हिन्दी के प्रमुख ' तद्धित ' प्रत्यय |Hindi's main 'tadhit' suffix

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हिन्दी के प्रमुख ' तद्धित ' प्रत्यय |Hindi's main 'tadhit' suffix

हिन्दी के प्रमुख ' तद्धित ' प्रत्यय Hindi's main 'tadhit' suffix

हिन्दी के तद्भव - शब्दों में तद्धित प्रत्यय जोड़कर संज्ञा और विशेषण शब्द बनाये जाते हैं । हिन्दी के प्रमुख तद्धित प्रत्यय निम्नलिखित हैं : 

( १ ) आ- इसके योग से संज्ञा से विशेषण और साधारण संज्ञा से भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

भूख

भूखा

प्यास

प्यासा

बोझ

बोझा

खटक

खटका

( २ )आई- इस प्रत्यय के योग से विशेषणों और संज्ञाओं से भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं ।जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

विदा

विदाई

भला

भलाई

बुरा

बुराई

अच्छा

अच्छाई

ठाकुर

ठकुराई

अधम

अधमाई

 ( ३ ) आन- इससे भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे— 

संज्ञा

विशेषण

लम्बा

लम्बान

ऊँचा

ऊँचान

चौड़ा

चौड़ान

नीचा

नीचान


( ४ ) आना- इस प्रत्ययानुसार स्थानवाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

हिन्दू

हिन्दुआना

राजपूत

राजपुताना

तेलंग

तेलंगाना

बघेल

बघेलाना


(५) आर- इस प्रत्यय के योग से कर्तृवाचक संज्ञाएँ बनती है । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

कुम्भ

कुम्भार

सोना

सोनार

लोहा

लोहार

चर्म

चर्मकार

कभी - कभी इस प्रत्यय से विशेषण भी बनते हैं । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

दूध

दुधार

गाँव

गवार


(६) आरा , आरी- इन प्रत्ययों का प्रयोग भी ' आर ' के समान ही होता है । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

हत्या

हत्यारा

घास

घसियारा

भीख

भिखारी

पूजा

पुजारी


(७) आल , आला- इन प्रत्ययों से संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

कृपा

कृपाल

ससुर

ससुराल

दया

दयाला

शिव

शिवाला

छिन्ना

छिनाल ( छिनार )

पानी

पनाल , पनाला


( ८ ) आवट- इसके योग से भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं ।जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

नीम

निमावट 

आम

अमावट


( ९ ) आस- इस प्रत्यय के जुड़ने से विशेषण और भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

मीठा

मिठास

खट्टा

खटास

नींद

निंदास

ऊँघ

ऊँघास


( १० ) आहट- इस प्रत्यय के योग से भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

चिकना

चिकनाहट

कड़आ

कडुआहट

गरम

गरमाहट

मुस्कान

मुस्कुराहट


( ११ ) इया- इस प्रत्यय के योग से कर्तृवाचक और स्थानवाचक संज्ञाएँ बनती हैं ।जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

दुःख

दुखिया

आढ़त

अढ़तिया

बाग़

बगिया

ओसोम

ओसोमिया

भोजपुर

भोजपुरिया

रस

रसिया


( १२ ) ई- इससे भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

खेत

खेती

सुस्त

सुस्ती

सावधान

सावधानी

चोर

चोरी

महाजन

महाजनी

चौकीदार

चौकीदारी


( १३ ) ईला- इस प्रत्यय के प्रयोग से विशेषण बनते हैं । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

रंग

रँगीला

रेत

रेतीला

रस

रसीला

पत्थर

पथरीला

ज़हर

ज़हरीला

सुर

सुरीला

( १४ ) ' ऊ'- इससे विशेषण शब्द बनते हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

बाज़ार

बाजारू

गवारू

गँवार

टहल

टहलू

गरज

गरजू


( १५ ) एरा- इस प्रत्यय द्वारा विभिन्न शब्द बनते हैं । जैसे- 

संज्ञा

विशेषण

मामा

ममेरा

चाचा

चचेरा

अन्ध

अंधेरा

सॉप

सपेरा

घना

घनेरा

मौसा

मौसेरा

( १६ ) एड़ी- इस प्रत्यय से कर्तृवाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

भाँग

भंगेड़ी

गाँजा

गॅजेड़ी

( १७ ) औती- इससे भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

काठ

कठौती

मान

मनौती

बाप

बपौती

चूना

चुनौती

( १८ ) ओला- इससे लघुतावाचक शब्दों का निर्माण होता है । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

साँप

सँपोला

खाट

खटोला

( १ ९ ) - इसके विभिन्न प्रयोग हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

ढोल

ढोलक

पंच

पंचक

सप्त

सप्तक

बाल

बालक

( २० ) ऐल- इस प्रत्यय से गुणवाचक विशेषण बनते हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

झगड़ा

झगड़ैल

दाँत

दंतैल

तोंद

तोदैल

रोब

रौबेल

( २१ ) - इस प्रत्यय के योग से भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

संग

संगत

रंग

रंगत

चाह

चाहत

पंग

पंगत

( २२ ) पन- इस प्रत्यय के योग से भाववाचक संज्ञाएँ निष्पन्न होती हैं । जैसे

संज्ञा

विशेषण

मैला

मैलापन

लड़का

लड़कपन

बच्चा

बचपन

ढीला

ढीलापन

छोटा

छोटापन

ओछा

ओछापन

अक्खड़

अक्खड़पन

बड़ा

बड़प्पन

( २३ ) पा- यह ' पन ' का ही दूसरा रूप है । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

बहन

बहनापा

बूढ़ा

बुढ़ापा

मोटा

मोटापा

रॉड्र

रँड्रापा

( २४ ) हारा- इसके योग से कर्तृवाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

लकड़ी

लकड़हारा

पानी

पनिहारा

घास

घसिहारा

( २५ ) - इसके योग से भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

उष्मा

उमस

तम

तमस

( २६ ) ता- इसके योग से भाववाचक संज्ञाएँ निष्पन्न होती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

मधुर

मधुरता

मित्र

मित्रता

कवि

कविता

मानव

मानवता

मनुज

मनुजता

सुन्दर

सुन्दरता

( २७ ) हरा- इसके योग से विशेषण शब्द निष्पन्न होते हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

एक

एकहरा

तीन

तिहरा

सोना

सुनहरा

रूप

रूपहरा

( २८ ) वाला- इसके योग से कर्त्तृवाचक संज्ञाएँ बनती हैं । जैसे-

संज्ञा

विशेषण

टोपी

टोपीवाला

धन

धनवाला

पानी

पानीवाला

रूप

रूपवाला

ये भी देखें - प्रत्यय(अर्थ और परिभाषा) किसे कहते हैं,प्रत्यय प्रकार /भेद और उदाहरण | Pratyay in hindi


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