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योग भगाये रोग | 12 महत्पूर्ण योगासान | yoga exercise

योग भगाये रोग | 12 महत्पूर्ण योगासान | yoga exercise : योग एक प्रक्रिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक सूत्र में लाने का काम होता है।योग से शरीर स्वस्थ निरोगी रहता है।  हिन्दू धर्म में प्राचीन काल से ही योग की शिक्षा ली और दी जाती है  हिन्दू धर्म,जैन पन्थ और बौद्ध पन्थ में ध्यान प्रक्रिया से सम्बन्धित है। योग शब्द भारत से बौद्ध पन्थ के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया और श्री लंका में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत्‌ में लोग इससे परिचित हैं।

योग भगाए रोग पर रचनात्मक लेखन , योग का स्वास्थ्य पर प्रभाव


स्वस्थ मन और स्वस्थ तन की कुंजी , योगासन योग सभी के लिए है और इसका नियमित अभ्यास करने से सभी प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं । यह न केवल बीमारियों से बचाता है बल्कि नियमित योग करने से शरीर मजबूत होता है । इससे मानसिक विकास भी होता है तथा मन शांत रहता है यहां कुछ आसान दिए जा रहे हैं जिनको आप नियमित रूप से करके अपने जीवन को सुखी व शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं । योगआसन किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें तो श्रेयष्कर है ।

योग भगाये रोग | 12 महत्पूर्ण योगासान | yoga exercise

1 शवासन 

पीठ के बल लेटकर पैरों के बिच एक फुट का फासला रखें, हथेलियाँ  आकाश की और रखते हुए शरीर से थोड़ा अलग रखे ।   शरीर सीधा परन्तु ढीला रखें।  शवासन चार भागों में  किया जाता है । 

1)  शरीर का प्रत्येक अंग शिथिल होना चाहिए ।   पेरो के पंजों को हिलाकर शिथिल करे ।   इससे पैरों की नशे शिथिल होंगी ।  कन्धों को हिलाये , इससे शिथिल होगा।  गर्दन को हिलाये, इससे मस्तिष्क शिथिल होगा ।  मन मैं यह भाव लाये कि  मेरा पूरा शरीर शिथिल हो रहा है । 

2)  स्वांस जैसे आता जाता है ,आने-जाने दे ।   इससे स्वांस अपने आप सामान्य होगा । स्वांस जितना सूक्ष्म होगा, उतना अधिक आप अपने आपको शिथिल कर पाएंगे। 

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3)  पैरों के अंगूठे से लेकर सिर की चोटी तक एक- एक अंग को मन ही मन बंद आँखों से निहारें , बिल्कुल  वैसे ही, जैसे खड़ा व्यक्ति लेते व्यक्ति को देखता है ।   प्रत्येक अंग को ध्यान लगाए व् महसूस करे की वह पूर्ण रूप से शिथिल हो रहा है । 

आप इस अंतरंग यात्रा को पूरी निष्ठा व् समग्र चेतना से तथा सारी इन्द्रियाँ को केंद्रित करते हुए पुरे ध्यानपूर्वक करे ।  इससे मन व् शरीर विश्राम मैं आता है। 

4)  अनुभव करो की चारों और सुनेहरा रंग का प्रकाश फैला हुआ है ।  मन पूर्णतः शांत है, चित शांत है ।  मस्तिष्क मैं कोई विचार नहीं ।  शरीर पर किसी तरह का तनाव नहीं ,चोरों और तेज सुनहरा प्रकाश फैला हुआ है। 

फिर ध्यान को ॐ  के ऊपर एकाग्र कर दे ।  देखे की दोनों भोहों के बीच  मैं ॐ मैं ही अपने

ईस्वर  का ध्यान करे ।   फिर ध्यान को स्वांस के ऊपर एकाग्र कर दे , दोनों पैरो व् हाथों की उँगलियों को चलाये , दोनों हाथों को आपस मैं रगड़ कर आँखों पर रखे , आँख को अंदर ही खोले बंद करें 5-6  बार । 

फिर दोनों हाथो को ऊपर की और खीचे व् पैरों को नीचे की और खींचे और धीरे से बांये करवट से बैठ जाये। 

 शवासन - स्वांस ,शरीर एवं मन को शांत व् शिथिल व् चिंतारहित बनाकर हानिकारक प्रभावों से बचाता है ।  उच्च रक्तचाप ,स्नायू दुर्बलता, मधुमेहह्रदय रोग व् मानसिक तनाव से ग्रसित लोगों के लिए शवासन अति आवश्यक है। 

दायीं और बायीं  करवट का शवासन 

शवासन के इस प्रकार मैं स्वर विज्ञानं को आधार बनाया गया है।   बायां स्वांस शरीर को ठंडक देता है और दायां  गर्मी ।  जब आप दायीं करवट लेटते है तो बायां  स्वांस चलता है और जब बायीं करवट,तो दाहिना स्वांस  चलता है ।   शवासन को करने के लिए पहले दायीं करवट लेटे । 

दाहिनी कोहनी ता तकिया बना कर उसे सर के निचे रखें।   दूसरा हाथ कमर पर ,टाँग थोड़ी सी मुड़ी हुई, ताकि निचे का भाग भी शिथिल  हो जय ,एक दो मिनट इस स्थिति मैं लेटकर फिर बायीं करवट लेटें । 

भोजन करने के बाद कुछ समय के लिए बायीं करवट लेटने से भोजन का पाचन भली प्रकार होता है 

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2-उत्तानपादासन 

पीठ के बल लेट जाएँ ।   हथेलियां भूमि की और, पैर सीधे व् पंजे मिले हुए हों ।   साँस अंदर भरकर पैरों को धीरे-धीरे लगभग एक फुट तक ऊपर उठाये । कुछ देर तक इस स्थिति मैं रहे ,सामान्यतः 8 -10 सेकण्ड तक । 

वापसी आते समय साँस छोड़ते हुए पैरों को धीरे-धीरे नीचे  लाएं, झटके से नहीं, कुछ देर विश्राम करने के बाद पुनः यही क्रिया दोहराये । 

यह आसान पेट के रोगों को दूर करता है ,आतों  को बल प्रदान करता है। कब्ज ,गैस , मोटापा दूर करता है ।   गर्दै रोग, पेट दर्द या नाभि के हटने ( धरण ) मैं भी उपयोगी है। 

3 हलासन 

सर्वप्रथम पीठ के बल लेट जाएँ ,फिर दोनों हाथों को जंघाओं के पास भूमि पर रखें ।   अपने पैरों को परस्पर मिलकर रखें , पैर के अंगूठे  व् एड़ियों एक दूसरे से मिली रहे ।   पैरों को धीरे-धीरे यहाँ तक उठाये की वे धड़ के साथ एक समकोण बन जाये।  

हाथों को जमीन  पर रखें रहें व् धीरे-धीरे सिर  को ऊपर उठाये और दोनों पैरों को सिर  के पीछे जमीन  पर स्पर्श करे ।  

शरीर का सम्पूर्ण भर कन्धों के ऊपर रहे ।  ठोड़ी  को वक्ष  पर लगाए और धीरे-धीरे साँस ले तथा निकाले ।   हाथों को फर्स  पर रखे ।  फिर धीरे-धीरे हाथों को फर्श पर फैला दे । 

प्रारम्भ मैं धीमी गहरी साँस के साथ कुछ सेकेण्ड इसका अभ्यास  करे ।   शुरू -शुरू मैं हाथों को कमर के पीछे सुविधा के लिए लगा सकते है । 

वापिस आते समय जिस क्रम  से ऊपर गए थे, उसी क्रम  से हथेलियों से भूमि को दबाते हुए पैरों को घुटनों से सीधा रखते हुए भूमि पर टिकाये। 

यह आसान पेट ,जंघाओं और नितम्बों के मोटापे की अधिकता को द्यर करता है ।   मधुमेह ,बवासीर व् थाइराइड ग्रंथिविकार  को दूर करता है । 

यकृत तथा तिल्ली के विकार शांत होते है ।   निःसंतान  स्त्रियों के लिए लाभप्रद है।  उदार मैं अजीणर्ता तथा कब्ज को दूर करता है । 

4 पदमासन 

पैर सीधे कर जमीन  पर बैठे ,घुटनों के पास दाहिने पैर को मोड़कर ,बायीं जांध पर रखे व् बाएं पैर को दाहिनी जंघा पर रखे। और एड़ी ऊपर की और होना चाहिए।  दोनों हाथो को दोनों घुटनों पर रखे । 

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दृष्टि नासिकाग्र या सामने किसी एक स्थान पर मन को स्थिर कर शांत बैठे जाये ।   प्राणायाम व् योगाभ्यास  के लिए यह आसान उत्तम रहता है । 

धायण के लिए यह सर्वश्रेष्ट  आसान है ।  प्रारम्भ मैं १० मिनट व् बाद मैं इसे बढ़ाते जाये ,स्वसन क्रिया संतुलित होती है ।   पाचन-शक्ति मैं वृद्धि  कब्ज दूर करता है । 

5 वज्रासन 

दोनों पैरों को मोड़कर नितम्ब के निचे इस प्रकार रखे की एड़ियों बहार की और निकली हुई हो तथा पंजे नितम्ब से लगे हुए हों।   दोनों  पैरों  के  अगुठे एक दूसरे से लगे होने चाहिए । 

कमर, गर्दन, व् सिर  को एक सीध  मैं रखें ।   घुटने आपस मैं मिले व् हाथों को घुटने के ऊपर रखे ,सांसे सामान्य लेते रहे।   

vajrasana image ,  वज्रासन से क्या फायदा होता है?    वज्रासन कितने मिनट करना चाहिए?  वज्रासन कैसे करते है?  वज्रासन कब और कैसे करना चाहिए?

निचे से लेकर ऊपर तक सभी अंगों पर आतंरिक विचार करे कि  अंगों मैं शक्ति का संचार हो रहा है।   इस स्थिति मैं अधिक से अधिक 10 मिनट बैठें। 

"केवल यही आसान है जो भोजन के तुरंत बाद मैं किया जा सकता है " यह आसान भोजन पचने मैं सहायक है ,यह अतिसार ,पीठ दर्द तथा छाती के कष्टों  को दूर करता है । 

वृद्धावस्था की शिथिलता को रोकता है ,इससे मानसिक निराशा व् स्मरण शक्ति की कमी दूर होती है ।  

6 गोमुखासन 

बांये पैर को घुटने से मोड़ कर एड़ी  दाएं नितम्ब के समीप मैं रखे , फिर दाएं पैर को मोड़ कर एड़ी  को बायें  नितम्ब के पास इस प्रकार से  दोनों घुटने एक -दूसरे को स्पर्श करते हो । 

दायीं भुजा को मोड़कर कोहनी को ऊपर सिर  की और करके पीठ के पीछे ले जाएँ व् बाएं हाथ को मोड़ कर निचे से ले जाकर दाएं हाथ को पकडे ।   

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कुछ समय इस स्थित मैं बैठ कर उसके बाद पैरों व् हाथों की स्थिति को भी बदले ।   इस स्थिति मैं स्वांस गहरी व् लम्बी ले ,कमर व् गर्दन सीधी रखें । 

वह आसान पीठ का दर्द ,गर्दन ,कमर का दर्द ,मधुमेह बहुमूत्र ,धातु दौर्बल्य और ल्यूकोरिया मैं गुणकारी है ।  हर्निया मैं विशेष लाभ देता है । 

ह्रदय गति को नियंत्रित करता है ,फेफड़ों को विशेष सक्रीय करता है स्वांस-खांसी तथा ह्रदय के रोगी इसका 4 से 5 मिनट तक रोज अभ्यास करें । 

7 अर्धमत्स्येंन्द्रासन 

पैरों को सामने फैलाकर बैठ जॉब, बाएं पैर को मोड़कर एड़ी  को नितम्ब के पास लगाएं ।   अब दाएं पैर को बाएं पैर के घुटने के पास बहार की और भूमि के समीप बहार की और सीधा रखते हुए दाएं पैर के पंजे को पकड़े । 

दाएं हाथ को पीठ के पीछे से घुमाकर कर बायीं जांघ से स्पर्श करें । 

अर्धमत्स्येन्द्रासन इन हिंदी ,अर्धमत्स्येन्द्रासन से कौन सा शरीर का विकार ठीक होता है?    अर्धमत्स्येंद्रासन कैसे किया जाता है?

गर्दन को दायीं और घुमाकर पीछे की और देखें ।   मेरुदंड को पूरा मोड़ें और स्थिति को दृढ़ करें । सामान्य साँस के साथ आसान को बनाये रखे ।  मेरुदण्ड  तथा स्वास प्रवाह  पर ध्यान करें। 

इस आसान मैं 30 सेकेण्ड से एक मिनट तक रहें और फिर खोल दे ।   समय को धीरे-धीरे बढ़ाये ,फिर दायाँ  पैर मोड़ कर इस प्रक्रिया को दोहराएं । 

मधुमेह के रोगियों के लिए यह बहुत ही लाभदायक है ।   साथ ही इस आसन के नियमित अभ्यास से कटिवात तथा पीठ की मांशपेशियों की पीड़ा भी दूर होती है मेरुदण्ड  लचीला बनता है मांसपेशियों तथा उदार भाग के अंगों को मालिश होती है जी\जिससे पेट के विकार दूर होते है ।   

कुर्मासन ,योग भगाये रोग | 12 महत्पूर्ण योगासान | yoga exercise

 8 कुर्मासन

 बैठकर कुहनियों को नाभि के दोनों और लगाएं, हथेलियों को ऊपर की और रखते हुए हाथों को मिलकर सीधा रखें ,साँस बहार छोड़ते हुए सामने झुकिए।  हथेलियों से ठोड़ी को स्पर्श कीजिये, दृष्टि सामने रखें ।  इस स्थिति मैं एक मिनट तक रहै ,साँस लेते हुए वापिस आये ।  

यह आसान अग्नाशय को स्वस्थ बनाता है, अतः  मधुमेह दूर करने मैं लाभदायक है पेट के रोगों व् दृष्टि के लिए उपयोगी आसान है । 

9 मण्डूकासन 

 वज्रासन मैं बैठ  कर बाएं हाथ की हथेली पर दाएं हाथ की हथेली रखते हुए हथेलियों को नाभि पर रखकर पेट को अंदर दबाये तथा साँस को बहार निकालते  हुए नीचे को सामने की और झुकिए ।   

यह एक आवृति हुई ,इसी प्रकार तीन चार बार दोहराएं यह आसान मधुमेह ,पेट के रोग व् हृदय के लिए उपयोगी है । 

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10 मकरासन 

पेट के बल लेट जाएँ ।   दोनों हाथों की कोहनियों को मिलकर स्टेण्ड बनाते हुए हथेलियों को ठोड़ी  के नीचे  लगाइये ।  छाती को ऊपर उठाइये | कोहनिया एवं पैरों को मिलकर रखे । 

अब स्वांस को भरते हुए पैरों की क्रमश पहले एक एक तथा बाद मैं दोनों पैरों को एक साथ मोड़ना चाहिए । 

 मोड़ते समय पैरों की एड़ियों नितंब से स्पर्श करे।  स्वांस बाहर निकलते हुए पैरों को सीधा करना चाहिए।  इस प्रकार 20-25 बार करें । 

यह आसान अस्थमा व् फेफड़ों सम्बन्धी किसी भी  तथा घुटनों के दर्द व् सर्वाइकल के लिए विशेष गुणकारी है । 

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11 धनुरासन 

पेट के बल लेट कर अपने पैरों को पीछे की और मोड़कर एड़ियों को नितम्बो के समीप लेट हुए पैरों को हाथों से पकड़ ले ।   हाथों से पैरों के अंगूठों को इस तरह पकडे की  अंगूठे पैरों के तलवों की तरफ रहें और अंगुलियां पैरों के पंजों  पर रहे । 

जांघों ,वक्ष एवं सिर  को ऊपर उठाकर पैरों को यथासंभव सिर  के पास लाये । शरीर को ऊपर उठाते हुए धनुष के आकर मैं ताने । 

शरीर मैं तनाव व् कड़ापन उत्पन करे , जिससे शरीर हाथ, पैर, मेरुदंड, सिर  तथा गर्दन तन जाये । भुजाएं सीधी रहे । 

पूर्ण अवस्था मैं सिर  को पीछे की और झुकाते है तथा शरीर का पूरा भर आमाशय पर पड़ता है,केवल पैरों के स्नायुओं का संकुचन होता है , पीठ एवं भुजाये शिथिल रहती है |  जब तक  अवस्था   मैं रह सकते है रहे । 

मधुमेह इन्द्रियों असयम तथा मासिक धर्म सम्बन्धी अनियमिताओं के उपचार के लिए तथा वक्ष  मैं अनेक रोगों को दूर करने मैं सहायक है अपच व् पुराने कब्ज को दूर करता है ।  

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12 भुजंगासन 

सर्वप्रथम पेट के बल सीधे लेट जाये ,हथेलियों को नीचे  फर्श पर कन्धों के नीचे  रखें ,मस्तस्क भूमि पर दोनों घुटनों व् दोनों एड़ियों व् पैरों को मिलकर रखे । पैरों की उँगलियों व् अंगूठे पीछे की और तने हुए होने चाहिए । 

हथेलियों को जमीन  पर रखें व् धीरे-धीरे स्वांस लेते हुए मस्तिष्क व् गर्दन को ऊपर उठायें फिर धीरे-धीरे वक्ष स्थल  ऊपर उठाये। 

इतना ऊपर उठाये की नाभि से ऊपर का भाग सांप के सामान हो जाये । अनुभव करे की शरीर का सम्पूर्ण भर पैरों और कूल्हे पर टीला हुआ है । शरीर का भार  हथेलियों पर नहीं होना चाहिए । 

२०से ३० सेकण्ड तक ऐसे ही रहे । उदार व् कूल्हे पर ध्यान केन्दित करें ।   धीरे-धीरे स्वांस छोड़ते हुए शरीर को नीचे  लौट ।   पुरे शरीर को पृथ्वी  पर ढीला छोड़ दे और गहरी लंबी साँस ले ये आसान तीन बार दोहराये 

यह आसान मेरुदण्ड  को पुष्ट बनाता  है और वक्ष स्थल को विकसित करता है ह्रदय रोग मैं भी विशेष लाभदायक है । 

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