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नेल्सन मंडेला- Motivational thought | खुद पर काबू रखना अच्छे इंसानों की पहचान है

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खुद पर काबू रखना अच्छे इंसानों की पहचान है। मेरी जिंदगी की अधिकांश गलतियां जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के कारण हुईं । 

जल्दबाजी न करें , सोचें , विश्लेषण करें और फिर उस पर काम करें । नेल्सन मंडेला( nelson mandela)  , दक्षिण अफ्रीका के भूतपूर्व राष्ट्रपति - 

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नेल्सन मंडेला- Motivational thought | खुद पर काबू रखना अच्छे इंसानों की पहचान है

खुद को शांत रखें । जब हम आपा खो देते हैं , तो हालात हाथ से निकल जाते हैं । कई बार ऐसे भी परिस्थितियां बन जाती हैं , जब काबू मुश्किल हो जाता है । आवेश में प्रतिक्रिया देने का मन होता है , लेकिन ऐसी परिस्थितियां कम ही बनती हैं । 

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इन हालातों में प्रतिक्रिया स्वतःस्फूर्त होने के बजाय नपी - तुली होनी चाहिए । नियंत्रण सच्चे लीडर की , बल्कि सच्चे इंसान की भी पहचान है । लीडर्स से लोग शांत बने रहने की उम्मीद करते हैं । केपटाउन में मेरी पहली रैली में शामिल एक महिला ने कुछ दिनों बाद पत्र भेजा । 

कहा कि ' उसे मेरे जेल से छूटने की खुशी है और वह चाहती है कि देश को संगठित करने के लिए मैं काम करूं । पर मेरे भाषण को बेहद उबाऊ बताया । लोग आपसे बस ये जानना चाहते हैं कि बुरे हालातों का सामना आप किस तरह + करेंगे । 

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वे बस चीजों को साफ और तर्कपूर्ण तरीके से समझना चाहते हैं । मैं जब युवा था , तब परिवर्तन की खातिर हर किसी से विवाद करता था , ऊंची आवाज में बात करता था । युवा उम्र में ये सब सहज होता है । लेकिन जोशीलापन दिखाकर अस्पष्ट होने का कोई मतलब नहीं है । 

इससे बेहतर है कि शांत रहकर लोगों में भरोसा पैदा करें । अंततः लोग भरोसा चाहते हैं , भले ही आप उत्साही वक्ता ना हों । आपकी बात और जवाब पूरे , स्पष्ट और हर चीज साफ समझाने वाले होने चाहिए ।

हमारा मिजाज यानी टेम्परामेंट बदलता रहता है । जेल जाने से पहले मैं विद्रोही किस्म का अधीर इंसान था , लेकिन जेल से आने के बाद एकदम अलग किस्म का इंसान था । निर्णय लेने से पहले प्रतीक्षा करता , सारे विकल्पों पर विचार करता । 

मेरी जिंदगी की अधिकांश गलतियां जल्दबाजी में लिए गए फैसलों के कारण हुईं , ना कि बहुत धीरे लिए फैसलों के कारण । जल्दबाजी न करें , सोचें , विश्लेषण करें और फिर उस पर काम करें । साहस हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा हुआ है । साहस का मतलब डर की गैरमौजूदगी नहीं है । 

1994 में दक्षिण अफ्रीका के इतिहास में पहली बार लोकतांत्रित तरीके से चुनाव होने वाले थे । नटल नाम की जगह पर छोटे से प्रोपेलर प्लेन में समर्थकों को भाषण देने जाना था । प्लेन का इंजन फेल हो गया था । प्लेन में मेरे साथ एक अंगरक्षक माइक और पायलट थे । 

मैं स्थिति पर ध्यान न देकर न्यूजपेपर पढ़ता रहा । लैंडिंग के बाद स्वीकार किया कि मैं एकदम डर गया था । इससे पहले भी कई मौकों पर मैं डरा । रिवोनिया मुकदमे के दौरान जहां उम्रकैद की सजा सुनाई तब डर लगा । रॉबन द्वीप पर जब पीटने की धमकी दी गई , तब डर महसूस हुआ । 

आपको डर लगता है , इसे स्वीकार करने में बुराई नहीं है । साहस मतलब डर से बाहर निकलने का हुनर सीखना है । -रिचर्ड स्टेंगल की किताब ' मंडेलाजवे ' से साभार

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