसन्नता को उसके हर कोण से बयान कर देता है । पश्चिमी देशों में तो खुश रहने के लिए दवा की गोलियां खाई जाती हैं । 

पर भारत में समाज चूंकि आज भी काफी कुछ आपस में बंधा हुआ है , इसलिए मनुष्य तन्हा नहीं हो सकता । उसके अंदर तथा बाहर ऐसे कई कारण रोज पैदा होते रहते हैं , जिनसे वह खुश रह सकता है । 

स्वेट मार्डन का कहना है कि भारत में गाय - बैलों के गले में घुंघरू या घंटियां बांधे जाने का मनोवैज्ञानिक कारण है । घंटियों की आवाज संगीत की तरह गूंजती है । पशुओं को भी संगीत प्यारा लगता है । वह उन्हें प्रसन्न रखता है । इसी के प्रभाव से गायें दूध अधिक देती हैं । घोड़े एवं बैल अधिक काम करते हैं , जल्दी थकते नहीं । 

हंसी हार्दिक हो , दिल से निकली हो तो वह भी संगीत जैसा ही प्रभाव छोड़ती है । ऐसी हंसी उचित स्थान पर हुए विस्फोट की तरह होती है , जो सारे दुःखों को ध्वस्त कर देती है । 

जो व्यक्ति काम करते समय गुनगुनाता रहता है , वह अन्य की अपेक्षा अधिक काम करता है और धैर्यवान तथा चुस्त भी रहता है । खुश रहने वाले लोग अधिक जीते हैं । अतः ईश्वर और जीवन में मिलने वाले आनंदों पर विश्वास करते हुए प्रसन्न रहिए । 

अरस्तू का हवाला देते हुए स्वेट मार्डन ने ही लिखा है कि जो विषम परिस्थितियों में भी मुस्करा देते हैं , उन्हें कष्ट भी सुखद , लगने लगता है । न हंसने वाले लोग देखें कि वे क्यों नहीं हंस पा रहे हैं । कारण सहज मिल जाएगा । उस कारण को दूर करने में ज्यादा देर नहीं लगती । 

एक बार मार्टिन लूथर किंग को लगने लगा कि उनके जीवन को उदासियों ने घेर लिया है । वे संसार को मिथ्या समझने लगे थे । उन्हें ऐसी हालत में देखकर एक दिन उनकी पत्नी के कहा- स्वर्ग में भगवान मर गया है क्या ? 

लूथर ने कहा- नहीं , ऐसा कैसे हो सकता है ? ईश्वर तो अजर अमर है । पत्नी ने कहा- तुम्हें विश्वास है ? उन्होंने कहा- हां । पत्नी बोली- लेकिन तुम तो इतने उदास हो गए हो कि लगता है भगवान मर गया । इस पर लूथर हंस पड़े । 

आप भी पक्षियों के कलरव तथा चहचहाहट में अपना स्वर मिलाइए । खेलते , मस्ती करते और फुदकते बच्चों को देखिए । घर के बाहर हो रही रिमझिम बारिश की आवाज को सुनिए । यही नहीं , पंखे , कूलर या मशीनों में भी हंसी का संगीत ढूंढा जा सकता है । बस निर्मल मन से खोज कीजिए और पाइए आनंद । 

फिनलैंड पिछले चार वर्षों से हैप्पीनेस इंडेक्स में पहली पायदान पर अटल है । फिनलैंड सहित यूरोप के कुछ नोर्डिक इलाकों के देश आत्मसंतुष्टि के फलसफे पर ही चलते हैं । खुशहाली के रास्ते में आने वाले लगभग हरेक अवरोध को एक तरफ कर देना इन देशों की संस्कृति की विशेषता है । वहां लोग दिखावा नहीं करते और देखा - देखी में उलझकर अपनी कमतरी पर भी परेशान नहीं होते ।

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