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स्वामी मुकुंदानंद: हमे आदत ढाल रही है या आदत हमें?

"अच्छी आदतें मुश्किल से आती हैं लेकिन उनके साथ जीवन आसान हो जाता है। इसके विपरीत बुरी आदतें आसानी से विकसित हो जाती हैं किंतु उनके साथ जीवन जीना कठिन
Santosh Kukreti

Swami Mukundananda Positive Thought: एक रॉकेट टेक-ऑफ के दौरान अधिक ईंधन खर्च करता है; उसी तरह नई आदतों को बनाने की प्रक्रिया में भी 'लिफ्ट- ऑफ' सबसे कठिन है। इसके लिए इच्छाशक्ति और आत्म-अनुशासन की मानसिक मांसपेशियों को विकसित करने की आवश्यकता होती है। आत्म-अनुशासन से हम जीवन में वह सब प्राप्त कर सकते हैं जो हम चाहते हैं।

"अच्छी आदतें मुश्किल से आती हैं लेकिन उनके साथ जीवन आसान हो जाता है। इसके विपरीत बुरी आदतें आसानी से विकसित हो जाती हैं किंतु उनके साथ जीवन जीना कठिन हो जाता है।"- स्वामी मुकुंदानंद आध्यात्मिक गुरु और लेखक

"Is the habit molding us or is the habit forming us"- Swami Mukundananda spiritual master and author

स्वामी मुकुंदानंद: हमे आदत ढाल रही है या आदत हमें?, Swami Mukundananda Positive motivational speech

हमे आदत ढाल रही है या आदत हमें?Swami Mukundananda Positive motivational Thought

कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलीट्स ने शानदार प्रदर्शन किया। क्या आपने कभी सोचा है कि वे इतनी उत्कृष्टता कैसे प्राप्त करते हैं? इतने तीव्र आत्म- नियंत्रण और अनुशासन की क्षमता कहां से उत्पन्न होती है? किसी भी क्षेत्र में सफलता का रहस्य निहित होता है लाभकारी शारीरिक एवं मानसिक आदतों में। श्रेष्ठ लक्ष्य पाने के लिए आदतों का प्रोडक्टिव होना, उनमें महारत हासिल करना और उन्हें लागू करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

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हमारी आदतें हमारे परिचय का एक हिस्सा बन जाती हैं। वे हमारी पहचान को गढ़ती हैं और व्यक्तित्व का एक वास्तविक पहलू बन जाती हैं। हम अपनी आदतों की मानसिकता के अधीन ही व्यवहार करते हैं। हमारे दैनिक व्यवहार भी इसी आदतन मानसिकता से आते हैं। यदि हमने मन को सकारात्मक पक्ष देखने के लिए अभ्यस्त कर लिया है, तो कठिन परिस्थितियों में भी हम खुशनुमा आशावादी बने रहने की संभावना रखते हैं। 

यदि संदेह करने या दूसरों के अवगुण देखने की आदत डाल ली, तो हम स्वाभाविक ही उनके अच्छे इरादों-कार्यों पर भी संदेह करेंगे। इसी तरह उदारता, सहानुभूति, भय, ईर्ष्या के विचार भी आदतन विचारधारा के पैटर्न से ही हमारे अंदर उत्पन्न होते हैं। पहले हम आदतों को ढालते हैं और बाद में आदतें हमें ढालती हैं। 

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मानव मस्तिष्क में सौ अरब न्यूरॉन्स होते हैं, जो खरबों न्यूरल सर्किट बनाते हैं। प्रत्येक विचार-संरचना जो दिमाग में बनती है, वह न्यूरल सर्किट के ही जुड़ाव का उपयोग करती है। जब हम बार-बार विचारों का एक पैटर्न बनाते हैं, तो मस्तिष्क में उनसे जुड़ी न्यूरल सर्किट की नक्काशी हो जाती है। इसे ही मस्तिष्क की “न्यूरोप्लास्टिसिटी” कहते हैं। इससे मन की कंडीशनिंग होती है। पश्चात, न्यूरल सर्किट के मार्गों के अनुसार कुछ विचार दूसरों की तुलना में अधिक आसानी से उत्पन्न होते जब कोई गतिविधि दोहराई जाती है, तो मस्तिष्क न्यूरल सर्किट के शॉर्टकट बनाकर खुद को प्रोग्राम करता है। इस प्रकार मस्तिष्क आदतें बनाकर काम को सरल-कार्यक्षम बनाता है।

उदाहरण के लिए जब हमने पहली बार टाइप करना शुरू किया तो आवश्यक बटन्स ढूंढने में और उन्हें दबाने में मस्तिष्क को अधिकतम प्रयास करना पड़ा। अभ्यास के साथ मस्तिष्क ने स्वयं की प्रोग्रामिंग करना शुरू कर दिया। यह अधिक आसानी से टाइपिंग के लिए न्यूरल सर्किट बनाता गया। इस प्रकार हम अच्छी आदतें बनाने के लिए मस्तिष्क की कंडीशनिंग की क्षमता का लाभ उठा सकते हैं। 

जहां अच्छी आदतें शानदार व्यक्तित्व की नींव बन जाती हैं, वहीं बुरी आदतें खराब चरित्र का निर्माण करती हैं। जहां अच्छी आदतों का परिणाम सुखी जीवन होता है. वहीं बुरी आदतें दुखी जीवन की ओर ले जाती हैं। इसलिए चाहे हमारे पास कोई भी लक्ष्य हो- वजन घटाने का या एक नया कौशल सीखने का या एक आकर्षक व्यक्तित्व विकसित करने का- अच्छी आदतें विकसित करना अति महत्वपूर्ण है।

अगर हम लापरवाही करते हैं, तो हमारा आत्म-अनुशासन कम हो जाएगा और शरीर में किसी भी अन्य अनुपयुक्त मांसपेशियों की तरह मुरझा जाएगा। जब हम किसी ऐसी चीज में लिप्त होते हैं जो हमें क्षणिक खुशी देती है और फिर हम लापरवाही से उसे दोहराते हैं, तो बुरी आदतें बन जाती हैं। कुछ ही हफ्तों में वह आदत हमें जकड़ लेती है। इन्हें समाप्त करने के लिए हमें बार-बार स्वयं को उन लाभों के बारे में आश्वस्त करना होगा जो हानिकारक आदतों को बदलने से प्राप्त होंगे।

• यूट्यूब: Swami Mukundananda Hindi

• ट्विटर: @Sw_Mukundananda

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