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तुझे हक है एक शार्ट स्टोरी | Tujhe hak hai ek choti kahani

तुझे हक है एक शार्ट स्टोरी | Tujhe hak hai ek choti kahani नेहा ने सोती दिव्या के सिर पर हाथ फिराया और कहा , “ तुझे हक है , बेटा । ” फिर मन ही मन बोल
Santosh Kukreti

नेहा ने सोती दिव्या के सिर पर हाथ फिराया और कहा , “ तुझे हक है , बेटा । ” फिर मन ही मन बोली , ' मुझे गर्व है कि तुम मेरी बेटी हो !

ख्वाहिशों को मेरी उड़ान चाहिए , 

उड़ने को खुला आसमान चाहिए । 

बेड़ियां मत डालो बेटी समझ कर , 

आजादी हो जहां ऐसा जहान चाहिए ।

तुझे हक है एक शार्ट स्टोरी | Tujhe hak hai ek choti kahani

स्टोरी- नन्दिनी रस्तोगी '

नेहा को नींद नहीं आ रही थी । वह सबको सोता देख रही थी और फिर दिव्या के बारे में सोचने लगी , ' यह शुरू से ही चुलबुली है । अपना परिचय तो इसने जन्म के तुरंत बाद ही दे दिया था । जब इसके ताऊ जी ने कान के पास चुटकी बजाई तो इसने उधर ही निगाह घुमाई थी । 

गोरी चिट्टी , गोल - मटोल , सभी को अपने वश में करने में वाली अपनी तोतली भाषा में जब यह बोलती , " तटोड़ी में पतोड़ी थानी है " , तो सब इसके होकर रह जाते । अपने पापा के लिए तो यह बहुत ही भाग्यवान है । उनके घर में बरकत उस दिन से ही शुरू हुई , जिस दिन इसका जन्म हुआ । '

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धीरे - धीरे बड़ी होती दिव्या ने अपने पापा की जिम्मेदारी संभाल ली । वह सर्विस पर जाने लगी । बिजली के बिल से लेकर घर और बाहर के सभी काम करने लगी । अपनी जिद के कारण उसने पुराने मकान को तोड़कर नए सिरे से बनवाया । अब उसे घर में एसी लगवाना था । 

दिन रात मां के चारो ओर घूम घूमकर उनका सिर खाना , यह तो उसकी बचपन की आदत थी । जब तक ' हां ' न बुलवा ले , उसे चैन नहीं मिलता । माँ ने कहा " बेटा , बिजली का बिल अधिक आएगा ।

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वह बोली , " समझ लो , मेरी सैलरी नहीं बढ़ी । " मां ने कहा , " कूलर में तो तुम चादर ओढ़ के सोती हो ? " 

वह बोली , " वह तो मच्छर की वजह से सोते हैं । "

" एसी तो बहुत महंगा आता है ! " 

" जीरो परसेंट ईएमआई पर लेंगे । महंगा कहीं भी नहीं है । " उसके पास हर बात का जवाब था । आखिर में मां ने हामी भर ही दी । क्यों भरी , दिव्या यह नहीं जानती थी । उसकी एक बात मां के दिल को लग गई थी कि आज भी अपने हक के लिए बेटियों को लड़ना पड़ता है । तब मां ने सोचा , ' उसका घर है । वह चाहे जो कराए ।

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एसी ही तो लगवा रही है , कोई गलत काम तो नहीं कर रही । ' यह सोचकर मां ने हंसते हुए स्वीकृति दे दी और उनके घर एसी लग गया । 

आज पूरा परिवार अलग -अलग कमरों में नहीं , एक साथ सो रहा था एसी के कारण या दिव्या की समझदारी के कारण । नेहा ने सोती हुई दिव्या के सिर पर हाथ फिराया और कहा , " तुझे हक है , बेटा । " फिर मन ही मन बोली , ' मुझे गर्व है कि तुम मेरी बेटी हो ! "

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