नेकी का बदला-हिन्दी मॉरल स्टोरी

Moral hindi story: मदद को याद रखना और मौका मिलते ही उसका प्रतिसाद देना नेक लोगों के स्वभाव का आधार होता है । विनोद बाबू ने इसको चरितार्थ ही किया था ।

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Moral Hindi Story: मदद को याद रखना और मौका मिलते ही उसका प्रतिसाद देना नेक लोगों के स्वभाव का आधार होता है। विनोद बाबू ने इसको चरितार्थ ही किया था। 

नेकी का बदला-हिन्दी मॉरल स्टोरी 

कुछ साल पहले मेरे मौसाजी का हार्ट अटैक से देहांत हो गया। उम्र करीब 45 वर्ष रही होगी। अपने पीछे 2 बेटियों को छोड़ गए। चूंकि मौसाजी सरकारी नौकरी में कार्यरत थे और अच्छा वेतन पाते थे, तो दोनों बेटियों की सारी इच्छाएं पूरी होती थीं। जाहिर है एक हद तक दोनों जिद्दी हो चुकीं थीं। मौसाजी जयपुर में ही कृषि विभाग में कार्यरत थे और उनके जाने के बाद मौसी को भी उसी विभाग में नौकरी मिल गई। 

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अभी नौकरी को चार महीने भी नहीं हुए थे कि मौसी पर नई मुसीबत आ गई। उनका ट्रांसफर बीकानेर हो गया। मौसी ने काफी कोशिश की कि किसी तरह यह ट्रांसफर रुक जाए लेकिन कुछ ना हो पाया। उधर दोनों बेटियों ने ठान लिया था कि जयपुर छोड़कर नहीं जाएंगी, सो मौसी ने उनको नाना-नानी के पास छोड़ दिया और अंजान शहर की ओर चल पड़ीं। 

कुछ दिनों बाद मम्मी की मौसी से बात हुई तो पता चला कि मौसी एक सज्जन के घर रह रही हैं। वो सज्जन नाना के जानकार हैं और मौसी को बेटी की तरह रख रहे हैं। मौसी से किराया लेना तो दूर उनको खाना देने के साथ साथ उनका पूरा ध्यान भी रख रहे हैं। उनका नाम विनोद बाबू है। 

चार महीने बाद मौसी फिर से जयपुर पदस्थ हुई, तब उन्होंने पूरा वृत्तांत सुनाया। दरअसल, बहुत साल पहले नाना ने उन शख्स की नौकरी लगवाई थी। यही नहीं उनको कुछ समय तक अपने घर में भी ठहराया था। नानी ने नाना को कहा भी था कि फालतू में ऐसे हर किसी की सहायता करने से क्या मतलब! लेकिन नाना कहां मानने वाले थे। निःस्वार्थ भाव से सबकी सेवा करना उनकी आदत थी। जाते समय विनोद बाबू ने कहा था ' आपका यह एहसान उधार रहेगा। समय आने पर यह कर्ज जरूर उतारूंगा। '

कुछ दिनों के बाद ख़बर आई कि विनोद बाबू चल बसे। यह खबर सुनते ही मेरी मम्मी के मुंह से बरबस ही निकल पड़ा ' ऋण चुकाने का मौका नहीं चूके वो कौन कहता है कि भलाई का जमाना नहीं रहा ...। '

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