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motivational speech: अपनी प्रतिक्रिया चुनने से पहले क्षण भर सोचें

 लोग अनजाने ही ऐसी प्रतिक्रिया करने वाले होते हैं जिनके भड़कने का बटन दूसरों के हाथों में रहता है । -दीपक चोपड़ा , विख्यात लेखक 

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अगर हम जीवन में सुख पाना चाहते हैं , तो सुख के बीज बोना सीखना चाहिए । कर्म का अर्थ है कि कर्म करने के साथ - साथ आप उसका फल भी चुन रहे होते हैं । आप भी और मैं भी , अवश्य ही और हमेशा ही । अपने जीवन के हर पल हम ऐसी स्थिति में रहते हैं जहां कुछ न कुछ चयन करने के , कुछ न कुछ चुनने के अवसर हमारे सामने उपस्थित रहते हैं । 

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कुछ चयन तो हम सजग रूप से करते हैं , जबकि बाकी चयन हम गफ़लत में ही कर लिया करते हैं । कर्म सिद्धांत को समझने और उसका अधिकतम प्रयोग करने का सबसे अच्छा तरीका है अपने उन चयनों के प्रति सजग रहना जो कि हम लगभग हर पल ही कर रहे होते हैं । 

अगर मैं आपका अपमान करता हूं तो संभव है कि आप अपमानित महसूस करना चुनेंगे । अगर मैं आपकी प्रशंसा करता हूं तो बहुत संभव है कि आप खुश होना चुनेंगे । जरा सोचिए है तो यह आपका ही चयन । मैं आपका अपमान कर सकता हूं , लेकिन फिर भी आप यह चुन सकते हैं कि खुद को अपमानित महसूस ही न करें । 

दूसरे शब्दों में , हम में से अधिकांश लोग स्वाभाविक रूप से और अनजाने ही ऐसी प्रतिक्रिया करने वाले होते हैं जिनके भड़कने का बटन लोगों व हालातों के हाथों में रहता है । 

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रूसी मनोवैज्ञानिक पावलोव ने यह प्रयोग करके दिखाया था कि अगर आप अपने कुत्ते को कुछ खाना देने से पहले घंटी बजाने लगें तो फिर जब भी आप घंटी बजाएंगे तो तुरंत ही उसके मुंह में लार आने लगेगी , क्योंकि उसके मुंह में लार आना घंटी से जुड़ गया होता है । 

हमारी प्रतिक्रियाएं लोगों और परिस्थितियों द्वारा भड़काई गई प्रतीत तो होती हैं , लेकिन हम भूल जाते हैं कि हमारी प्रतिक्रियाएं भी तो वे चयन हैं जो हम जीवन भर पल प्रतिपल स्वयं करते रहते हैं । 

किसी प्रतिक्रिया का चयन करते समय अगर आप एक पल के लिए रुक जाएं और दो कदम पीछे जाकर अपने उन चुनावों को एक बार देख लें , तो केवल इतना करने से ही आप अनजाने में की गई प्रतिक्रिया की समूची प्रक्रिया को सजग होकर देख सकते हैं । 

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सजग होकर अपने चयन का यह तरीका आपको बहुत शक्ति देगा । जब भी आप कोई कर्म करना चुनते हैं- कुछ भी- तब आप खुद से दो बातें पूछ सकते हैं : पहली बात ' जो कर्म करना मैं चुन रहा हूं उसके परिणाम क्या होंगे ? ' अपने मन में आप तुरंत जान जाएंगे कि वे क्या होंगे । 

दूसरी बात , ' जो कर्म करना मैं चुन रहा हूं वह क्या मुझे और समाज को सुख देगा ? ' अगर इसका उत्तर हां में आए तो आगे बढ़िए । लेकिन , इसका उत्तर अगर ना में आता है , तो उसे मत चुनिए । यह एकदम सीधी सरल बात है । सफलता के सात आध्यात्मिक सिद्धांत से साभार

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