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क्या आप जानते हैं - डाक्टर की दुकान है आपकी रसोई?

क्या आप जानते हैं कि हमारी रसोई में रखी कुछ चीज़े आपकी दवा की दुकान जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग मे लाते है, जो हमारे immune system को strong

क्या आप जानते हैं कि हमारी रसोई में रखी कुछ चीज़े आपकी दवा की दुकान जिन्हें हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग मे लाते है, जो हमारे immune system को strong करती है, एवं हमे रोगों से बचाती है, जो कि हमारी डॉक्टर की पहली दुकान होती है, बशर्ते आपको इस बारे में जानकारी हो - 

यहां हम आपको रसोई डॉक्टर की पहली दुकान में कुछ एसे चीज़ों के बारे मे बताने वाले है जिन्हें आपको अपने kitchen में हमेशा रखना चाहिए.-

आपकी kitchen डॉक्टर की पहली दुकान, डाक्टर की दुकान है आपकी रसोई

रसोईघर यानी कि भोजन जिसका सीधा संबंध हमारी भूख और सेहत से है. हर कोई भूख लगने पर हम अपनी रसोई का रुख जरूर करता है, परंतु इसके आलावा हमारी रसोईघर हमारे लिए डॉक्टर की पहली दुकान होती है, तो आइये जानते हैं कुछ एसे चीज़ों के बारे में जिनका संबंध स्वाद के साथ साथ हमारे स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ होता है -

दालचीनी : - यह पाचक है , रक्त में श्वेत कण बढ़ाने वाली तथा उत्तेजक । कृमि और जन्तुनाशक है ; उल्टी , अतिसार मिटाती है , हृदय उत्तेजक , संक्रामक रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है , रक्त को शुद्ध करती है , दर्द नाशक तथा रक्त कॉलेस्ट्रोल कम करती है । 

दालचीनी मानसिक तनाव में , स्मरण शक्ति बल प्रदान करने और शरीर को आकर्षक , सुन्दर , गोरा बनाने में उपयोगी है । इसके लिए दालचीनी के चूर्ण को शहद में मिला कर कुछ समय तक लिया जाता है । इसकी 2 ग्राम छाल को 2 कप पानी में उबालकर आधा कप रहने पर पीने से कॉलेस्ट्रोल कम होता है । 

हींग : - हींग , दीपन , पाचन , उत्तेजक , कफ , शूल और अफरानाशक , पित्तवर्द्धक और उष्ण है । हींग विशेष रूप से श्वसन क्षेत्र , पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करती है । हींग अपच , उदरशूल , अफरा और अजीर्ण के लिए श्रेष्ठ औषधि है । यह अरुचि को मिटाती है , कृमिनाशक है । 

कालीमिर्च : - यह अग्नि - दीपक , कफ , कृमिनाशक होती है । इसको सभी प्रकार के बेक्टीरिया और वायरस आदि को नष्ट करने वाला मानते हैं । इसमें उपलब्ध पाइपरीन नामक तत्त्व कीटनाशक होता है । इसके रसायनों का उद्दीपक प्रभाव आमाशय , आंतों , गुर्दे की श्लेष्मा पर होता है । 

यह आंखों की रोशनी बढ़ाती है और त्वचा की कान्ति लाती है । उचित मात्रा में इसका प्रयोग , वायु पीड़ा से मुक्त रखता है । पाचक रस बढ़ाता है , भोजन रुचिकर स्वादिष्ट बनता है , मलेरिया तथा अन्य वायरसजन्य ज्वरों के कीटाणु नष्ट करता है । 

यह खांसी , जुकाम , उदर- कृमि , पेचिश आदि रोगों में हितकारी सिद्ध होता है । कालीमिर्च और तुलसी - पत्र के 10-12 नग , 5 ग्राम अदरक , दो लौंग और दो इलायची मिलाकर औषधीय गुणों से भरपूर काढ़ा बनता है । काढ़े में शहद या गुड़ डालकर पीने से खांसी , जुकाम वायरल बुखार , उदर कृमि और पेचिश रोग ठीक होते हैं । 

पुदीना : - आयुर्वेद के अनुसार यह दीपन , पाचक और सुस्वाद होता है । पुदीना वायु , कफ , जीर्ण ज्वर और कृमिनाशक है । यह खांसी , अजीर्ण अग्निमांद्य तथा अतिसार में उपयोगी है , वमन को रोकता है , चित्त को प्रसन्नता प्रदान कर पाचन शक्ति बढ़ाता है । 

लवंग ( लौंग ) : - लवंग ( लौंग ) भोजन को सुगन्धित बनाने और मुख - शुद्धि के लिए प्रसिद्ध हैं । पांच लौंग पीसकर - गर्म पानी में मिलाकर गरारे करें - दांत - दर्द , कफ जन्य सिर दर्द तथा गले की बीमारी ठीक होती है । इसके लेप को लगाने से गुहेरी , कील , मुंहासे , फोड़े - फुंसी ठीक होते हैं । लौंग के तेल का फाहा , दंत - शूल के समय दांतों के बीच में रखने पर दर्द का शमन होता है , कीड़े मरते हैं । 

जीरा : - यह तीखा , कफ और वात रोगों को शमन करने वाला तथा पित्तवर्द्धक होता है । यह पाचक , रुचि उत्पन्न करने वाला , कफ - नाशक माना जाता है । यह वायु , पेट अफरा , उल्टी , अतिसार , को मिटाता है और ठण्डा माना गया है । जीरा यकृत और आंतों को बल प्रदान करता है । आंतों के भीतर के जन्तुओं को साफ करता है ; दुर्गन्ध दूर करता है , मल बांधता है । 

जीरा प्लेटलेट्स के इकट्ठा होने से रोकता है । जो लोग जीरे का नियमित सेवन करते हैं । उन्हें मूत्र - तन्त्र के कैंसर होने की सम्भावना कम होती है । अतिसार में भुने जीरे के चूर्ण को दही के साथ लेना लाभकारी होता है । जीरे को पोटली बांधकर तवे पर गर्म करें , फिर सूंघें । जुकाम और छींकों के लिए एक उत्तम औषधि है । 

सौंफ : - सौंफ पीसकर शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन , मूत्रावरोध , पेट की मरोड़ , ऐंठन और बच्चों के दांत निकलते समय के उपद्रव शांत होते हैं । चक्कर आने पर सौंफ शक्कर / मिश्री मिलाकर सुबह शाम लेना चाहिए । स्मरण शक्ति के लिए कच्ची सौंफ खाना , सौंफ - शर्बत का प्रयोग करना उपयोगी माना गया है । 

अजवायन : - घरेलू औषधि के रूप में अजवायन के प्रयोग से अनेक रोग दूर होते हैं । यह विशेषकर नशे की लत को समाप्त करती है । शीत के साथ आने वाले वायरस ज्वरों में औषधि का कार्य करती है और प्रबल कीटाणुनाशक तत्व लिए हुए होती है ।

यह प्रबल कीटाणुनाशक है , सड़न रोकने वाली सभी औषधियों में श्रेष्ठ है । अजवायन उदरशूल मिटाती है तथा अभीर्ण , पेचिश , दस्त वगैरह की स्थिति में उपयोगी रहती है । तीन ग्राम अजवायन को गुड़ के साथ मिला कर देने से सभी प्रकार के कीड़े मरते हैं. 

मेथी : - मेथी वस्तुतः प्रकृति का एक वरदान है । यह एक सव - सुलभ पत्ताभाजी है , उत्कृष्ट मसाला है और अनेक औषधि गुणों से भरपूर है । इसका नियमित प्रयोग शरीर को स्वस्थ और निरोग बनाता है । मेथी एक पौष्टिक , स्फूर्तिदायक और रक्तशोधक टॉनिक की मान्यता रखता है । 

यह पित्तवर्द्धक , क्षुधावर्धक , हल्की और रूक्षता लिए रहती है । यह अतिसार को रोकती पेट की गैस दूर करती है , उल्टी , अपच , कफ , गठिया , बवासीर आदि में उपयोगी रहती है । यह मधुमेह के इलाज के लिए कारगर औषधि है । 

हृदय के लिए भी मेथी गुणकारी मानी जाती है । जिन व्यक्तियों को सदैव सर्दी , जुकाम रहता है , मेथी की सब्ज़ी का उपयोग उनके लिए औषधि है । मेथी दाने की चाय ज्वर को कम करने में कुनैन जैसा कार्य करती है । 

यह पेय शरीर का आन्तरिक शोधन करता है , श्लेष्मा को घोलता है , पेट और आंतों की सूजन ठीक करने में सहायक है । गले की खराश में मेथी दाने के गरारे उत्तम रहते हैं । 

मेथी स्त्रियों के गर्भाशय की शुद्धि करती है , उनको बल प्रदान करती है , गर्भावस्था में संचित गन्दगी को दूर करने में इसका सेवन बहुत गुणकारी है । यह माँ के स्तनों में अधिक दूध उपलब्ध कराती है । घुटनों के दर्द , स्नायु रोग , बहुमूत्र रोग , सूखा रोग आदि में हितकारी है । 

मेथी दाना विभिन्न मात्रा में 25 ग्राम से 100 ग्राम तक लेने से ग्लायसीमिया कम होता है , शुगर - स्तर , कॉलेस्ट्रोल और ट्राईग्लेसराइड्स , मधुमेह पीड़ितों में महत्त्वपूर्ण रूप से कम होते हैं ।

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