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दीपक चोपड़ा motivational speaker - शरीर को अपना सहयोगी व विश्वसनीय साथी बनाएं

Motivational speaker: जीवन की संरचना कुछ इस तरह से है कि आप सेल्फ रेगुलेशन को न देख सकें ताकि वह कर सकें जो करना चाहते हैं!दीपक चोपड़ा, विख्यात लेखक

Motivational speaker: जीवन की संरचना कुछ इस तरह से है कि आप सेल्फ रेगुलेशन को न देख सकें ताकि वह कर सकें जो करना चाहते हैं!दीपक चोपड़ा, विख्यात लेखक 

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दीपक चोपड़ा motivational speaker - शरीर को अपना सहयोगी व विश्वसनीय साथी बनाएं 

आप अपने शरीर की उपेक्षा कर सकते हैं , लेकिन यह शरीर कभी भी आपकी उपेक्षा नहीं करेगा । गर्भावस्था से ही यह ईमानदारी के साथ आपकी देखभाल शुरू कर देता है । आप भले ही इसकी कितनी भी उपेक्षा या दुरुपयोग करते हैं , आपका शरीर अपने मिशन को नहीं छोड़ता । यह हमेशा आपकी देखभाल करने के लिए मौजूद रहता है अगर आप इसे करने दें । 

रात में जब आप सोने के दौरान अचेत होते हैं तब भी आपका शरीर हजारों प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता रहता है । आपके शरीर का मिशन आपको जीवित , स्वस्थ और चलायमान रखता है । इस क्षमता को सेल्फ रेगुलेशन कहा जाता है । कह सकते हैं कि 50 लाख करोड़ कोशिकाएं सम्मान प्रणाली पर काम कर रही हैं । 

अगर आप अपने शरीर को अपनी देखभाल करने देंगे , तो यह आपका हो जाएगा । सबसे बड़ा सहयोगी विश्वसनीय साथी । शरीर के लिए जो सबसे बड़ा काम आप कर सकते हैं वह यह है कि उसके सेल्फ रेगुलेशन में हस्तक्षेप करना बंद कर दें । भौतिक रूप से गंभीर मोटापे को आप शरीर के साथ किया गया हस्तक्षेप कह सकते हैं । 

शरीर पर बढ़ने वाला अतिरिक्त वजन पूरे सिस्टम पर दबाव डालता है । शरीर और सुपर कम्प्यूटर दोनों एक जैसे हैं । लगातार इनपुट और आउटपुट को प्रोसेस करते रहते हैं , लेकिन यदि आप इसमें जानवरों की चर्बी और कारमेल डालने लगेंगे तो यह काम नहीं करेगा । 

इससे भी बदतर स्थिति तब होती है जब आप मानसिक और भावनात्मक कचरा इसके अंदर डालने लगते हैं । हर नकारात्मक विश्वास शरीर और मन के बीच की साझेदारी को कमजोर करता है । अभी तक हमने शरीर को संरक्षित करने की क्षमता होमियोस्टैसिस को हल्के छुआ बस है । 

जीवन की संरचना कुछ इस तरह से की गई है कि आप सेल्फ रेगुलेशन को न देख सकें ताकि आप वह कर सकें जो करना चाहते हैं । आप कभी भी पार्क में घूमने निकल पड़ते हैं । शरीर को कहते हैं और यह चल देता है । 

यह बहुत ही छोटी सी बात लगती है , लेकिन शरीर को चलने - फिरने के लिए दिया गया आपका हर संदेश शुगर , कोलेस्ट्रॉल , रक्तदाब , शरीर के तापमान , मांसपेशियों , हड्डियों के घनत्व , हार्मोन के स्तर , रोग प्रतिरोधक तंत्र और शरीर के वजन को प्रभावित करता है । 

ऐसा कोई क्षण नहीं होता जब इनमें से प्रत्येक कार्य को रेगुलेट नहीं किया जा रहा होता है , लेकिन इस सबका लक्ष्य क्या है । वह है होमोस्टैसिस को दुरुस्त रखना । यदि होमोस्टैसिस बंद हो जाता है , तो शरीर को आपको एक संकेत भेजता है । मांसपेशियों में कमजोरी , जोड़ों में दर्द होता । सांस फूलना ये वो संकेत हैं जो सेल्फ रेगुलेटेड होमोस्टैसिस आपको भेजता है कि आप उस पर ध्यान दें । - पुस्तक व्हाट आर यू हंगर फॉर से साभार

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