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बेल फल के लाभकारी औषधीय गुण | बेल फल पाचन तंत्र की तकलीफों से बचाए

Indian bael (बिल्व): बेल सुनहरे पीले रंग का , कठोर छिलके वाला एक लाभदायक फल है । गर्मियों में इसका सेवन विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है । शाण्डिल्य , श्र
Santosh Kukreti

Bael Beneficial Medicinal Properties: बेल सुनहरे पीले रंग का , कठोर छिलके वाला एक लाभदायक फल है । गर्मियों में इसका सेवन विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है । शाण्डिल्य , श्रीफल , सदाफल आदि इसी के नाम हैं । इसके गीले गूदे को बिल्व कर्कटी तथा सूखे गूदे को बेलगिरी कहते हैं । 

Indian bael (बिल्व),बेल खाने से क्या लाभ है? बेल कब खाना चाहिए? बेल का जूस पीने से क्या फायदा होता है? बेल का शरबत कब पीना चाहिए?

ग्राही पदार्थ मूलत : बेल के गूदे में पाए जाते हैं । ये पदार्थ हैं- क्यूसिलेज , पेक्टिक , शर्करा , टैनिन्स आदि । मार्मेलोसिन नामक रसायन जो स्वल्प मात्रा में ही विरेचक होता है , इसका मूल रेचक संघटक है । इसके अलावा इसमें उड़नशील तेल भी पाया जाता है । इसके पत्ते , जड़ तथा तने की छाल भी औषधीय गुणों से युक्त होते हैं ।

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बेल फल के लाभकारी औषधीय गुण

औषधीय प्रयोगों के लिए बेल का गूदा , बेलगिरी पत्ते , जड़ एवं छाल का चूर्ण आदि प्रयोग किया जाता है । चूर्ण बनाने के लिए कच्चे फल का प्रयोग किया जाता है वहीं अधपके फल का प्रयोग मुरब्बा तो पके फल का प्रयोग शरबत बनाकर किया जाता है । 

चूर्ण को शरबत आदि की अपेक्षा प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि चूर्ण अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी होता है । दशमूलारिष्ट आदि में इसकी जड़ की छाल का प्रयोग किया जाता है । बेल का सर्वाधिक प्रयोग पाचन संस्थान संबंधी विकारों को दूर करने के लिए किया जाता है । पुरानी पेचिश तथा दस्तों में यह फल बहुत लाभकारी है । इसके कच्चे फल का प्रयोग अग्निमंदता , जलन , गैस , बदहज़मी आदि के उपचार में किया जाता है । 

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बेल में म्यूसिलेज इतना अधिक होता है कि डायरिया के बाद यह तुरन्त घावों को भर देता है , जिससे मल संचित नहीं हो पाता और आतें कमजोर नहीं होतीं । बेल चाहे कच्चा हो या पक्का आंतों के लिए लाभदायक होता है । इससे आंतों की कार्यक्षमता बढ़ती है तथा भूख सुधरती है । पुरानी पेचिश के साथ साथ यह अल्सरेटिव , कोलाइटिस जैसे जीर्ण असाध्य रोगों के इलाज में भी उपयोगी होता है । पेक्टिव बेल के गूदे का एक महत्त्वपूर्ण घटक है । 

यह अपने से बीस गुना अधिक जल में एक कोलाइटल घोल के रूप में मिल जाता है जो चिपचिपा तथा अम्ल प्रधान होता है । यह घोल आतों पर अधिशोषक ( एड्सारबेंट ) तथा रक्षक के रूप में कार्य करता है । बड़ी आंत में पाए जाने वाले जीवाणुओं को मारने की क्षमता भी इसमें होती हैं ।

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