जिंदगी का इम्तेहान sort story

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 जिंदगी का इम्तेहान sort story 

जिंदगी का इम्तेहान sort story ,zindagi ka intahan, Hindi short Stories

परीक्षा जब होती है , तो इंसान को अकेले ही उसका सामना करना पड़ता है । लेकिन अक्सर हम पीड़ा या कष्ट जताकर सहानुभूति जुटा ही लेते हैं । कुछ लोग हिम्मती होते हैं । 

बगल वाले कमरे में से लगातार आती पदचाप और आवाजों के कारण मेरी नींद खुल गई । समय देखा तो रात्रि के दो बजे थे । 

में समझ गया , यह आवाज राधिका की थी । राधिका नाटे कद की , घुंघराले बालों वाली , लगभग बीस - बाईस वर्ष की सुंदर युवती थी जो यहां रहकर वरिष्ठ अध्यापक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी । उनके पति ऑफिस के काम से कई दिनों से बाहर गए हुए थे । परिस्थितियां और कारण चाहे जो भी रहे हों , पर हम जानते थे कि उसके परिजन उसकी शक्ल तक देखना पसंद नहीं करते थे । 

रात का समय था । मेरी हिम्मत नहीं हुई उसका दरवाजा खटखटाने की । मैंने मकान मालिक को फोन किया । मकान मालकिन ने आकर दरवाजा खुलवाया । जिस बात का उन्हें डर था , आख़िर वही हुआ । राधिका को प्रसव पीड़ा हो रही थी । 

मकान मालकिन कहने लगीं , ' इसके पति को फोन करो । इसके घर वालों को फोन करो । कोई तो होगा इसके आगे - पीछे ? इतनी रात को क्या करें , किसको जगाएं ? " ' 

आंटी जी , जब जंगल में शेरनी शावक को जन्म देती है , तो उसके साथ कौन होता है ? क्या फुटपाथ पर रहने वाली महिलाएं अकेले ही अपने बच्चों को जन्म नहीं देतीं ? आप मेरी चिंता मत कीजिए ' राधिका ने हिम्मत से स्पष्ट जवाब दिया । 

अंधेरी रात में अकेली , वह धीमे - धीमे कदमों से अस्पताल की ओर चलने लगी । मैं संकोचवश कुछ कह तो ना सका , पर उसके पीछे - पीछे चलने लगा । फिर स्थिति की गंभीरता को समझते हुए , मैंने अपने फोन से टैक्सी बुक कर दी । आगे वाली सीट पर बैठे हुए , जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह सहज दिखाई दे रही थीं । अचानक मुझे याद आया और मैं उनसे पूछ बैठा ' आज तो आपकी एम.ए. फाइनल की परीक्षा है ना ? " 

उन्होंने गहरी सांस लेते हुए जवाब दिया ' देवेंद्र जी , इस दुनिया में ना , परीक्षाएं कभी समाप्त नहीं होतीं । जन्म से लेकर मृत्यु तक , हर कदम पर हमारी परीक्षाएं होती हैं । हमें इन में भी सफल होना होता है । ' मैं निरुत्तर था । 

प्रातः के 4:00 बजने को थे । लेबर रूम से बाहर आते हुए नर्स ने बताया ' राधिका को लड़का हुआ है । अक्सर ऐसे समय में जिन महिलाओं के साथ में बहुत - से परिजन होते हैं , वे दर्द से चीख लेती हैं । अपनी पीड़ा को प्रकट करने लगती हैं । घबरा जाती हैं और आजकल तो यह भी होता है कि अंत में उनका सिजेरियन करना पड़ता है । इसके विपरीत ऐसी गंभीर व विपरीत परिस्थितियों में राधिका ने साहस व सकारात्मकता का अनोखा उदाहरण दिया है । उसने बहुत हिम्मत दिखाई । असहनीय कष्ट को भी सहजता से हंसते मुस्कराते सह लिया । उसके जीवन के इस्तेहान वाला नजरिया हम सबको चौंका गया ।

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