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डॉ . ज्ञानवत्सल स्वामी Motivational speech | आपकी उन्नति अच्छे संबंधो पर टिकी है

Dr. Jnanavatsal Swami Motivational speech hindi: डॉ . ज्ञानवत्सल स्वामी प्रेरक वक्ता 21 वीं सदी में आप बुद्धि से किसी को नहीं जीत पाएंगे क्योंकि हर ती

Dr. Jnanavatsal Swami Motivational speech hindi:  21 वीं सदी में आप बुद्धि से किसी को नहीं जीत पाएंगे क्योंकि हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी क्षेत्र में आपसे ज्यादा बुद्धिमान और पारंगत है । किसी व्यक्ति को जीतना है , तो उसके दिल को जीतना होगा । 

उसके साथ अच्छा व्यवहार रखना होगा । पूरे जीवन के लिए उसके साथ अच्छे संबंध रखेंगे , तभी बेहतरीन जीवन की ओर बढ़ पाएंगे ।

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रोज सुबह , अपने सीने पर हाथ रखकर कहिए कि मैं जीवन में कोई भी गलत काम नहीं करूंगा । दृढ़ निश्चय कर लिया , तो आपकी दुनिया ठीक हो जाएगी । एक बेहतरीन जीवन की ओर बढ़ेंगे ।डॉ . ज्ञानवत्सल स्वामी प्रेरक वक्ता

 डॉ . ज्ञानवत्सल स्वामी Motivational speekar | आपकी उन्नति अच्छे संबंधो पर टिकी है 

आपकी शिक्षा , अनुभव और सोशल सपोर्ट .... यह सब आपके साथ है , तो आप सफलता के सोपान तो चढ़ सकते हैं लेकिन फिर भी एक सीमा होगी । यह सबकुछ आपको एक हद तक पहुंचा सकते हैं । लेकिन उसके पार आपका चरित्र , प्रमाणिकता ही आपको ले जा सकते हैं । आप 500 महापुरुषों के जीवन का अध्ययन कर लीजिए । 

अभी इस समय आने वाली खबरें देख - पढ़ लीजिए । हर दूसरे - तीसरे दिन आपको पढ़ने मिल जाता है कि किसी व्यक्ति की नीतिमत्ता या प्रमाणिकता में कमी आने से पद से हटना पड़ा , तो कोई विदेश भाग गया । अपने जीवन में एथिक्स , नीति - नियम सिद्धांत मत छोडिए । 

कार्य के बाद आता है , लोगों के साथ संबंध । अमेरिकी लेखक और मैनेजमेंट गुरु ऑग मैन्डिनो एक बात कहते हैं कि बिजनेस में आपकी 90 फीसदी ग्रोथ आपके मानवीय संबंधों पर निर्भर होती है । हार्बर्ड यूनिवर्सिटी में दस हजार लोगों का एक सर्वेक्षण हुआ । 

इसमें सामने आया कि आपकी उन्नति में आपका शिक्षण , अनुभव और कला सिर्फ 15 प्रतिशत मदद कर सकती है । बाकी आपकी 85 प्रतिशत उन्नति का कारण लोगों के साथ आपके मानवीय संबंध हैं । अपने व्यवहार में हमेशा विनम्रता और विवेक बनाकर रखिए । 

एक वाक़िआ है । प्रमुख स्वामी महाराज को किसी ने खत लिखा । उसमें उन्होंने आग्रह किया कि मेरी इच्छा है कि आप इसमें ' आइ ब्लैस यू ' लिख दें । स्वामी महाराज एकाध अक्षर तो लिख सकते थे , लेकिन पूरा वाक्य लिखने में किसी की मदद की जरूरत पड़ती थी । उन्होंने बस अंग्रेजी का ' आइ ' लिखा ... बाकी वाक्य सहयोगी ने लिखा । 

स्वामीजी ने आइ स्मॉल में लिखा था , जबकि बाकी का वाक्य केपिटल अक्षरों में लिखा हुआ था । अंग्रेजी व्याकरण के अनुसार यह गलत था । जब उनसे इसका कारण पूछा गया , तो स्वामीजी ने कहा कि जिंदगी में आइ यानी ‘ मैं ' हमेशा छोटा होना चाहिए । पूरे ब्रह्मांड में हमारा अस्तित्व धूल के कण के बराबर भी नहीं है ।

जीवन में एटीट्यूड भी बहुत मायने रखता है । अगर आप सुबह से यह एटीट्यूड लेकर बैठ जाएंगे कि फलां काम और कर मुमकिन नहीं । मैं इसे कैसे करूंगा , तो दौड़ना तो भूल जाइए , ढंग से चल भी नहीं पाएंगे । जब वह काम कोई सकता है तो आप क्यों नहीं ? 

आपका सही एटीट्यूड किसी भी परिस्थिति को आपके लिए लाभदायक हालात में बदल सकता है । हमारी हजारों तरह की ऊर्जा बिना इस्तेमाल के ही व्यर्थ हो जाती है , क्योंकि हमारा एटीट्यूड सही नहीं होता । जबकि आपके अंदर भी सोई हुई ऊर्जा है । 

1983 में कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने विश्व कप जीता था । भारत के लिए वह असाधारण उपलब्धि थी , क्योंकि यह पहली अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी थी । उस समय वेस्टइंडीज बहुत ताकतवर टीम मानी जाती थी । वेस्टइंडीज टीम हारी क्योंकि उनका एटीट्यूड अति - आत्मविश्वास वाला था । 

उन्होंने भारतीय टीम को कमजोर समझा । विश्व कप के बाद वेस्टइंडीज की टीम वनडे और टेस्ट सीरीज खेलने के लिए भारत आई । लेकिन फिर वेस्टइंडीज ने भारतीय टीम को बुरी तरह हराया । 

भारतीय टीम पर सवाल हुए । मीडिया ने आलोचना शुरू कर दी । अब एटीट्यूट बदलने की बारी भारतीय टीम की थी । खिलाड़ियों की काउंसलिंग शुरू हुई । टीम के ओपनर सुनील गावस्कर को कहा गया कि आप रक्षात्मक की जगह आक्रामक खेलना शुरू करें । अपना एटीट्यूड बदलें । इसके बाद टीम के प्रदर्शन में चमत्कारिक रूप से सुधार होना शुरू हो गए ।

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