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भारतीय संविधान में citizenship क्या है ?नागरिकता acquisition और termination प्रोसेस क्या है ?

किसी व्यक्ति को नागरिकता citizenship की आवश्यकता होती है। citizenship का अर्थ है "किसी राष्ट्र की सदस्यता,जिससे उस नागरिक को उस देश में रहने का

भारतीय संविधान में citizenship क्या है ?नागरिकता acquisition और termination प्रोसेस क्या है ?

भारतीय नागरिकता कैसे मिल सकती है?,What is citizenship in Indian constitution in Hindi ?,Rules for the acquisition and termination of citizenship
भारतीय संविधान में citizenship क्या है ?

 नागरिकता का परिचय Introduction to Citizenship in Hindi

नागरिकता क्या है:- जिस प्रकार हमें दुनिया में मौजूद होने के लिए पानी, प्रकाश और हवा की आवश्यकता होती है, इसी प्रकार समाज में रहने वालों के लिए, किसी व्यक्ति को नागरिकता citizenship की आवश्यकता होती है।  citizenship  का अर्थ है "किसी राष्ट्र की सदस्यता,जिससे उस नागरिक को उस देश में रहने का अधिकार  प्राप्त होता है।"

भारत का संविधान संघात्मक है , फिर भी यहाँ के नागरिकों को एकल नागरिकता प्रदान की गई है । भारतीय नागरिक भारत के संविधान में उल्लिखित सभी राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों का आनंद ले सकते हैं। भारतीय संविधान के भाग ॥ ( अनुच्छेद 5-11 तक ) में नागरिकता सम्बन्धी प्रावधान दिए गए हैं ।  तो आइये जानते है - नागरिकता क्या है? What is citizenship in the Indian constitution in Hindi ?नागरिकता acquisition और termination प्रोसेस क्या है ?

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भारतीय संविधान में नागरिकता की प्राप्ति (Citizenship in Indian Constitution in Hindi)

संसद द्वारा पारित भारतीय नागरिकता अधिनियम , 1955 में नागरिकता प्राप्ति हेतु निम्न प्रावधान किए गए है जो इस प्रकार है :- 
  • जन्म आधारित
  • वंशानुगत अथवा रक्त सम्बन्ध आधारित
  • पंजीकरण आधारित
  • देशीयकरण द्वारा
  • भारतीय राज्य क्षेत्र के विस्तार द्वारा

जन्म आधारित(By birth based):- कोई भी व्यक्ति जिसका जन्म भारत में 26 जनवरी , 1950 के बाद हुआ हो वह जन्म से भारत का नागरिक होगा । अपवाद - राजनयिकों एवं शत्रु विदेशियों के बच्चे । 

वंशानुगत अथवा रक्त सम्बन्ध आधारित कोई भी व्यक्ति जिसका जन्म 26 जनवरी , 1950 के बाद भारत के बाहर हुआ हो , कतिपय अपेक्षाओं (Certain Requirements) के अधीन रहते हुए , भारत का नागरिक होगा यदि उसके जन्म के समय उसका पिता भारत का नागरिक हो । 

पंजीकरण आधारित (Registration based):- कुछ दशाओं में निम्न श्रेणी के व्यक्ति विहित रीति में पंजीकरण द्वारा भारत की नागरिकता अर्जित कर सकते हैं -

  • जो व्यक्ति अविभाजित भारत के अलावा किसी भी देश में निवास करते हों तथा भारतीय मूल के हों
  • भारतीय मूल के व्यक्ति , जो आवेदन से पूर्व भारत में औपचारिक रूप से 6 महीने से निवास कर रहे हों
  • जो महिलाएँ भारतीय नागरिक पुरुषों से विवाह करती हैं
  • भारतीय नागरिकों के बच्चे
  • जो राष्ट्रमण्डल के राज्यों के वयस्क नागरिक हों । 

देशीयकरण (Naturalization) द्वारा - कोई भी विदेशी व्यक्ति निम्न शर्तों पर भारतीय नागरिकता अर्जित कर सकता है- 

  1. वह किसी ऐसे देश का नागरिक न हो , जहाँ भारत द्वारा देशीयकरण प्रतिबन्धित हो
  2. उसके द्वारा अपने देश की नागरिकता से त्याग - पत्र दे दिया गया हो
  3. आवेदन करने के ठीक पूर्व उसने भारत में कम - से - कम कुल एक वर्ष तक निवास किया हो अथवा भारत सरकार की सेवा में रहा हो
  4. वह उपरोक्त एक वर्ष के ठीक पूर्व 7 वर्ष की अवधि में कम - से - कम कुल 4 वर्ष तक भारत सरकार की नौकरी में रहा हो अथवा भारत में निवास करता हो । 

भारतीय राज्य क्षेत्र के विस्तार द्वारा- यदि कोई राज्य क्षेत्र भारत का अंग बन जाता है तो भारत सरकार आदेश द्वारा यह निर्दिष्ट कर सकती है कि उसके परिणामस्वरूप कौन व्यक्ति भारत के नागरिक बन सकते हैं । 

1986 में भारतीय नागरिकता अधिनियम , 1955 में संशोधन किया गया , जो निम्न प्रकार प्रावधान करता है-

  • जन्म के आधार पर नागरिकता केवल वही व्यक्ति अर्जित कर सकता है जिसने 10 दिसम्बर , 1992 के बाद भारत के बाहर जन्म लिया हो भारत का नागरिक होगा यदि उसके माता - पिता में से कोई जन्म के समय भारत का नागरिक था । 
  • पंजीकरण के माध्यम से जो व्यक्ति भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं , उन्हें अब भारत में कम - से - कम पाँच वर्ष ( पूर्व में यह अवधि 6 माह थी ) निवास करना होगा । 
  • भारतीय पुरुष से विवाह करने वाली विदेशी महिला को नागरिकता प्राप्त करने हेतु अधिकार प्रदान किया गया । 
  • कोई भी व्यक्ति अब देशीयकरण द्वारा नागरिकता तभी प्राप्त कर सकता है , जब वह कम - से - कम 10 वर्ष तक भारत में निवास कर चुका हो । इससे पहले यह अवधि 5 वर्ष थी । 

भारतीय संविधान में नागरिकता की समाप्ति (Termination of citizenship in the Indian Constitution in Hindi)

भारतीय संविधान एवं नागरिकता अधिनियम , 1955 में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार निम्न प्रकार से भारतीय नागरिकता का लोप अथवा खो हो सकता है-जो निम्लिखित प्रकार से है -
  • नागरिकता परित्याग
  • नागरिकता पर्यवसान
  • नागरिकता से वंचित किया जाना

परित्याग- कोई भी व्यक्ति स्वैच्छिक रूप से भारतीय नागरिकता का परित्याग कर सकता है तथा किसी अन्य राष्ट्र की नागरिकता प्राप्त कर सकता है ,

पर्यवसान(Termination)- जब कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता अर्जित कर लेता है तो उसकी भारत की नागरिकता समाप्त हो जाती है । 

वंचित किया जाना- भारत सरकार द्वारा निम्न स्थितियों में किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त की जा सकती है 

  • किसी व्यक्ति द्वारा कपट से भारतीय नागरिकता अर्जित किए जाने पर 
  • किसी व्यक्ति द्वारा देशद्रोह किए जाने अथवा युद्ध के समय शत्रु की सहायता किए जाने पर 
  • पंजीकरण अथवा देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के पाँच वर्ष के भीतर व्यक्ति को किसी देश में कम - से - कम दो वर्ष की सजा होने की स्थिति में इसके अलावा किसी स्त्री अथवा पुरुष द्वारा किसी अन्य देश की स्त्री अथवा पुरुष विवाहोपरान्त वहाँ की नागरिकता प्राप्त कर से लेने की स्थिति में भारतीय नागरिकता का समाप्त हो जाता है ।

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