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रक्षा बंधन स्पेशल कहानी भावसूत्र जो दिल छू जाए

Raksha Bandhan Special 2021 : बहन की रक्षा , उससे स्नेह के लिए भाई को राखी बांधने और उसके पीहर से जुड़ाव और यादों का उत्सव मनाने को रक्षाबंधन का त्योहार है । लेकिन भाई के लिए इसके क्या यही मायने नहीं होने चाहिए ? 

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रक्षा बंधन स्पेशल कहानी "भावसूत्र" जो दिल छू जाए 

Raksha Bandhan 2021 :  माँ-पापा बाहर से ही आवाज देते हुए , तेजस घर में दाखिल हुआ । मां से लिपट कर रो दिया , पापा से भी । बड़ी बहन तेजस्विनी वहीं खड़ी - खड़ी , मुस्करा रही थी । प्यार से धौल जमा कर बोली , ' यह तेरी लड़कियों जैसे रोने की आदत नहीं गई ना । ' ' तो क्या रोने पर तेरा ही हक़ है उसकी नाक खींचते हुए वह उससे भी लिपट गया । साल भर बाद मुश्किल से आने को मिला । भारत में था तो हर महीने चला आता था । 

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तेजस्विनी छेड़ती , ' लड़कियों को होती है ऐसी होम सिकनेस , बोल्ड बन , बहादुर , ऐसे कच्चे मन का रहेगा तो कैसे चलेगा । ' तेजस , तेजस्विनी भाई बहन , भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर , बहन वकील है , माता पिता एक पढ़ा लिखा मध्यम वर्गीय परिवार । तेजस्विनी की शादी हो गई है और हर बार की तरह राखी पर वह घर आई थी । ' 

सावन बच्चों को घर ले आता है , इसलिए मुझे सावन पसंद है ' मां कभी ये नहीं कहती कि सावन बेटियों को घर लाता है । अब तो बेटे भी घर से दूर होते हैं तो उनके लौटने का भी बेटियों की तरह इंतजार करती हैं वो । पिछले साल कोरोना के चलते तेजस नहीं आ पाया था , इस बार जाना ही है , सोचकर रिस्क लेकर आ गया । 

शुरू हुआ मस्ती छेड़खानी का दौर , स्कूल कॉलेज के दौर , दोस्तों की बातें , भाई - बहनों के साथ मस्ती की याद , पुराने किस्से , रात - रात भर तक बातें ख़त्म नहीं होती , मां ने कहा , ' अब सब सो जाओ , 10 बजे तक कुंभकर्ण की तरह पड़े रहोगे । ' उसने मां का पल्लू अपने मुंह पर डालकर कहा , ' ठीक है ना मां कितने दिनों बाद यह गोद नसीब हुई , सच बहुत याद आती है आप सबकी ' कहते हुए उसने मां की गोद में मुंह छुपा लिया । 

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तेजस्विनी ने छेड़ा , ' मां भगवान ने ग़लती कर दी मुझे लड़का और इसे लड़की बनाना था । ' वह उसे -मुंह चिढ़ाता मां से लिपट गया । पुराना एल्बम निकाला गया । हर फोटो में तेजस मां के साथ , तेजस्विनी उसे ' मामाज्ज बॉय ' कहती । वह मोहक दृष्टि से तस्वीरें देखता रहा । एक मौसी की लड़की का तलाक हो गया था , उसकी तस्वीर आते ही तेजस्विनी बोली , ' दीदी ने तलाक ले लिया ना ? ' मां बोली , ' हां , बड़ी दुःखी है । ' 

तेजस ने कहा , ' और जीजाजी ? ' तेजस्विनी भड़क कर बोली , ' उंह लड़के का क्या है मस्त है , उसे क्या परेशानी सारी परेशानी तो बेचारी लड़की को ही झेलनी पड़ती है बेचारी .... ' तेजस ने एक गहरी नजर से ठसे देखा और चुप हो गया । उसे बहुत भाता मां का साथ । बचपन से ही उनके काम में हाथ बंटाना , खाना बना लेता , पढ़ा - लिखा परिवार , बेटा - बेटी में कोई भेद नहीं , ' सब काम सबके ' , यही संस्कार डाले हैं दोनों में ।

मां के हाथ का खाना भुक्कड़ों की तरह टूट कर खाता , खाते - खाते भावुक हो जाता , तेजस्विनी फिर छेड़ती , ' बचपन से रोतला है , छोटी - छोटी बातों पर लड़कियों जैसे टसूए बहाता रहता है । घर अस्त - व्यस्त लेकिन फिर भी सब मस्त , पापा हैरान , साफ़ - सफ़ाई को हरदम चौकस रहने वाली उनकी पत्नी इतनी चुप इतने बिखराव के बाद भी , वे बोले , ' अजी सुनती हो बच्चे क्या आए आप तो हमें भूल ही गईं ' , मुस्कराती हुई कहती , ' थोड़े दिन बाद फिर लौट जाएंगे अपने - अपने घरौंदों में फिर आप और मैं इनकी इन्हीं शरारतों को याद करते रहेंगे , फिर मिलने की आस में । ' 

सच तो कह रही थीं , सावन में उनके घर में बहार थी , बच्चे बहार ही ले आते हैं , बेटी हो या बेटा । ... दिन तेजस्विनी अपने पति से बात एक कर रही थी , उधर से पति ने कुछ कहा तो भड़क उठी , ' क्या मां मां करते रहते हो , अब एक बच्चे के बाप बनने जा रहे हो कब तक मां दीदी , घर को याद कर करके बिसूरते रहोगे । ' फोन पटक कर मां के सामने बड़बड़ाने लगी , ' मां इतने बड़े हो गए , लेकिन मां - बहन से रोज घंटे भर बात करते हैं । घर परिवार हो गए अब तो पल्लू छोड़ें मां का । 

' मां ने कहा , ' माता पिता के लिए तुम कितने भी बड़े हो जाओ बच्चे ही रहोगे , उम्र के साथ प्रेम थोड़ी कम होता है । ' ' लेकिन इतना भी क्या मां मां करना , बच्चों जैसा ' वह बोली । ' मां से बात करते - करते लड़कियों जैसे भावुक हो जाते हैं । अचानक तेजस बोल पड़ा , ' तू कितनी बड़ी हो गई है दीदी , तू भी तो हर छुट्टी में मां - मां करती दौड़ आती है न मायके , रोज तू भी तो बात करती है घंटों मां से , तो जीजाजी अगर अपने मायके जाते हैं तो तुझे तकलीफ़ क्यों होती है ? 

कल को मेरी पत्नी मां - पापा और तेरे लिए मुझे ऐसा बोले तो तुझे कैसा लगेगा ? ' तेजस के स्वर की गंभीरता से वह एकदम चौक गई , सच ही बोल रहा था । ' और जब से आया हूं , आया हूं क्या , बचपन से सुनता रहा हूं ' क्या लड़कियों जैसे , लड़कियों जैसे । लड़कियों जैसे क्या होता है ? लड़का जब भावुक हो , जब रोए , जब कच्चा मन भीग जाए , तो उसे क्या लड़कियों जैसा रो रहा है , यह कह कह करके उसको कठोर बना दो , और बड़ा होने पर उससे संवेदनशीलता की उम्मीद करो ।

 मां - बहन को याद करे तो झिड़को और अपने लिए प्रेम चाहो । जो अपनी मां - बहन से प्यार नहीं करता , उनकी इज्जत नहीं करता वो दुनिया में किसी औरत से प्यार या इज्जत नहीं कर सकेगा । ' ' और उस दिन दीदी के तलाक पर तूने कितनी आसानी से कह दिया कि लड़के को कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा । कैसे नहीं रहा , पड़ेगा यार ? इंसान पैदा होते हैं दोनों एक - सा मन लेकर , एक को औरत बना देते हो , दूजे को आदमी । 

लड़का कहां जाकर अपनी बात कहे , तुम लोगों को तो रोने को न जाने कितने कंधे , गोद मिल जाती हैं , ' बेचारी ' कहकर दुःख बांट लेते हैं । हमारा कोई नहीं , जिसको अपने मन की पीड़ा कहो वह हंसी उड़ाता है , क्या लड़कियों जैसा भावुक हो मर्द बन । मर्द बनाओ फिर कोमलता की अपेक्षा करो । ' आज जैसे तेजस बचपन से अब तक की सारी भड़ास निकाल लेना चाहता था । 

पापा पेपर पढ़ते - पढ़ते उनके बीच आ खड़े हुए । वह आगे बोला , ' मां को प्रेम दिखाओ तो मामाज़ बॉय । बीबी की मदद करो तो जोरू का गुलाम , लड़कियों की मदद करो तो चांगल्या कहते हंसते हो , कहां जाएं हम ? वो तू बोलती है ना भाषण में ' हर आदमी के अंदर एक औरत और हर औरत के अंदर एक आदमी रहता है तो औरत के भीतर के आदमी को जगाने के लिए सब तैयार हैं , लेकिन आदमी के भीतर की औरत को बचपन से सुला देते हो ।

 फिर जब उसे गहरी नींद सुला देते हैं लड़के तो बड़े होने पर अचानक उसे जगाने को कहते हो , कैसे होगा ? जैसे तुझे तेरे मां - बाप भाई - बहन , दोस्त , गलियां - चौबारे , मस्ती , पुरानी यादें आती हैं , रुलाती हैं , ना मुझे भी आती हैं , जीजाजी को भी आती हैं । जैसे तू अभी जीजाजी के बारे में कह रही थी , तुझे तेरे मायके की याद आती है ना मुझे भी आती है , हर लड़के को अपने मायके की याद आती है , तुम्हारा मायका है तो हमारा भी मायका ही है , दूर हमें भी रहना पड़ता है । 

लड़के पत्थर हैं नहीं , बना दिए गए हैं । कुछ खराब लोगों की वजह से सबको ख़राब कैसे कहती हो ' कहते कहते तेजस फफक - फफक कर रो पड़ा । अचानक माहौल गंभीर हो गया । उसे रोते देख तेजस्विनी ने इस बार नहीं कहा , ' क्या लड़कियों जैसे रो रहे हो । ' 

मां ने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा तो मां का हाथ पकड़ वह चुप हुआ । उठकर तेजस्विनी के पास गया , ' इस बार की राखी , रक्षासूत्र तू तो मुझे बांधेगी ही , मैं वचन दूंगा हर औरत का आत्मविश्वास बढ़ाने , उसका भरोसा बनने , उसका साथ देने का । लेकिन इस बार मैं भी तुझे राखी बांधूगा , एक भाव सूत्र , और वचन लूंगा कि तू भी लड़कों की भावना , उनकी तकलीफ़ , भाव समझेगी । 

बोल मंजूर ' , तेजस ने कहकर बचपन की तरह हथेली आगे बढ़ा दी तो तेजस्विनी ने हाथ पर ताली मार दी । तेजस ने कहा , ' जा सोशल मीडिया पर वायरल कर दे यह भावसूत्र का आइडिया , हिट हो जाएगा । देखना तेरे भाषण से ज्यादा इसपर लाइक मिलेंगे तुझे । और हां हो सकता है तेरे पास आने वाले तलाक के केस कम हो जाएं , तो कोई नहीं , उसकी भरपाई मैं कर दूंगा । ' 

कहते हुए उसने फिर तेजस्विनी की नाक खींच दी और तेजस्विनी उसके पीछे कुशन ले उसे मारने दौड़ी । मां ने बेटी को इस हालत में ना दौड़ने की ताकीद की और चुपके से भाई - बहन की नजर उतार ली ।

 कहानी डॉ.गरिमा संजय दुबे 

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